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Eastern India ki ek sabse mysterious aur chilling lokkatha hai – Nishi Dak. 🌙
Bengal, Bihar aur Jharkhand ke gaonon mein maana jaata hai ki yeh atma raat ke sannate mein aapke apno ki awaaz mein aapka naam leti hai.

🔮 Kahani ke mutabiq:

Nishi aapko aapke close one ki awaaz mein bulati hai.

Agar aap jawab dete ho, toh aap trance mein chale jaate ho aur uske peeche nikal padte ho.

Aksar log wapas nahi laut paate…

Is video mein hum explore karenge Nishi Dak ka folklore, rural aur urban interpretation, aur jaanege kaise log ise atma-raksha aur psychological symbol dono maante hain.

✨ Watch the full story on Beyond The Veil — uncover hidden myths, urban legends, and mysterious tales from India.

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Transcript
00:00बंगाल बिहार और जार्खन की लोग कथाओं में एक रहस्य में दंत कथा आज भी जीवित है निशी डाक इसका अर्थ है रात की पुकार
00:20माना जाता है कि यहाँ आत्मा किसी प्रियजन की आवाज की नकल कर आपको पुकारती है और अगर आप उस पुकार का जवाब दे दे तो शायद फिर कभी लोट ना पाएं
00:34निशी डाक की शुरुवात का कोई सटीक समय दर्ज नहीं है लेकिन लोग कथाएं बताती है कि यहाँ परंपरा सदियों से पूर्वी भारत
00:44विशेशकर पश्चिम बंगाल बिहार और जारखंड के ग्रामीन इलाकों में चली आ रही है बुज़ुर्ग कथावाचक इसे पीडी दर पीडी सुनाते रहे है निशी का मतलब है रात और डाक का मतलब है पुकार यानि रात की पुकार
01:04यह आत्मा किसी करीबी जैसे मा, पिता, दोस्त या जीवन साथी की आवाज में नाम पुकारती है कहा जाता है कि निशी डाक केवल दो बार नाम पुकार सकती है अगर आप इन पुकारों का जवाब देते हैं तो आप एक अजीब सम्मोहन की अवस्था में चले जाते हैं औ
01:34और आत्मा के पीछे-पीछे जंगल, नदी या सुनसान तालाप की ओर बढ़ता है। कई बार लोग वहाँ से गायब हो जाते हैं या डूब जाते हैं।
01:46लोकमान्यता यह भी कहती है कि निशी वही आत्माएं होती हैं जिने सही संसकार या अंतिम क्रिया नहीं मिली होती। बंगाली संस्कृती में निशी डाक के अलावा पेटनी, अल्या, विलो दविस्प और बेगो भूत जैसी आत्माओं की भी कहानिया है।
02:06लेकिन निशी की खासियत यह है कि यह इनसान के विश्वास और भावना को धोखा देती है। करनाटक में नालेबा, नालेबिये, नाम की प्रथा मिलती है, जहां रात में कोई आवाज पुकारती है।
02:21दोनों ही कहानिया इस डर को दिखाती हैं कि अंधेरे में हमें अपनी ही पहचान पर शक हो सकता है।
02:51सुनाई दे, तो संभल जाए। हो सकता है वो पुकार निशी डाक की हो और शायद उस अंधेरे से लोटना आसान न हो।
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