00:01भगवान परशुराम भगवान विश्नु के छटे अफतार माने जाते हैं।
00:04उनका जन्म महर्शी, जमदगनी और माता रेणुका के पुत्र के रूप में हुआ था।
00:09परशुराम का अर्थ है कुलहाडी धारन करने वाला राम।
00:13उन्होंने अधर्म का नाश करने के लिए 20 बार छट्रियों का संगहार किया।
00:16परशुराम को अमर माना जाता है।
00:19और ये विश्वास है कि वो कल्युक क्यांत में भगवान कलकी को युद्ध की शिक्षा देंगे।
00:23भगवान परशुराम को शक्ती नियाय और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
00:27उन्हें भगवान शिव से खास अस्त्र फरसा प्राप्त हुआ था जिसकी वज़ा से उनका नाम परशुराम पढ़ा।
00:33परशुराम जयनती के दिन भगवान उपवास रखते हैं। भगवान परशुराम की पुजार्च ना करते हैं। और उनकी कताओं का पार्ट करते हैं। कई जगाओं पर शुब यात्रा भी निकाले जाती है। ये दिन नए कामों के शुरुआत और दान पूरने के लिए बह�
01:0312 मिनट पर समाप्त होगी। चुकि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोशकाल में हुआ था इसलिए उनकी जयनती 29 अप्रेल को मनाई जाएगी। तो चली अब जान लेते हैं परशुराम जयनती की पूजा विधी क्या है।
01:33या साफ जगा पर परशुराम जी की मूरती चित्र स्थापित करें। दीप जला कर पूजन शुरू करें। भगवान विश्नु या परशुराम जी के मंतरों का जाप करें। और आचमन इसनान वस्तर गंध पुष्प धूप दीप नविद्दे आदे अरपन करें। आखि
02:03लाइक करें। शेर करें। और चानल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूलें।
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