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A research-based exploration into Rakshasas as described in the Ramayana, Mahabharata, Vedas and Puranas.
Discover the origins, forms and symbolic meanings of Rakshasas with authentic references.
Watch till the end — Were Rakshasas myth or reality?

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Transcript
00:00नमस्कार और स्वागत है आपका बियॉंड दे वेल स्टुडियो में आज हम उस भयावा और रहस्यमै आकरिती के पीछे के सत्य को उजागर करेंगे जिसे राक्षस कहा जाता है
00:20यहाँ केवल कहानियों का हिस्सा नहीं है बलकि भारतिय उपमहाद्वीप के प्राचीन धार्मिक और पौराने ग्रंतों में गहराई से दर्ज एक अवधारना है
00:32तो यहाँ राक्षस आखे हैं कौन?
00:36संस्कृत में राक्षस शब्द का मूल अर्थ है रक्षित करना या जिससे रक्षा की जाए
00:44यानि शुरू में यह एक प्रकार के संरक्षक या भयंकर शक्ती का द्योतक था
00:50हालांकि बात के ग्रंधों में यह मुख्य रूप से अशुप, क्रूर और नर्भक्षी प्राणियों के लिए उप्योग होने लगा
01:00पुरानों के अनुसार विब्रहमा के पैर के अंगूठे से या कशप रिशी और उनकी पत्नी खशा से उत्पन हुए माने जाते हैं
01:09इनका स्वरूप अक्सर भयानक होता है विशाल शरीर, लाल आखें, विक्रित चहरे और नुकीले दान्त
01:18उन्हें मायावी शक्तिया, इल्यूजन, प्राप्त होती हैं
01:22वे इच्छानुसार अपना रूप बडल सकते हैं, जिसे काम रूप कहा जाता है
01:28उनका निवास स्थान अक्सर अंधिरे जंगल, श्मशान घाट और पाताल लोग जैसे स्थानों को बताया गया है
01:37राक्षस की प्रामाने का केवल लोग कथाओं तक सीमित नहीं है
01:41इन्हें सीधे तोर पर हमारे सबसे सम्मानित प्राचीन ग्रंथों में वर्नित किया गया है
01:48इनका सबसे विस्तृत वर्णन वालमी की रामायन और वेद व्यास रचित महाभारत में मिलता है
01:55रामायन में लंका का राजा रावन और उसका भाई कुम्भकर्ण सबसे प्रसिद राक्षस है
02:03वालमी की रामायन उत्तर कांड अध्याय पांच में उनके जन्म और तपस्या का विस्तृत उलेक है
02:10महाभारत वन पर्व में बकासुर जैसे राक्षसों का वर्णन है जो यात्रियों को मार कर खाते थे
02:17कुछ विद्वानों के अनुसार रिगवेद में वर्णित या तुधान जैसी शक्तियों को भी
02:23राक्षसों का प्रारंभिक रूप माना जा सकता है, जो यग्यों में विघन डालते थे
02:30क्या सभी राक्षस एक जैसे थे?
02:34नहीं, शास्त्रों में देव राक्षस जैसे विभीशन और क्रूर राक्षस जैसे रावन, खर्दूशन के बीच भेद बताया गया है
02:46कुछ पूर्व जन्म के पापों के कारण राक्षस बनते थे, जबकि कुछ जन्म से ही राक्षस कुलके थे
02:53आज के दौर में, कई आध्यात्मिक गुरु राक्षस को केवल शारिरिक नहीं, बलकि एक मानसिक अवस्था मानते हैं
03:02यह अत्यधिक लोब, एंगार और दूसरों को पीडित करने की इच्छा का प्रतीक है
03:09यानि जिस व्यक्ति में मानविय मूलियों की कमी हो, वह भी एक तरह से राक्षसी प्रवृत्ती का हो सकता है
03:18निशकर्ष यह है कि राक्षस भारतिय पौरानिक कथाओं में एक केंद्रिय और महत्वपूर्ण अवधारना है
03:26वे न केवल दुष्टता का प्रतीक हैं, बलकि हमें धर्म और अधर्म के बीच के शाश्वत संगर्ष को भी सिखाते हैं
03:35क्या आपको लगता है कि राक्षस केवल मिथक थे या वे सच्मुच अस्तित्व में थे?
03:41हमें कमेंट्स में बताएं
03:43अगली बार तक अपने भीतर के प्रकाश को बनाए रखें
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