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  • 5 months ago
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में लोकतक झील के बीचोंबीच एक अनोखा स्कूल है. ये है तैरता हुआ प्राथमिक विद्यालय यानी फ्लोटिंग एलिमेंटरी स्कूल. ये कोई पारंपरिक स्कूल नहीं है. छात्र यहां नाव से आते हैं और अपनी किताबों के साथ तैरते हुए प्लेटफार्म पर चटाई पर बैठकर पढ़ाई करते हैं. लोकतक फ्लोटिंग एलीमेंट्री स्कूल की शुरुआत चंपू खंगपोक में की गई थी जो एक तैरता हुआ गांव है. इस गांव में रहने वाले लगभग 330 लोग अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए मुख्य तौर पर मछली पकड़ने पर निर्भर हैं. इस फ्लोटिंग स्कूल को फुमदी जलीय वनस्पति के घने तैरते हुए ढेर के ऊपर बनाया गया है. ये लोकतक झील की पहचान है और ऐसी संरचनाओं को सहारा देने के लिए बेहद मजबूत है. लोकतक फ्लोटिंग एलीमेंट्री स्कूल को शुरू हुए अभी सिर्फ नौ साल ही हुए हैं लेकिन ये अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है. मछुआरा समुदाय ने अब स्कूल चलाने में मदद के लिए सरकार से मदद मांगी है. ये एलिमेंटरी स्कूल एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से शुरू किया गया था. ये उन छोटे बच्चों के लिए है जिन्हें लगातार देख-रेख की जरूरत होती है. कई बड़े बच्चों को उनके माता-पिता बोर्डिंग स्कूलों में भेज देते हैं. इस वक्त फ्लोटिंग स्कूल में 25 से भी कम छात्र नामांकित हैं. शिक्षकों और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से ये हफ्ते में सिर्फ दो बार ही चलता है. मछुआरा समुदाय को उम्मीद है कि इस बेहतरीन फ्लोटिंग स्कूल को जारी रखने और उसे बेहतर बनाने में सरकार दखल देगी और मदद करेगी.

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00:00मलिपुर के बिश्णोपुर जिले में लोग तक जील के बीचो बीच एक अनोखा स्कूल है।
00:07यह तैरता हुआ प्राथमिक विद्याले यानि फ्लोटिंग एलिमेंटरी स्कूल।
00:12यह कोई पारंपरिक स्कूल नहीं है।
00:15चात्र यहां नाव से आते हैं और अपनी किताबों के साथ तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर चटाई पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं।
00:23लोग तक फ्लोटिंग एलिमेंटरी स्कूल की शुरुआत चंपुख खंगपोक में की गई थी जो एक तैरता हुआ गाउं है।
00:31इस गाउं में रहने वाले लगबत 330 लोग अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए मुखे तोर पर मचली पकड़ने पर निरभर हैं।
01:01इस फ्लोटिंग इस्कूल को फुमदी जलिय वरस्पती के घने तैरते हुए धेर के उपर बनाया गया है।
01:23ये लोग तक जिल की पहचान है और ऐसी सनरशनाओं को सहरा देने के लिए पेहत मजबूत हैं।
01:29लोग तक फ्लोटिंग इस्कूल को शुरू हुए अभी सिर्फ नौ साल ही हुए हैं लेकिन ये अपने अस्त्तो बचाने की लडाई लड़ रहा है।
01:37मचवारा समधाय ने अब स्कूल चलाने में मदद के लिए सरकार से मदद मागी है।
01:43यहाँ पर चंपु खंपु में एक स्कूल था, इलेमेंटरी स्कूल ये 1916 से सुरू हो गया।
01:51यहाँ गभ्मेन की कोई सविदा नहीं है।
01:54यह एलेमेंटरी स्कूल एक इस्थानिये गैर सरकारी संगठन के सहयोग से शुरू की लिए पर चंपु खंपु खंपु के अंदर में कोई सविदा नहीं मिलता।
02:02यह एलेमेंटरी स्कूल एक इस्थानिये गैर सरकारी संगठन के सहयोग से शुरू किया गया था।
02:26यह उन छोटे बच्चों के लिए हैं जिने लगातार देखरेक की जरूरत होती है।
02:31कई बड़े बच्चों को उनके माता-पिता बोर्डिंग स्कूलों में भेज देते हैं।
03:01इस वक्त फ्लोटिंग स्कूल में 25 से भी कम छात्र नामंकित है।
03:15शिक्चकों और बुनियादी धाचे की कमी की वज़ा से ये हफते में सिर्फ दो बार ही चलता है।
03:21मचवारा समधाय को उमीद है कि इस बेहतरीन फ्लोटिंग स्कूल को जारी रखने और उसे बेहतर बनाने में सरकार दखल देगी और मदद करेगी।
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