00:00मलिपुर के बिश्णोपुर जिले में लोग तक जील के बीचो बीच एक अनोखा स्कूल है।
00:07यह तैरता हुआ प्राथमिक विद्याले यानि फ्लोटिंग एलिमेंटरी स्कूल।
00:12यह कोई पारंपरिक स्कूल नहीं है।
00:15चात्र यहां नाव से आते हैं और अपनी किताबों के साथ तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर चटाई पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं।
00:23लोग तक फ्लोटिंग एलिमेंटरी स्कूल की शुरुआत चंपुख खंगपोक में की गई थी जो एक तैरता हुआ गाउं है।
00:31इस गाउं में रहने वाले लगबत 330 लोग अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए मुखे तोर पर मचली पकड़ने पर निरभर हैं।
01:01इस फ्लोटिंग इस्कूल को फुमदी जलिय वरस्पती के घने तैरते हुए धेर के उपर बनाया गया है।
01:23ये लोग तक जिल की पहचान है और ऐसी सनरशनाओं को सहरा देने के लिए पेहत मजबूत हैं।
01:29लोग तक फ्लोटिंग इस्कूल को शुरू हुए अभी सिर्फ नौ साल ही हुए हैं लेकिन ये अपने अस्त्तो बचाने की लडाई लड़ रहा है।
01:37मचवारा समधाय ने अब स्कूल चलाने में मदद के लिए सरकार से मदद मागी है।
01:43यहाँ पर चंपु खंपु में एक स्कूल था, इलेमेंटरी स्कूल ये 1916 से सुरू हो गया।
01:51यहाँ गभ्मेन की कोई सविदा नहीं है।
01:54यह एलेमेंटरी स्कूल एक इस्थानिये गैर सरकारी संगठन के सहयोग से शुरू की लिए पर चंपु खंपु खंपु के अंदर में कोई सविदा नहीं मिलता।
02:02यह एलेमेंटरी स्कूल एक इस्थानिये गैर सरकारी संगठन के सहयोग से शुरू किया गया था।
02:26यह उन छोटे बच्चों के लिए हैं जिने लगातार देखरेक की जरूरत होती है।
02:31कई बड़े बच्चों को उनके माता-पिता बोर्डिंग स्कूलों में भेज देते हैं।
03:01इस वक्त फ्लोटिंग स्कूल में 25 से भी कम छात्र नामंकित है।
03:15शिक्चकों और बुनियादी धाचे की कमी की वज़ा से ये हफते में सिर्फ दो बार ही चलता है।
03:21मचवारा समधाय को उमीद है कि इस बेहतरीन फ्लोटिंग स्कूल को जारी रखने और उसे बेहतर बनाने में सरकार दखल देगी और मदद करेगी।
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