00:00सिद्धी की शादी के बाद वो सिसुराल चली जाती है, पीशे रह जाती है भावी रानी, सिद्धी के सिसुराल जाते ही भावी कहती है,
00:16अरे वाजी वा, सारे कपड़े मेरे, हाई रे तैंट, अरे वावा, मजा आ जाएगा, अरे ये सिद्धी की अलमारी के साबने खड़े होकर क्या बड़ बड़ा रही है, जा जा कर देख मेमानों को विदाई की मिठाए मिली की नहीं,
00:34अब हाँ हाँ माजी क्यों नहीं, लेकिन पहले कपड़े तो बड़ लूँ, अब रानी आ जाती है सिद्धी के उन कपड़ों में, जो वो सिसुराल जाने से पहले घर छोड़ जाती है, अरे रानी कुछ दिन रुक जाती, अरे ये तो सिद्धी बिट्या को मैंने ही दिया �
01:04वैसे भी सिद्धी को कौनसा बिन पुराने आउट्डेटेड कपड़ों को पहनना है, वैसे भी ये सूट तो मैंने तभी पहना था, वैसे खास है भी नहीं ये, हाँ हाँ ठीक है ठीक है, लेकिन ना मेरे सिद्धी पर तो जमता था, सारे मैमान चले जाते हैं, और सिद्ध
01:34ये बुलकर जैसे ही सिद्धी अलमारी खुलती है, तो सामने उसके कपड़ों के जगे कुछ और ही रखा होता है, मा, ओ मा, सरक कमरे में तो आना, सास और रानी वहाँ पहुँच जाते हैं, रानी ने पहनी होती है सिद्धी की जिन्स और टी-शिट,
01:53अरे भाबी ये क्या, ये तो मेरे बड़ी ही महंगे टी-शिट है, इसे आपने घर में क्यों पहनी है, अरे बहुत मिलती है दीदी ये चौक की मार्केट में, देरसो देरसो में, ओ भाबी प्लीज, ये एरोफोस्टल है, दो हजार की एक टी-शिट, ओ, दो हजार में तो द
02:23मेरी अलमारी में, अब दीदी आपको कौन से पुराने कपड़े पहनने थे, माना भाबी, लेकिन मैं जब घर आती, तो ये ही सब पहन दी ना, अरे तुम तो बड़ी कंजूस हो दीदी, खेर बगत आता है जब सिद्धी ससुराल के लिए रवाना हो रही होती है, अरे रान
02:53अंदर जाती है और एक सिंपर सिसाडी लेकर बहार आ जाती है, ये लिजए माजी, सांस बेटी को गिफ दे कर ससुराल भीशती है, अगले दिन रानी एक संदर सिसाडी पहन कर सामने आती है, अरे रानी, ये तो वो साडी है जो मैंने सिद्धी को देने के लिए दी थी, ज�
03:23जिन्दा ना करिये, मैंने सिद्ध के लिए भी अच्छी सिसाड़ी भी है, हाँ
03:27तबी सिद्ध का फोन आता है
03:30क्या मा, कुछ अच्छा तो दिया होता ससुरा ले जाने के लिए
03:34अरे पहले दिखा दिया होता, यू चमकते हुए पैकेट में नौकरानी वाली साड़ी मात दिया करू मा
03:41अरे बेटे, वो तेरी भाबी ने ना, गलती से उससे पैकेट बदल गया, हाँ
03:48मैं कली तेरे भाई के हाँ से तेरा वाला पैकेट भेज दूँगी
03:52हरे रहने दो मा, I'm sure, भाबी ने अभी वही साड़ी पैनी होगी, जो तुमने मेरे लिए रखी थी, तुम तो समझ नहीं पाई उनको
04:01खैस छोड़ो, मैं ज्यादा बोलती अच्छी नहीं लगती, रहने दो, आपको उनी के साथ रहना है, फिर बात करेंगे
04:07सास को रानी पर गुस्सा आजाता है, वो उसके कमरे में जाती है, जहां वो शादी का अल्बम देख रही होती है
04:14रानी, मारकेट जाकर एक ऐसी ही साड़ी लेकर आ, कल प्रतिक जाकर सिद्धी के घर दे आएगा
04:22अरे क्यों माजी, किती ही साड़ी देनी है दीदी को, यहां कोई सेल लगी है क्या
04:27अरे चुप कर, मेरे बेटी के हिस्से की साड़ी खुद पहन ली, अब ज्यादा ग्यान बाट रही है
04:34एक दिन सिद्धी का फोन आता है, मा मेरी साड़ी आप सबको खाने पर बुलाया है
04:41सारे लोग सिद्धी के ससराल पहुँचते हैं, खाना खाकर वो लोग निकल रहे होते हैं कि सिद्धी की साड़ी को गिफ्ट देती है
04:49अरे बहन जी बेटी के घर का खाना खालिया यही बहुत है जो आप उपर से गिफ्ट भी दे रही है
04:57अरे बहन जी आप भी कहां इन बातों पर विश्वास कर रही है
05:02सास सभी को गिफ देती है लेकिन रानी को जो साडी देती है वो अजीट सिहरे रंग की लाल रंग के बड़ी छाप वाली होती है
05:11अरे चीची ये कौन पैनेगा? सास उमा को तो जरी वाली इतनी सुंदर और मेरे लिए ये नौकरानी वाली
05:18अरे भाबी, दरसल में जब भी घर आती थी, आप वापसी में ऐसी हिसाड़ी देती थी न, तो माने सुचा कि आपको आपकी पसंद की हिसाड़ी किया न दी जाए
05:30बेचारी रानी, बोलती भी तो क्या
05:33सिद्धी और सास रानी का चेहरा देखकर हसने लगती है
05:37तो रानी समझ जाती है कि अपनी ही बिचाए जाल में वो फर्ष चुकी है
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