00:03इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वाइरल हो रहा है जिसमें जाने माने कथा बाचक और संध
00:09देवकी नंदन ठाकूर अपने बेटे देवांज ठाकूर के साथ मंच पर नज़र आ रहे हैं
00:13वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि देवांज भी कम उम्र में धार्मिक मंचों पर भजन और प्रवजन
00:19देना शुरू कर चुके हैं
00:20आलंगी वीडियो कप का है कहा का है और किस आयोजन का है इसकी अभी जानकारी नहीं है
00:26इसलिए वीडियो से जुड़े दावों को अंतिम सत्यमा लेना सही नहीं होगा
00:30लेकिन इस वीडियो ने एक नई बहस जरूर छेड़ दी है
00:33क्या ये परिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाना है
00:36क्या ये एक बच्चे की सौभाविक रूची है
00:38या फिर ये उस बिजनस का हिस्सा है
00:41जहां परिवार की पहचान बच्चों के लिए रास्ता आसान बना देती है
00:45सोशल मीडिया पर लोगों की राय बटी हुई है
00:47एक यूजर ले लिखा कि आज के युवाओं को सिर्फ प्रतियोगी परिक्षाओं पर निर्फर नहीं रहना चाहिए
00:51बलकि अपने लिए दूसरा विकल्ब भी तयार करना चाहिए
00:55उनका कहना था कि हमारे देश में डॉक्टर का बेटा डॉक्टर नेता का बेटा नेता और कई पर भावशाली लोगों
01:00के बच्चे उसी छेतर में आगे बढ़ जाते हैं
01:02दूसरी तरफ लाखों युवा सालों तक पढ़ाई करते हैं
01:18उनके बच्चों को शुरुवात करने में एक स्नैचरल बड़त मिल जाती है
01:22लेकिन क्या सिर्फ मंच मिल जाने से सफलता मिल जाती है शायद नहीं
01:26अगर ऐसा होता तो हर अभी नेता का बेटा सूपर स्टार होता
01:30हर नेता का बेटा बड़ा नेता होता और हर उद्योग पती का बेटा एक सक्सेस्फुल बिजनसमेन होता
01:36कथा वाजिक श्री देवकी नंदन ठाकूर जी महाराज के बेटे देवांच ठाकूर का जब ये वीडियो वारल हुआ
01:42तो लोगों की अलग-अलग राए भी देखने को मिली
01:44एक यूजर ने लिका इसे बोलते हैं शुद परिवारवाद
01:47एक यूजर ने लिका भारत में सबसे अच्छा बिजनस है
01:49पैसा, रिस्पेक्ट सब बड़े से बड़े नेता, अधिकारी, चर्णों में पड़े रहते हैं
02:07एक यूजर ने लिका बच्चों का भी जीवन सेट कर दिया
02:13हालांकि आपको बदा दें कि मंच अवसर दे सकता है, मौका दे सकता है
02:16लेकिन उसे संभालना इंसान की अपनी शमता पर निर्भार करता है
02:20इसी बीच तभी तो यूजर ने लिखा कि बच्चों को शास्त्रों, वेदों और धर्म की जानकारी जरूर होनी चाहिए
02:25ये भी एक महतपूर द्रश्टी कोन है, क्योंकि धर्म और संस्कृति का ज्यान सिर्फ प्रवचन देने के लिए नहीं, बलकि
02:30अपनी परंपराओं को समझने के लिए भी जरूरी माना जाता है
02:33अब आते हैं उस राय पर जो सोशल मीडिया पर सबसे जादा देखने को मिल रही, कुछ लोग कह रहे
02:37हैं कि भारत में कथावाचन और धार्मिक मन्ज सबसे अच्छा बिजनस बन चुका है
02:41यहां समान भी है, लोग परियता भी है और आर्थिक सफलता भी है
02:45सच कहें तो धार्मिक कथावाचन आज एक बड़ा छेतर बन चुका है
02:48लेकिन ये भी उतना ही सच है कि किसी भी छेतर में लंब बक तक समान बनाय रखना आसान नहीं
02:52होता
02:53लाकों लोग कथा सुनते हैं लेकिन हर कथा वाचक लोग पर यह नहीं बन पाता
02:57इसके लिए वक्तव्य कला ज्यान प्रस्तुती और लोगों से जुड़ने की शमता की ज़रुत होती है
03:02मेरी राय में असली सवाल ये नहीं कि देवांज ठाकुर मंच पर क्यों आए
03:06असली सवाल ये है कि क्या उन्हें अपनी पसंद से आगे बढ़ने का मौका मिलेगा
03:10अगर कोई बच्चा अपने परिवारी की परंप्रा को आगे बढ़ाना चाहता है तो इसमें कुछ गलत भी नहीं है
03:14लेकिन साथ ही उसे शिक्षा, समानने जीवन, अनुभाव और अपनी सोतंत्र पहचान बनाने का मौका भी मिलना चाहिए
03:21किसी भी बच्चे का भविश्य केवल परिवार की पहचान से तैन नहीं होना चाहिए
03:24आखिर में बात करें देव किननन ठाकुर जी के परिवार की तो उनके परिवार में उनके माता पिता, पत्नी और
03:30बच्चे शामिल है
03:30उनकी पत्नी का नाम श्रीमती अंसुया देवी और पिता का नाम श्री राजवीर शर्मा बताया जाता है
03:36उनकी पत्नी का नाम अंद माता है
03:38परिवार में एक बेटा और दो बेटियां है
03:40उनके बेटे का नाम देवाज ठापूर है
03:42जो हाल के दिनों में वारिल वीडियो की बज़ा से चर्चा में है
03:45अब फिलाल आप क्या करना चाहेंगे इस पर कॉमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर रखें
03:48वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक करें शेयर करें और चैनल को सब्स्क्राइब करना बिल्कुल नब बुले
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