00:02शक्ति का घमंड ग्यान का घमंड सुन्दर्ता का घमंड यहां तक की भक्ति का घमंड भी हिंदू धर्म में एक
00:10ऐसे देवता हैं जो किसी का भी अहेंकार पलभर में चूर कर सकते हैं
00:14वो है संकट मोचन पवन पुत्र रामभक्त हनुमान
00:18कहते हैं जो सव्यक्ति के भीतर घमंड प्रवेश कर जाए उसका पतन तो निश्यती है
00:23आज हम आपको ऐसे ही कुछ अद्भुत प्रसंग सुनाएंगे
00:27जो बताते हैं कि आखर क्यों हनुमान जी को घमंड तोड़ने वाला देवता बताए गया है
00:33महाभारत काल की बात है पांडवों में भीम स्वेम को संसार का सबसे शक्तिशाली योध्धा मानते थे
00:39एक दिन वो वन चले जाते हैं और रास्ते में एक वरद्ध वानर को लेटा पाते हैं
00:44वानर की पूझ रास्ते की बीच में पड़ी थी भीम ने क्रोधित होकर कहा
00:48अरे वानर अपनी पूझ हटाओ मुझे आगे जाना है
00:51वरद्ध वानर ने शांत स्वर में कहा
00:54मैं बहुत बुढ़ा हूँ पुत्र यदि जल्दी है तो तुम स्वयम मेरी पूच को हटा दो
01:08भीम मुस्कुराए उन्हें लगा ये तो मामूली काम है
01:11लेकिन जैसे ही उन्होंने पूच उठाने की कोशश की पूच हिली तक नहीं
01:16उन्होंने पूरी ताकत लगा दी धर्ती काप गई लेकिन पूच नहीं हिली भीम का चहरा बदल गया
01:23अब उन्हें समझ आया कि ये कोई साधारन वानर नहीं तब ही व्रिद्ध वानर ने अपना विराट स्वरूप दिखाया
01:30वो स्वाइम हनुमान जी थे भीम का घमंड चूर हो गया उन्होंने चरणों में गिरकर शमा मांगी
01:37वहीं एक बार अर्जुन को अपने धनोर विद्या कोशल पर बड़ा गर्व हुआ
01:42उन्होंने कहा यदी मैं रामाड काल में हुता तो समुदर पर पत्थोरों का पुल नहीं बानों का पुल बना देता
01:48ये जुनकर हनुमान जी वानर रूप में प्रकट हुए
01:50उन्होंने कहा क्या तुम्हारे पुल मेरे भार को सह पाएगे
01:57अर्जुन ने आत्म विश्वास से पुल बनाया
01:59हनुमान जी उस पर चड़े और पुल तुरंत तूड गया
02:03अर्जुन शर्मिंदा हो गया
02:05फिर भगवान कृष्ण की कृपा से दूसरा पुल बनाये गया
02:08इस बार कृष्ण स्वेम अद्रिश्य रूप में उसे सभाल रहे थे
02:11हनुमान जी समझ गये कि ये सब भगवान की लीला है
02:15अर्जुन को भी समझ आ गया कि सफलता केवल अपनी शक्ती से नहीं मिलती
02:20उस दिन उनका अहंकार भी समाप्त हुआ
02:25एक कथा के मताबिक शनिदेव को अपने प्रभाव पर बड़ा गर्व हुआ
02:29उन्होंने हनुमान जी को चुनोती दी कि वो उन पर दृष्टी डालेंगे
02:33हनुमान जी राम नाम में लीन थे
02:35शनिदेव बार-बार परिशान करने लगे
02:37तब हनुमान जी ने अपनी पूँच से शनिदेव को लपेट लिया
02:41फिर परवतों और चटानों पर उचलने लगे
02:44शनिदेव घायल हो गए उन्होंने शमा मांगी
02:47तब हनुमान जी ने उन्हें मुक्त किया
02:49इसी कारण वाननेता है कि हनुमान जी की उपासना से
02:53शनि दोश शांत होता है
02:55लंका के राजा रावण विद्वान थे
02:58महान तपस्वी थे
03:00लेकिन उसे अपने ग्यान और शक्ति का घमंड था
03:03जब हनुमान जी लंका पहुँचे
03:05तो रावण ने उन्हें साधारन वानर समझा
03:07उसने उनका अपमान किया
03:09पर ना एक अकेले हनुमान ने पूरी स्वर्ण लंका में आग लगा दी
03:14ये केवल लंका दहन नहीं था
03:16ये रावण के एहंकार का दहन था
03:19सबसे बड़ी बात यही है कि
03:21अपार शक्तियों के स्वामी होने के बावजूद हनुमान जी को
03:25कभी अहंकार नहीं हुआ
03:27समुद्र पार कर लिया लंका जलादी संजीव नी ले आए
03:30फिर भी उन्होंने हर सफलता का श्रे श्रीराम को दिया
03:34जब उनसे पूछा गया कि आप कौन है
03:37तो उन्होंने कहा मैं तो प्रभू श्रीराम का दास हूँ
03:40यही कारण है कि हनुमान जी केवल घमंड नहीं तोड़ते
03:43वो विनमरता भी सिखाते हैं
03:46वो संदेश देते हैं कि शक्ति हो तो सेवा के लिए
03:49ज्यान हो तो समाज के लिए
03:51पद हो तो विनम्रता के साथ हो
03:56शक्ति हो तो सेवा के लिए हो
03:58जान हो तो समाज के लिए हो
04:01पद हो तो विनम्रता के साथ हो
04:04क्योंकि घमंड चाहे भीम का हो अर्जुन का
04:07शनिदेव या रामण का उसका अंध निश्चत है
04:10जै श्री राम जै बजरंग बली
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