00:00मुंबई से तीन सौ किलो मीटर दूर नक्षों में दर्ज पर यादों से मिटा हुआ एक छोटा सा रहस्य मईगाउं
00:09अंधेर ग्राम
00:11यहां की हवा में मिट्टी की खुश्बू नहीं बलकि एक सडांध है पुरानी मान्यताओं और अनकहे डर की
00:21जंगल के बीचों बीच खड़ा वो प्राचीन कुवा जहां का पानी काला नहीं गाड़ा खून जैसा दिखता है
00:31यहां का कुवा प्यास नहीं बुझाता बलकि यहां का कुवा रक्त मांगता है
00:38जहां कोई पक्षी नहीं बैठता और जहां की हवा में हमेशा किसी के रोने की गूंच सुनाई देती है
00:45आज उस कुएं की मुंडेर पर खड़ा था विहान
00:50उसकी आँखों में आसू थे तूटे सपने और शरीर पर जखम
00:55वो यहां किसी शक्ती या वर्दान की तलाश में नहीं आया था
00:59बलकि अपनी जिन्दगी खत्म करने आया था
01:02दुनिया की नफरत से हार कर वो जैसे ही कूदने वाला था
01:07कुएं के भीतर से एक बयानक आवाज उठी
01:18तुन्ने सीमा तोड़ दी विहान
01:21पाताल का द्वार खोलने की कीमत चुकानी होगी
01:27विहान मौत तुम्हारी मुक्ती नहीं है
01:33अब उसकी कीमत तुम्हारी आत्मा चुकाएगी
01:38अब तुम्हारा भाग्य पाताल भैरवी के हाथों तै होगा
01:45क्योंकि पाताल भैरवी जाग चुकी है
02:08विहान गाउं के लिए कोई इनसान नहीं
02:11एक जीवित अभिशाब था
02:14उसके पैदा होते ही गाउं में साथ साल का अकाल पड़ा
02:19लोग कहते थे कि उसकी परचाई जिस फसल पर बढ़ जाए
02:23वो जल कर राख हो जाती है
02:26बच्पन में एक आग की दुरघटना में उसके माता पिता जल कर राख हो गए
02:31और विहान वो उस आग के बीच लप्टों से घिरा जिन्दा मिला
02:37एक हलकी मुस्कान के साथ
02:41तब से गाउवालों ने मान लिया ये बच्चा नहीं काल का दूथ है
02:48अब गाउव में कुछ भी गलत होता फसल खराब कोई बीमार कोई जानवर मर जाए
02:55एक ही नाम लिया जाता काल का दूथ विहान
03:00कभी सोचा है हर कहानी में मनहूस कौन बनता है
03:08वो जो अलग हो वो जो अकेला हो वो जो सबसे आसान निशाना हो
03:16गलती मेरी बस इतनी थी कि मैं तुम्हारे डर के समय पैदा हुआ
03:20तुम्हारी फसल सूखी दोश मेरा महारा बच्चा बीमार नाम मेरा
03:26महारी किस्मत तूटी इल्जाम मेरा सच कहूं
03:30मैं अभिशाप नहीं था तुम्हारे डर की ढाल था
03:34मैं एक कारण चाहिए था और मैं सबसे आसान कारण था
03:39लेकिन याद रखना अर सच नहीं बदलता इल्जाम पाप नहीं दोता
03:45इस दिन मैं सच में खड़ा हुआना है मुझ से नहीं अपने ही फैसलों से डर लगेगा
03:50पर विहान अकेला नहीं था उसे हमेशा लगता था कि उसका कोई पीछा कर रहा है
03:58जब जब उसे अपमानित किया गया चाहे स्कूल में बच्चों ने उसकी किताबे जलाई या कुए से पानी भरने पर
04:07और तों ने उस पर राख फेगी
04:09दूर पीपल के बेड के पीछे काली चादर में लिप्टा एक अगोरी खड़ा रहता
04:16उसकी आखें जलती चिता जैसी थी
04:20वो अगोरी रुद्र था जो साए की तरह विहान का पीछा करता और उसकी हर चोट पर एक रहस्य मई
04:30मुस्कान देता
04:32उसकी आखों में एक अजीब प्रतीक्षा थी
04:35विहान ने कई बार उससे बात करने की कोशिश की
04:39मगर हमेशा वो किसी धुए की तरह नजाने कहां गायब हो जाता था
04:45इस नफरत तानू और अंध विश्वास के बीच सिर्फ एक चहरा था
04:52जो विहान को इनसान समझता था
04:55अनाया
04:56वो सरपंच की बेटी थी पर दिल में सत्ता का आहंकार नहीं
05:01करुणा की रोशनी थी
05:03जब गाउवाले विहान को मंदिर की सीडियों से धकेल देते
05:08जब बच्चे उसे देखकर रास्ता बदल लेते
05:11जब हर अनहोनी का दोश उसी पर मड़ दिया जाता
05:15तब अनाया ही थी
05:16जो उसके घावों पर मरहम लगाती
05:19उसके कांपते हाथों में साहस रखती
05:21और छिपकर उसके लिए खाना लाती
05:24विहान हमेशा उसके मासूम चहरे को देखकर
05:28अपना सारा दर्द भूल जाता
05:30उसके लिए वो सिर्फ सहारा नहीं थी
05:33वो उस अंधेरे संसार में एक मात्र उजाला थी
05:38नदी शान थी
05:49लहू सी चमग रही थी
05:50विहान पत्थर पर बैठा था
05:53चुप तूटा हुआ
05:56पर भीतर कहीं ज्वाला मुखी सा दबा गुस्सा
06:00अनाया धीरे से उसके पास आकर बैठती है
06:04सब कहते हैं मैं मनहूस हूँ
06:08जहां जाता हूँ
06:11वहां अनर्थ होता है
06:14तुम हुच से डर्थी क्यों नहीं अनाया
06:18डर? डर तो उन्हें होना चाहिए
06:21जो बिना समझे नफरत करती है
06:24मैंने तुम्हारी आंखों में मनहूसियत नहीं देखी विहान
06:29मैंने वहां सिर्फ डर्थ देखा है
06:32डर्थ भी कभी कभी अभिशाप बन जाता है
06:37नहीं विहान दर्थ अभी शाप नहीं होता
06:40दर्थ वो आग है जो या तो इनसान को जला देती है
06:44या उसे इतना मजबूत बना देती है
06:46कि दुनिया की हर क्रूरता छोटी लगने लगती है
06:50अगर एक दिन ये दुनिया मुझे राक्षस बना दे
06:55अगर मेरा दर्थ ही मेरी पहचान बन जाए
06:59तब भी क्या तुम मेरे साथ खड़ी रहोगी
07:02अगर दुनिया तुम्हे राक्षस बनाएगी
07:05तो मैं वही वजह बनूँगी जो तुम्हें इनसान बनाए रखे
07:08याद रखना विहान जिसे दुनिया ठुकराती है
07:12वही इतिहास बदलता है
07:13एक दो पहर जब विहान अनाया के लिए जंगल से फूल ला रहा था
07:20सरपंच के आदमियों ने उन्हें देख लिया
07:23विहान को जानवरों की तरह बीटा गया
07:27पत्थर, लाठियां और बे इंतहा नफरत
07:31वो खून में लत्पत था
07:33उसे घसीटते हुए उसी खौफनाक कुएं के पास भेंक दिया गया
07:39विहान के भीतर जीने की इच्छा खत्म हो गई
07:43वो रेंगते हुए कुएं की मुंडेर पर चढ़ा
07:47ताकि अपनी जान दे सके
07:49तभी वही अघोरी रुद्र उसके सामने प्रगट हुआ
07:55वो इनसान की खोपड़ी में पानी पी रहा था
07:59तेरा रक्त पाताल की सोई हुई शक्ती को जगा चुका है
08:06तू मर सकता है या अमर हो सकता है
08:11पर अमर होने की कीमत इंसानियत है
08:17तू अपनी अनाया के लिए नरक का द्वार खट खटाएगा
08:21मुझे शक्ती नहीं चाहिए
08:24मुझे अनाया चाहिए
08:27शक्ती से तुम अनाया के साथ पूरे गाउं को जुका सकते हो विहान
08:34एक फैसला, सिर्फ एक फैसला
08:39सब कुछ बदल सकता है
08:41सोचो विहान, आज जो तुम्हें मनहूस कहते हैं
08:47कल वही तुम्हारे कदमों में सिर जुकाएंगे
08:50आज मध्य रात्री बारह के बाद शम्षान में आ जाना
08:56मैं तुझे शक्ती नहीं, नियती पर अधिकार दिलाऊंगा
09:01उस रात शम्षान असामान्य रूप से शांत था
09:07न कुत्तों की आवाज, न हवा की सरसराहट
09:11जैसे प्रकृती स्वयम आने वाली घटना से भयभीत हो
09:16अगोरी रुद्र ने राक से भरे हाथ विहान के मस्तक पर रखे
09:22सोच ले बालक, इस साधना के बाद लोग तुझे पहचानेंगे नहीं
09:28और शायद तुझ स्वयम को भी नहीं
09:32विहान को 21 रातों की रोंटे खड़े कर देने वाली साधना में उतार दिया गया
09:38जहां हर रात केवल भय नहीं, स्लोली अस्तित्व के विरुद्ध युद्ध था
09:44पहली रात, चारों और अंधकार अस्वाभाविक रूप से भारी
09:50साथवी रात, विहान के शरीर पर हजारों अद्रुष्य कीडे रेंगने लगे
09:56पीडा, असहनीय
09:59चौधवी रात, कुए से उसकी मृत मा की जलती हुई आकरिती उभरी
10:04आवाज उसे बुलाती
10:0721 रात, जमीन भटी, नीली अगनी ने शमशान को निगल लिया
10:13और अगनी के मध्य, पाताल भैरवी प्रकट हुई
10:17उनके हाथ में चमक रही थी अमावस्या की काली अंगूठी
10:22मैं तुझे ये काली अंगूठी देती हूँ
10:27जब तक ये तेरी उंगली में है, काल भी तुझे नहीं चू सकेगा
10:33इससे तु वो कर सकेगा, जो मनुश्य कल्पना भी नहीं करता
10:39पर स्मरण रहे, हर अमावस्या, तुझे एक शुद्ध आत्मा का कलेजा
10:48मुझे अर्पित करना होगा, बली देनी होगी
10:54विहान वापस लोटा, पर अब वो पहले जैसा नहीं था
10:59उसके कदम पड़ते ही गाउं की तकदीर बदलने लगी
11:03बीमार खीक होने लगे, सूखे खेत हरे हो गए
11:07लेकिन हर अमावस्या की रात एक भयावह संकेत छोड़ जाती
11:13घर-घर के दर्वाजों पर खून से लिखा मिलता, अमावस्या
11:18हर अमावस्या को उन लोगों में से जिन्होंने विहान पर अत्याचार किये थे
11:24एक-एक युवक गायब होने लगा
11:27विहान समझ चुका था
11:29गायब के लोग किसी अद्रिश्य शक्ती का शिकार बन रहे थे
11:33वो बदला नहीं चाहता था
11:35वो इस रक्त चक्र को रोकना चाहता था
11:39एक रात विहान के सामने वही अगोरी स्वयम प्रकट हुआ
11:46तुम जिस सच्चाई से भाग रहे हो विहान
11:50वह तुम्हारे प्रेम से जुड़ी है
11:54अनाया एक सामान्य लड़की नहीं है
11:58वह एक ब्रह्म राक्षस की संतान है
12:04विहान स्थब्ध रह गया
12:06उसके पैरों तले जमीन खिसक गई
12:10एक तूफानी रात
12:13विहान अनाया को लेकर उसी कुमे पर पहुचा
12:18तभी जमीन के भीतर से ऐसी दहाड उठी
12:22कि दूर मंदिर का घंटा अपने आप बजने लगा
12:27अनाया के पीछे एक बारा फीट उचा साया उभरा
12:33ब्रह्म राक्षस
12:35वो कभी गाउं का प्रकांड तांत्रिक था
12:39जिसने अमर्ता के लिए ब्रह्म ग्यान का सौदा किया था
12:44उसे पाताल में जकर दिया गया था
12:48मुक्ती के लिए उसे चाहिये थी एक श्रापित रूख
12:53जिसके हृदय में दुनिया के लिए नफरत
12:56और एक लड़की के लिए अंधा प्रेम हो
12:59विहान वही मोहरा था
13:03बहुत अच्छे मेरी बेटी
13:06तुमने इस मूर्ख को अंध तक भ्रह्म में रखा
13:11तू प्रेमी नहीं तू मेरी मुक्ती का मार्ग है
13:18अनाया का मासून चहरा धीरे धीरे बिगलने लगा
13:25और वो एक धुंदली भया वहरूह में परिवर्थित होने लगी
13:34विहान की आँखों में आशु थे
13:37पर ब्रह्मराक्षस की आँखों में मुक्ती की आग
13:43अमावस्या अभी समाप्त नहीं हुई थी
13:48ब्रह्मराक्षस ने विहान पर हमला किया
13:51विहान की हड्डियां चटकने लगी
13:54तभी आकाश फटा और नीली बिजली के साथ पाताल भैरवी स्वयम प्रकट हुई
14:01भैरवी का त्रिशूल और राक्षस की काली माया के बीच भीशन युद्ध छड़ गया
14:18उसे एसास हुआ कि उसका प्रेम एक चल था
14:23वह मुस्कुराया एक दर्द भरी मुस्कान उसने अपनी काली अंगूठी निकाली और उसे अपनी ही चाती में उदार दिया
14:32एक जबरदस्त विस्फोट हुआ अंगूठी के तूटते ही पाताल का द्वार एक कृष्ण विवर की तरह खुला
14:40और ब्रह्म राक्षश के साथ साथ अनाया की रूह को भी अनंत गहराई में खीचने लगा
14:46आज भी अंधेर ग्राम में अमावस्या को सन्नाटा रहता है
14:55और अगर कान लगाओ तो कूए के भीतर से विहान की सिसकती आवाज आती है
15:04अनाया
15:30हलो गाईज
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