00:00महर्रम इसलामिक साल का पहला महीना है लेकिन इस महीने में कई ऐसे अमल किये जाते हैं जिन पर मुसल्मानों का कहना है कि वो हराम है
00:10इस कड़ी में सवाल उठाए जाते हैं कि क्या ताजिय निकालना जाएज है, क्या मातम शरीयत में सही है, क्या धूल नगाडा बजाना अबादत या गुना है
00:19आज हम इन सवालों के जवाब जानेंगे इस्लामिक स्कॉलर की बातों कुरान और हदीस की रोशनी में
00:23शिया और सुनी दोनों नजरीयों को देखते हुए, महरम चार पाक महीनों में से एक है, जिसे कुरान में अशुरूल हुरूम कहा गया है
00:31इस महीने की सबसे एहम तारीख है दस महरम जिसे यौम आशूरा कहते हैं
00:35सुनी स्कॉलर के मताबिक इस दिन हजरत मुसा लेपसलाम को फिरौन से निजात मिली थी और नबी पाक सलएल्लाओ उलहिएब सलमने रोजा रखा थ đến निया रोजा रखना सुनना थे
00:44शिया स्कॉलर्स के मताबिक इस दिन हजरत इमाम हुसेन और उनके 72 साथियों ने कर्बला में शहादत दी थी
00:50उनकी याद में गम, सब्र और अज़ादारी की जाती है
00:53महरब में कौन-कौन सी चीजें हराम हैं यानि की नाजाइज मने जाती है
00:57सबसे पहले बात करते हैं डोल लगाडा बचाना यानि डीजे लगाना
01:01इसलाम में गम के मौके पर शोर, शराबा, म्यूजिक और मन्दुरंजन की मना ही है
01:06सुनी और शिया में ज्यादतर स्कॉलर्स इस पर एक मत हैं की ढोल बजाना, डीजे लगाना या नाजगाना गलत है
01:12शिया स्कॉलर्स का मानना है गम मनाना है ना की मजाग बनाना
01:15वहीं सुनी स्कॉलर्स का मानना है मातमी जलूस अबादत नहीं बन सकती जब उसमें शोर और दिखावा हो
01:22दूसरा है खुद को चाकू या जन्जीर से मारना
01:24कुछ शिया समुदाय में इसे वफा की निशानी समझा जाता है
01:27लेकिन अब कई आधुनिक शिया स्कॉलर्स भी इसके खिलाफ है
01:31हदीस क्या कहती है
01:32तुम अपने जिस्म को नुकसान ना पहुंचाओ
01:34ये अल्ला की अमानत है
01:36आजकल कई शिया मरकज इसमें बलड डोनेशन कैम्स चलवाते हैं
01:39ताकि खून बहे भी और किसी की जान भी बचे
01:41अब दूसरा आता है ताजिया सजाना और मूर्ती जैसी चीजे बनाना
01:45शिया मुसल्मान ताजिया को एक प्रतीक मानते हैं
01:48इमाम हुसेन की याद और उनका मकाम
01:50वही सुन्नी स्कॉलर्स खास कर सलफी और देवबंदी विचारधारा इसे
01:53बिद्धत यानी नई चीज और शरियत से बाहर बताते हैं
01:56अगला आता है मुहर्रम को तेवहार की तरह मनाना
02:10कुछ जगहों पर आतिजबादी मिठाईया सजावट या जलूस को इतना ज्यादा सजाय जाता है
02:15कि वो इбादत से ज्यादा प्रधरशन लगता है
02:17कुल नतीजा ये होता है कि मौर्रम कम और सबर लेने का महीना है ते वहार नहीं अबादत है
02:22अब जानते हैं वो काम जो इसलाम में हर मुसल्मान के लिए फायदे मन है
02:26नौ और दस मौर्रम का रोजा रखना हादी से थाबित है
02:29इसलिए कहा जाता है हुसैन सिर्फ एक फिर्के के नहीं पूरी इनसानियत के है
02:45तो आपने जान लिया कि मौर्रम में क्या हराम है क्या नाजाइज है और क्या करना सही है
02:49हर मुसल्मान को चाहिए कि वो दूसरे के अमल को समझने की कोशिश करें ना कि उसे घलट ठहराने की
02:54और अगर किसी बात को सही धंग से पहुचाया जाए तो उसे फिर समझा भी जाता है
03:00फिलाल इस वीडियो में इतना है अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें शेयर करें और चानल को सब्स्राइब करना बिल्कुल न भूलें
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