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00:00अथ
00:09हलाद इंसान को क्या से क्या बना देते हैं
00:14किस चीज की कमी है
00:17छोटी सी जमीन का टुकडा नहीं भूल पा रहे
00:20तुम्हारी भावी क्यों नहीं भूल गई उस जमीन के छोटे से टुकटा को
00:26क्योंकि हो जमीन का टुकडा हमेशा से हमारे घर में ही आता रहा है
00:30आज मुझे अंदाजा हो रहा है कि मुझे तुम्हारी तरफ घीचा चला आता था
00:36मुझे जानना तो रिदा के पास होता था
00:38तुम्हारे पास आ जाता था
00:41तुम पहले पागल नहीं थे, आप पागल हो गर अकर मलकों तुष्मनी निभाने होती तो वो आद को ठाके ले जा सकते थे फाद को ठाके ले जाते शेर को असाइलम से क्यों उठा के ले गए?
00:59सब चाहरे है कि मेरा ध्यान डॉक्टर फजर पे जाए जाए
01:01सबी सिल्य उसके पीचे पढ़ गए
01:06मेरा फोना बंद होगा, कुछ सिन के ले नहीं पूरूनी ठीक है
01:09जब मझे तुम्हारी याद आए तो क्या करो
01:11मेरी याद क्यों आएगी?
01:13तुम्हें मेरी याद नहीं आएगी क्या?
01:15आएगी
01:16तुम्हास बंद करो
01:22तो आप मौका कम दिया कीजिये ना ताज बीबी
01:25अब बहुत वप गुजर चुका है
01:28एक मिनिट
01:30देख रही हूं मैं
01:33गोली लगने के बाद
01:35तुम्हारी जबान बड़ी देश चला शरू हो कही है
01:38पहली बार भी पुलिस हमारे घर ताब आई थी
01:41जब तुम घर से भागी थी
01:42और आज भी
01:44बस
01:46मैं बदर जमान को ये बताना चाहता हूं
01:48कि उसे जमीन चटाने के लिए
01:50मेरी बेटी काफी है
01:51तबश
01:52शेर को कौन उठा के लेगा है?
01:54जब तक मुझे मेरे बेटा वापस ने मिल जाता मैं हर इंसान पे शक्र हूं
01:59मैं तो कहता हूं तुम मेरे हवाले कर दो से खुद साहिप पे हो जाओ
02:03फजर बगए गहर वालों की मदद के
02:07शेर को खाइब थोड़ी कर सकती
02:09ना उसे खाइब कर सकती है ना उसे टीक कर सकती है
02:12एक आमसी लर्की है वस
02:13एक आमसी डॉक्टर
02:15शेर मर जाए या ठीक हो के वापस आ जाए
02:19दोनों सुरतों में हम ही थड़क पे आएंगे
02:22थूरी तो हमारे गले पी चलनी
02:24काश बाबा
02:34जो मैं कर आई हूँ आपको बता सकती
02:38कभी कभी होन के रिष्टों से बढ़कर इनसान का रिष्टा होता है
02:43एसान का रिष्टा होता है
02:46किसी बेबस का होता है बस्वाले के साथ
02:52सबसे अजीम रिष्टा
02:55और चितना अजीम रिष्टा
02:57अतनी अजीम पुर्बानी
03:04बार बार तुम्हें देखने को
03:33तुमसे मिलने को करता है
03:35ये बेचैनी बेता भी मेरी समझ से बाहर है
03:38अब तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तुम दिल की दड़का नित्यस हो जाती है
03:43मुझे साफ साफ सुना ही देती है
03:45तुम्हें तु इस बात की भी खबर नहीं कि मैं
03:50तुम्हारे लिए कितना बेकरार
03:53मैं सब तो दिल की यही असरत है दूआ
04:10कि तुम से मिलके तुम्हे अपना बनाना है
04:17तुम्हें तुम्हें यही फीलिंग्स कभी पता नहीं हुग
04:19कि अगर वो कहते हैं ना
04:24अगर नियत अच्छी हो तो मकसद हासिल हो जाता है
04:28अगर तुम्हारा इंतसार करूंगा
04:34कि अगर नहीं है तुम्हें तुम्हें तुम्हें पता नहीं होते हैं
04:41तुम्हें अगर जादा देज हो तो ठंडे पानी की पटिया करें आप शेर को
04:45जी जी वो ही कर रहा है चोटे रजस को किसी भी पल सुकून नहीं आ रहा है
04:53बिमारी अगर पुरानी हो तो ठीक हो अन्य में वक्त तो लगता है ना
04:56लेकिन अगर शेर अग्रेसिव हो या उसका ब्लड पैशे हाई हो या फिर उसको सांसरे मुश्किल हो
05:03तो आपने फॉर्नल्स को वो ट्रिप देनी जो मैं आपको दे कर आई थी
05:06हलो वीवर्ज एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली
05:11नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की
05:15जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी
05:18वो खिताबों खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाली लड़की थी
05:22जिसे अपने जाद पर वखर तो था मगर दिकाने के शवक नहीं
05:27वो रोज यूनिवस्टी आती अपना काम करती और तरहा वापस लोड़ जाती
05:31जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई जो एक शौख मगर समझतार ललका था
05:38अमीर गराने से तालुक रखने वाला मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं
05:43अप्तिदा में इनके दर्मन सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ
05:47पिर लाइबरिरी में सलाम पिर चोटे चोटे जूमले जो हैस्ता दिल के बातों में बदलने लगे
05:53अजलान को एमन की साथगी शरम और आँखों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला कि वो दिल दे बेटा
06:00एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया
06:06मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था गुर्बत मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था
06:13अजलान ने जब मौबत के जार किया तो एमन ने हसते हुए कहा
06:16मेरे जिसे लोग से दुआओं में याद रखे जाते हैं
06:20खौबों में नहीं बसाये जाते
06:22मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया
06:26लेकिन जाव में सिरफ तन्स तजलील और साप इंकार मिला
06:30अजलान की वालदीने का अगर तुम ने उससे शादी की
06:34तो हमारे ले तुम मर गए
06:35अजलान जो मा का लाड़ा और बाब का पखर था
06:39अंदर से तूट गया
06:41मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा
06:44एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी
06:46तो खुद पीचे हड़ की
06:48उसने यूनिवरस्टी चोल दी
06:49पून बंड कर दिया
06:51और वापस सरगोदा चली की
06:52दो साल गुजर गए
06:54अजलान ने बहुत तलाश किया
06:56मगर उसका पता ना मिला
06:58पिर एक दिन एक खेराती हस्पिताल में
07:00जब एक अपनी कंपनी की तरफ
07:03उसे इमदाद देने गया
07:04उसने एमन को देगा
07:05सुपीध कोड में मरीजों का
07:08इलाज करती हुई
07:09दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी
07:12अपने मा का इलाज करवा चुकी थी
07:14और अब दुस्तों की खिदमत कर रहे थी
07:16अजलान ने सब के सामने कहा
07:19मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है
07:22इस पर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा
07:26और यह एक साधी सी लड़की जो खाबों से डिरती थी
07:28एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलंती
07:34ड्रामसीरल के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें
07:37साथ में हमारा येटिव का चीनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
07:41तेंक्स पर वाचिंग, लाहाफिज
07:43हलो वीवर्ज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली
07:48नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की
07:52जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी
07:55वो खिताबों, खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाली लड़की थी
08:00जिसे अपने जाद पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं
08:04वो रोज यूनिवस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोड़ जाती
08:09जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई जो एक शौख मगर समझतार ललका था
08:15अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं
08:21अप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरिरी में सलाम, पिर चोटे चोटे जूटे जूमले, जो हैस्ता यस्ता दिल के बातों में बदलने लगे
08:31अजलान को एमन की साथगी, शर्म और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा
08:37एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था
08:50अजलान ने जब महबत के जार किया तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग से दौब में याद रखे जाते हैं, खौबों में नहीं बसाये जाते
08:59मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जाव में सिर्फ, तंस, तजलील और साप इंकार मिला
09:07अजलान की वालदीने का अगर तुम ने उसे शादी की तो हमारे ले तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाप का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़ की, उस
09:37साल में, जब अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देखा, सुपीध कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपनी मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूस्तों के खित्मत कर रहे थी, अजलान ने सब के साम
10:07महबत पागी, जो वक्त, जात और हैसियत से बुलंती, ड्राम वसील के हुआले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे हैटूफ का चीनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए, तैंक्स पर वाचिंग, अल्हाफ़ आफिस, एमन सरगोदा के एक चोटे से श
10:37ती, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार ललका था, अमीर गराने से तालुक रखने �
11:07में बदलने लगें, अजलान को एमन की साथगी, शर्म और आँकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौप चुपा था, गुर्बत, मा की बिम
11:37मगर अजलान ने हार नामा नी अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवब में सिर्फ, तंस, तजलील और साथ इंकार मिला, अजलान की वालदेने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था, अं
12:07चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता ना मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में, जब अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीद कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में ड
12:37होती है, इस पर असलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यो एक साधी सी लड़की जो खौब उसे डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलंती, ड्राम वसील के हवाले से अपने राए के जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारा �
13:07जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाले लड़की थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोड़ ज
13:37एमन सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरिरी में सलाम, पिर चोटे चोटे जूटे जूमले, जो हैस्ता हैस्ता दिल के बादों में बदलने लिए, अजलान को एमन की इस्थादगी, शरम और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला कि वो द
14:07जार किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खुआबों में नहीं बसाय जाते, मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जाव में सिर्फ तंस, तजलील और साप इंकार मिला, �
14:37जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़ की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया और वापस सिर्गोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता न मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में, �
15:07दुस्तों की खिद्मत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं किरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक सादी सी लड़की जो खाबों से डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी
15:37एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खाबों की दुने में रहने वाली लड़की थी, जिसे अपने जाद पर वखर त
16:07मचतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, इब्तिदा में के दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोटे जूमले, जो हैस्त हैस्ता �
16:37एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोड़कर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खौबों में नहीं बसा
17:07मा का लाड़ा और बाब का पखरता, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बन कर दिया, और वापस सर्गोदा चली की, दो साल गु�
17:37मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, और अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन �
18:07किमेंट करें, साथ में हमारा येट्व का चीनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए, थैंक्स पर वाचिंग, अलाहाफिस, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेहर से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार, तालीम यपता और हसास लड़की, जो लाहूर में मास्टर की तालीम हा
18:37और तरहा वापस लोड़ जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार ललका था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, इबतिदा में के दर्मान सिर्प एक नोट बुक का
19:07एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो एमन ने हसते हुए
19:37अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़की,
20:07इस्पसाल में, जब अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीध कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब
20:37अपने से महबत पागी, जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्राम वसील के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारा येटिव का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, अल्हाफ़ाद, एमन सरगोदा के एक चोट
21:07लिकी थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार ललका था, अमीर गराने से तालुक र
21:37वादों में बदलने लगे, अजलान को एमन की साथगी, शर्म और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौप चुपा था, गुर्बत, मा क
22:07मगर अजलान ने हर नामा नी अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवब में सिर्फ, तंस, तजलील और साथ इंकार मिला, अजलान की वालदे ने का, अगर तुम ने उससे शादी की, तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाव का पखर था, �
22:37चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता ना मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में, जब अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीद कोड में मरीजों का इलाज करती हुई, दो सालों में �
23:07होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यो एक साधी सी लड़की जो खौब उसे डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्राम वसील के हवाले से अपने राए के जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमार
23:37इस लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खौबों के दुन्हें में रहने वाले लड़की थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तर तन
24:07के दर में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे जूटे जूमले, जो हैस्ते हैस्ता दिल के बादों में बदलने लगें, अजलान को एमन की साहथगी, शर्म और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला कि वो
24:37कि जार किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खुआबों में नहीं बसाये जाते, मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवाब में सिर्फ तंस, तजलील और साप इंकार म
25:07एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़ की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया और वापस सरगोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता न मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल म
25:37और अब दूसरों के खिद्मत कर रहे थी, अजलान ने सब के साम ने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक सादी सी लड़की जो खाबों से डिरती थी, एक ऐसी महब
26:07लिवर्ज एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों, खामोशी और खौबों के दुने में रहने वाली लड़की थी, जिसे अपने ज�
26:37अगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, इप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोटे जूमले, जो हर
27:07इसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोड़कर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो अमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खौआबो
27:37जो मा का लाड़ा और बाव का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया और वापस सरगोदा चली की, दो साल ग
28:07जिट कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए के इज़त नामे नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के
28:37आज मी कमेंट करें, साथ में हमारा एटूफ का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स फर वाचिंग, अलाह आफ़ेज, अलाह आफ़ेज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार, तालीम यपता और हसास लड़की, जो लाह
29:07परती और तरहा वापस लोड़ जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, अब्तिदा में के दर्में सिर्प एक नो
29:37अमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोड़कर महनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो अमन ने हसते हु
30:07अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाड़ा और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड�
30:37थी हस्पिताल में, जब अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीध कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने
31:07एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलंती, ड्राम वसील के हवाले से अपने राए के जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे यट्यूब का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, अल्हाफ़ आफ़िस, एमन सरगोदा के एक �
31:37वाले ललकी थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिवस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार ललका था, अमीर गराने से त
32:07के बातों में बदलने लगे, अजलान को एमन की साथगी, शरम और आँकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा
32:37मगर अजलान ने हार नामा नी अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवब में सिरफ तंस, तजलील और साप इंकार मिला, अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था, अं�
33:07गोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता ना मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पिताल में, जब अपनी कमपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीद कोड में मरीजों का इलाज किरती हुई, दो स
33:37अज़दार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यो एक साधी सी लड़की जो फ़ाबों से डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्राम वसील के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट कर
34:07असास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खौबों की दुन्या में रहने वाले लड़की थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा
34:37पिदाम इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, फिर लाइबरीरी में सलाम, फिर चोटे चोटे जूटे जूमले, जो हरस्त हरस्ता दिल के बादों में बदलने लगे, अजलान को एमन की साहथगी, शर्म और आँखों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा �
35:07मौबत के जाहर किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खुआबों में नहीं बसाये जाते, मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवा में सिर्फ तंस, तजलील और साप इ
35:37एमन ने जब अजलान के परेशानी देगी, तो खुद पीचे हडगी, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया और वापस सर्गोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता न मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल
36:07और अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के साम ने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक सादी सी लड़की जो खौबों से डिरती थी, एक ऐसी महब
36:37लिवी वर्ज, एमन, सरगोदा के एक चोटे से शेहर से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों, खामोशी और खौबों के दुने में रहने वाली लड़की थी, जिसे अ�
37:07मगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं, इप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरिरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोटे जूमले, जो हैस्
37:37तो उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोटकर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो अमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग से दौाओं में याद रखे जाते हैं, खौबों में �
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