00:00गुलामी की मानसिक्ता से मुक्ति ये बहुत महत्वपून प्रण है कोई भी भासा का विरोध नहीं है किसी भी विदेशी भासा का विरोध नहीं करना चाहिए भासा सिर्फ समवात का माध्यम नहीं होती एक राष्ट की आत्मा होती है
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02:47आत्म सन्मान के साथ बढ़ना है तो वो देश का प्रसासन अपनी भासाओं में हो वो बहुत जरूरी है इस महान उद्देश के साथ राजभासा की सुरुवात हुई और पचास वर्स की यात्रा आज ऐसे मकाम पर आकर खड़ी है कि यहां हमने इसको आगे ले जाने का हमारा �
03:17प्रदान मंत्री जी ने जब आजादी के 75 साल हुए तब कई उसमें घुलामी की मानसिक्ता से
03:44मुक्ति यह बहुत महत्वपूर्ण है और जब तक व्यक्ति अपनी भासा का गवराव नहीं करता अपनी अभिव्यक्ति अपनी भासा में नहीं करता अपनी सोच विशलेशन और नीनाय करने की क्षमता को अपनी भासा में नहीं गड़ता हम गुलामी की भासा से गुलामी क
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04:40करने का भासा एक मात्र माध्यम है इसका महिमा मंदन हो जहां तक
04:51कि देश का सवाल है भासा सिर्फ समवात का माध्यम नहीं होती एक राष्ट की आत्मा होती है हमारी जड़ें हमारी
05:02प्राय हमारा इतियास हमारी पहचान और हमारी जिवन संस्कूती यह सभी भासा से कटकर
05:11कि आगे नहीं बढ़ा सकते और भासाओं को जीवन रखना भी इतना जरूरी है और भासाओं को समरुद करना भी इतना जरूरी
05:22इस सभी प्रयास हमने आने वाले दिनों में सभी भारतिय बासाओं के लिए और विशेश कर राज बासा के लिए करने चाहिए
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