00:00नीरू का बेटा फॉज में बड़ी पोस्ट पर था, वो हमेशा तैनाती में बाहर रहता, घर में अकेली नीरू बोर्यत मैसुस करती थी, नीरू की सहिल्यों ने उसे सला दी कि वो अपने बेटे की शादी करवा दे, बहुक के आजाने से सब ठीक हो जाएगा,
00:21बेटा अपार, तू तो फॉज में रहता है, मुझे घर में अकेला अपन काटनी को दौड़ता है, तू एक काम कर बेटा, शादी कर ले, फिर बहुक के साथ मैं घर में आराम से रहूंगी,
00:34क्या मा, मैं जब तक मेजर नहीं बन जाता, शादी नहीं करूँगा, तुम कहीं गुमने उमने जाया करो, लेकिन शादी की बात मत करो,
00:43इतना कहकर अपार वहां से चला जाता है
00:47लेकिन जाते वक्त उसे मा की भी चिंता रहती है
00:50एक दिन दर्वाजी की घंटी बचती है, नीरोध दर्वाजा खोलती है
00:55तो सामने एक सुन्दर सी लड़की साड़ी पहन कर सर पर पल्लू रखकर खड़ी होती है
01:02कान हो तुम बेटा और तुम्हें किसने बेजा है
01:06मेरा नाम कंचन है और मैं आपके बेटे अपार की बीवी और आपकी बहू हूं
01:13तभी घर का फोन बचता है, नीरोध फोन उठाती है तो अपार का फोन होता है
01:18मा, कंचन आ गई? वो आपकी बहू है मा और मैंने उससे शादी कर ली है
01:25आप अकेली रहती है तो मैंने आपके लिए शादी कर ली मा
01:29अच्छा बेटा, बहू तो आ गई, बहुत सुन्दर है, अबना मैं आराम से घर में खुश रहूंगी
01:38इतना कहकर नीरू जैसे ही कंचन के तरफ देखती है, वो उसके पैर चुती है
01:43नीरू कंचन को आशिरवाद देकर गले लगा लेती है
01:47अगले सुबह नीरू सोकर उड़ती है तो
01:51अरे, सारा घर कितना चमक रहा है, इतनी सुबह घर का सारा काम किस ने किया?
01:59तभी कंचन हाथ में स्वादिष्ट नाश्ता और चाई लेकर आती है
02:03और टिपॉय पर रखकर कंचन के पैर चुती है
02:07बहु को देखकर नीरू काफी खुश हो जाती है
02:10वो कंचन से कहती है
02:12कंचन बेटा, आज मेरे घर में किटी पाटी है
02:17तुम मेरी सहलियों के लिए कुछ अच्छा बना लेना
02:21मा, मुझे अच्छा बनाना नहीं आता
02:25आप बता दीजिए मैं बना दूँगी
02:28अरे मैं भी तो नहीं जानती
02:31ऐसा कर, शाम को इटालियन खाना, सीफूड और चाईनिस खाना बना लेना
02:39ठीक है?
02:41कंचन नीरू की बात सुनकर खुश हो जाती है
02:43हाँ मा, मैं तो ये सब बना सकती हूँ, आप चिंता ना करे
02:49शाम को नीरू की सहलिया आती है, जहां कंचन अकेले बनाए स्वादिष्ट खाना बना कर खिलाती है
02:56वो सारी सफाई कर सबको खुश कर देती है
03:00कंचन अंदर कीचन में जाती है, कि तभी नीरू की सहली बोल पड़ती है
03:05अरे नीरू, तेरी बहु तो बड़ी परफेक्ट है
03:08तेरी हर बात मानती है, और सारा काम भी अकेले करती है
03:12तो जी शिकायत का मा का भी नहीं देती
03:15लेकिन क्या फाइदा, बेचारी नीरू का जीवन तो बहु के आने के बाद भी बोरिंग का बोरिंग ही रहा
03:22क्यों, ऐसा क्यों बोल रही है, अब तो मेरे साथ मेरी बहु भी रहती है
03:28Yes, yes, but I know a lot of people who are very good at it.
03:33This is all the work that you can do to fight against the fight, and you will be frustrated.
03:40You understand?
03:41He says, no, I don't understand.
03:47If you have a house with a house, then you have a house with a house.
03:53My house with a house with a house.
03:56शुबह सिबह के साथ लडाई में इतनी चहल पहल रहती है कि मन हमारा भी लगा रहता है और पडोसियों का भी
04:03नीरू मन में सूचती है बात तो सही है अगर ये मेरी शिकायत के बिना ही हर काम कर देगी तो मैं क्या करूँगी
04:15रात को नीरू सोने के लिए कमरे में जाती है जहां कंचन उसके पैर दबाने लगती है नीरू को अच्छा तो लगता है लिकिन वो किसी भी तरह से उससे लड़ाई करना चाती है
04:27बहू दर्द पैर में नहीं सर पर है और तू मेरे पैर दबा रही है
04:33मैं सरदबा देती हूँ माजी
04:37ये कहकर वो उसका सरदबाने लगती है
04:40तू एक काम कर, मेरे लिए बादाम वाला दूद ले आ, जा
04:45कंचन जाकर सास के लिए दूद ले आती है
04:48अब नीरो उसे जो कहती कंचन जट से कर देती
04:52बहु, जरा जट से जाले निकाल दे
04:56जी माजी, कंचन पांच मिनिट में ही पूरे घर के जाले साफ कर देती है
05:03नीरो तो देखती की देखती ही रह जाती है
05:06कमाल है, ये तो हर काम कर रही है
05:10तरस गई मैं तो इससे लड़ाई करने को
05:13इतना कहके नीरो चली जाती है
05:16नीरु को एक दिन कंचन पर इतना गुस्सा आता है कि वो सोच लेती है
05:22आज तो उससे लड़ कर ही रहेगी
05:24मौका देखकर नीरु कंचन को पैर से लंगडी देकर गिरा देती है
05:29जिसके बाद जो होता है नीरु को विश्वास ही नहीं होता
05:35जमीन में दो भागों पर गिरी कंचन की सारे पुर्जे बिखर जाते हैं
05:42स्प्रिंग और उसके अंदर से रंग बिरंगी लाइट जलने लगती है
05:45तभी घर की घंटी बचती है
05:47नीरु डर कर दर्वाजा खुलती है तो सामने अपार खड़ा होता है
05:52क्या हुआ मा तुम इतना डर क्यों गई
05:55कंचन ने कुछ किया क्या कुछ कहा क्या उसने मैं अभी बताता हूँ
06:00तभी अपार की नजर कंचन पर पड़ती है
06:03अरे मा तुने ये क्या किया कंचन को तोड़ दिया
06:08तुम्हारी खुशी के लिए मैंने रॉबोट को तुम्हारी बहु बना कर भेजा था
06:12जिससे तुम्हारी हर इच्छा पूरी हो और तुम खुश रहो
06:16मा, ये तो इंसान थी भी नहीं, इससे तो गलती हो ही नहीं सकती थी
06:21फिर आपने इसे क्यों तोड़ा, क्या गलती थी इसकी मा
06:25बेटा, इसकी सबसे बड़ी गलती ये थी, कि ये इंसानों की तरह सास से लडाई नहीं करती थी
06:33अपार मा की बात सुनकर हैरान रह जाता है
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