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  • 2 years ago
वीडियो जानकारी:

प्रसंग:

न विक्षेपो न चैकाग्र्यं नातिबोधो न मूढता।
न सुखं न च वा दुःखं उपशान्तस्य योगिनः ॥१०॥
भावार्थ:
अपने स्वरुप में स्थित होकर शांत हुए तत्वज्ञ के लिए न विक्षेप है,
और न तो एकाग्रता। न ज्ञान है, न सुख है न दुःख।

~ ज्ञानी की क्या पहचान है?
~ अपने स्वरूप में कैसे स्थित हो सकते हैं?
~ तत्त्वज्ञ कौन है?

संगीत: मिलिंद दाते
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