00:00सपने देखने और उसे पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती आज जो करना चाहते हैं उसे कभी भी किसी भी उम्र में शुरू कर सकते हैं
00:10भारत के बिटिश मैराथॉन एथलीट फॉजा सिंग की कहानी हमें यही सिखाती है
00:14114 साल के मैराथॉन रनर फॉजा सिंग नहीं रहें
00:18सुमबार की शाम पंजाब के बियास पिंड गाउं के पास जलंदर पठान कोट एनेच के किनारे सड़क पार करने के दौरान तेज रफ्तार कार ने उन्हें टकर मार दी
00:27इस सड़क हाथसे में घायल होने के बाद अस्पताल में इलाश के दौरान उनका निधन हो गया
00:31तोबन टोनार्डो के नाम से मशूर फॉजा सिंग ने 100 मीटर से लेकर 5000 मीटर तक की दौर में कई वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़े हैं
00:39जब कि लंडन, ग्लाजगो, टौरेंटो, हॉंग कॉंग में कई मैराथॉन दौर में बड़ी कामियाबी भी अपने नाम की है
00:46जिंदेगी के एक दुखत मोड ने उन्हें दौरने की इंस्पिरेशन दी और फिर 89 साल की उमर में उन्होंने मैराथॉन की दुनिया में कदम रखा
00:54इस सिख रनर की यात्रा काफी अविश्वसनी रही है और दुनिया के लोगों के लिए एक इंस्पिरेशन है
01:01उनके जाने की खबर से लोगों का दिल भी तूटा है
01:03सोशल मीडिया पर उनको लेकर अलग अलग तरा के रियाक्शन सामने आए
01:06एक यूजर ने लिखा 114 साल की उमर में सड़क पार कर रहे थे
01:09यहां लोग 70-80 की एज में बिस्तर पकड़ लेते हैं
01:12अमेजिंग फिटनेस लेवल सल्यूट टू ग्रीट मेराथान रॉनर
01:15में कॉर यूजर ने लिखा 114 साल रुगटना नहीं हुई तो 140 साल जीते सरदार जी
01:20ओम शांती
01:21में कॉर यूजर लिखते हैं दादा जी टाइटैनिक से ज्यादा उमर के थे
01:24में कॉर यूजर ने लिखा ये अंकल इतने ज्यादा एज में भी जवान लोगों से ज्यादा इस्टैमिना था इन में
01:29में कॉर यूजर लिखते हैं घजब अंकल इतने फिट इस एज में
01:32हम लोग तो अभी आधे मर गए
01:34कमर दर्द पीट डर्द बस रोगी रोग हैं
01:36आपको बता दें 2011 में टोरबन टोनार्डो के नाम से मशूर फौजा सिंग की बायोग्राफी में
01:42इस्तमवकार खुशवन्त सिंग ने किसान परिवार में जन्में फौजा सिंग के जीवन उनके संगर्शों के बारे में बताया है
01:48एक अप्रेल 1911 को जलंदर पंजाब जो उस वक्त ब्रिटिज भारत का हिस्सा था
01:53के बियास पिंड में जन्में फौजा सिंग एक किसान परिवार के चार बच्चों में सबसी छोटे थे
01:58उनका बजपन आसान नहीं था पतले और कमजोर पैरो की वज़ा से वो पांच साल की उम्र तक चल भी नहीं पाते थे
02:04जिससे लंबे दूरी चलना उनके लिए मुश्किल था बड़े होकर उन्होंने अपने परिवार का भरन पोशन करने के लिए खेती करना शुरू की
02:111992 में अपनी पतनी जियान कौर के निधन के बाद वो अपने बेटे के साथ इंगलेंड चले गए और पूर भी लंडन में बस गए
02:18अगस्त 1994 में अपने पांच में बेटे कुलदीप को खोने के गहरे दुख से उबरने के लिए फॉजा सिंग ने जॉगिंग शुरू की लेकिन वो साल 2000 तक बहुत सीरियस नहीं थे
02:2789 की एज में उन्होंने दौडने को सीरियसली लिया उसी साल उन्होंने अपनी पहली पूर्ण मैरोथान लंडन मैरोथान 6 घंटे 54 मिनिट में पूरी की और सुर्खियां बटोरी इस वक्त उनकी उमर 90 साल से ज्यादा थी
02:402011 में 100 साल की उमर में फौजा सिंग ने कनाड़ा के टॉरांटो में बर्च माउंट स्टेडियम में खास अंटोरिया मास्टर्स असोसियेशन फौजा सिंग इंटरनेशनल मीट में एक ही दिन में आठ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए इसके लावा उनके कई और रिकॉर्ड भी
03:10झाब बुल्य को झाले के लिकॉर्ड भी उनके काई बुल्या उनके कर दो टूजार।
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