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  • 1 minute ago
भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर इतिहास रचा है. वायुसेना के IL-76MD विमान ने लद्दाख के न्योमा एयरबेस पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की. ये एयरबेस की ऊंचाई  13 हजार 629 फीट है और चीन के साथ लगी LOC से महज 25 किलोमीटर दूर है. इसके साथ ही, विमान ने दुनिया में अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई पर उतरने का रिकॉर्ड बना दिया है. ये रूसी मूल का भारतीय वायुसेना का एक परिवहन विमान है. आईएल-76 विमान को 1980 के दशक में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. ये करीब 45 टन तक का भार ले जाने में सक्षम है. इसकी नई उपलब्धि पर भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया X पर लिखा, 'ये उपलब्धि विमान की लंबे समय से साबित होती आ रही क्षमता के साथ उसके चालक दल के असाधारण कौशल, सटीकता और पेशेवर दक्षता का शानदार प्रदर्शन है. ये उपलब्धि भारत की सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को और मजबूत करती है.'खास बात ये भी है कि न्योमा दक्षिणी लद्दाख में स्थित एक नया एयरफील्ड है, ये एयरफील्ड पिछले साल बनकर तैयार हुआ था. इतना ही नहीं, यहां करीब तीन किलोमीटर लंबा कंक्रीट रनवे है, जिसका निर्माण सीमा सड़क संगठन यानी BRO के प्रोजेक्ट हिमांक ने किया है. साथ ही, इसे बेहद कम तापमान और कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी संचालन के अनुकूल बनाया गया है. यहां पर तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है.पहले यहां चिकित्सा सुविधाओं और सामरिक परिवहन के लिए प्रयोग होने वाले छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों का संचालन किया जाता था. अब इसे ऐसे पूर्ण विकसित एयरबेस के रूप में तैयार कर लिया गया है, जहां लड़ाकू विमान भी ऑपरेट किए जा सकते हैं. यहां भारी परिवहन विमानों को उतारने की सुविधा मिलने से उत्तरी सीमा पर सैनिकों, सैन्य उपकरणों और रसद की आवाजाही जहां सुगम होगी वहीं, समय में बचत होगी. साथ ही जरूरत पड़ने पर सैनिकों की तेजी से तैनाती और सैन्य सहायता पहुंचाने की क्षमता में भी इजाफा होगा.

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00:02भारतिय वायू सेना ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।
00:30भारतिय वायू सेना का एक बार फिर इतिहास रच दिया है।
01:03भारतिय वायू सेना ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।
01:28साथ ही इसे बेहत कम तापमान और कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी संचालन के अनकूल बनाया गया है।
01:36यहाँ पर तापमान शून्य से 40 डिग्री सलसियस नीचे तक चला जाता है।
01:41पहले यहाँ चिकित सा सुविधाओं और सामरिक परिवहन के लिए प्रयोग होने वाले छोटे विमानों और हेलिकॉप्टरों का संचालन किया
01:49जाता था।
01:49अब इसे ऐसे पूर्ण विकसित एरबेस के रूप में तयार कर लिया गया है जहाँ लड़ाखु विमान भी ऑपरेट किये
01:57जा सके।
01:57यहां भारी परिवहन विमानों को उतारने की सुविधा मिलने से उत्तरी सीमा पर सैनिकों, सैन्य उपकर्णों और सरहत की आवा
02:08जाही जहां सुगम होगी वही समय में बचत होगी।
02:12शाथ ही जरूरत पढ़ने पर सैनिकों की तेजी से तैनाती और सैन्य सहाईता पहुचाने की शमता में भी इजाफा होगा
02:20Bureau Report EDV भारत

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