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हमीरपुर: तीन दशकों की निष्काम सेवा, 5,018 लावारिस शरीरों को गरिमापूर्ण विदाई और हरिद्वार में सामूहिक पिंडदान का संकल्प. यह कहानी देवभूमि हिमाचल को अपनी कर्मस्थली बनाने वाले शांतनु की है. उन्होंने उस वक्त इन शरीरों को कंधा दिया जब दुनिया छोड़ने के बाद इनके साथ कोई नहीं था. शांतनु का ये निष्काम तप सालों से जारी है.मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले और हमीरपुर में एक छोटी सी कपड़े की दुकान चलाने वाले शांतनु पिछले तीन दशकों में 5,018 शवों जिन्हें हम लावारिस लाश कहते हैं उनका पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार और हरिद्वार में अस्थि विसर्जन कर चुके हैं. अब इन सबके लिए 10 अक्तूबर को शांतनु हर की पौड़ी में श्राद्ध करवाएंगे. समाज के तानों, टूटते रिश्तों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद निःस्वार्थ भाव से मानवता का फर्ज़ निभा रहे हैं. कई बदनसीब इंसानी शरीर ऐसी भी होते हैं, जिन्हें मौत के बाद 'लावारिस' का ठप्पा दे दिया जाता है,  जिनके लिए न कोई रोने वाला होता है और न ही विधि-विधान से अग्नि देने वाला, लेकिन देवभूमि हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर शहर में एक ऐसा इंसान रहता है, जिसने इन अनजान और बेसहारा रूहों का 'वारिस' बनने का बीड़ा उठाया है. नाम है शांतनु कुमार. मूल रूप से कलकता के रहने वाले शांतनु ने 1980 में हमीरपुर को अपनी कर्मस्थली बनाया था. यहां स्थानीय बजार में वो कपड़े की छोटी सी दुकान चलाते हैं. इसी से अपना पेट पालते हैं और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार के अलावा पूरे विधि विधान से पिंडदान समेत अन्य क्रियाएं करते हैं. इसके लिए वो किसी से सहयोग भी नहीं लेते. ये सिलसिला 1990 से चलता आ रहा है. 

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00:28।
00:31but in the end of the day,
00:35but in the US,
00:35he also finished his new life
00:36and he was able to get his last life.
00:43He said,
00:45he said,
00:46I asked him,
00:48he said,
00:48he said,
00:48he said,
00:48he said,
00:49he told him,
00:54he said,
00:57he said,
00:58he said,
00:59he said,
00:59This was a tourist tourist.
01:19Shantanu Antim Sarskar करने के बाद,
01:22Haridwar में उनका अस्थि विसर्जन करने के साथ पिंडदान भी करते हैं.
01:26आज पूरे हिमाचल में कहीं भी शांतनू को अग्यातलाश की जानकारी मिलती है तो वहां पहुँचकर उसका संसकार करते हैं
01:35और अस्थियों को हरीद्वार में विसरजित करके आते हैं
01:38अब शांतनू इन दुनिया छोड़ चुके पांच हजार लोगों के लिए हरीद्वार में स्राध करेंगे
02:09शांतनू के पुन्यकाम को प्रोसाहित करने की बजाए इस तथा कथिर पढ़े लिखे समाज ने रूड़िवादी सोच के चलते उनसे
02:17भीदभाव किया ता ने दिये छुआ छूट की नजरों से देखा अपनोंने किनारा कर लिया और शादी के कई रिष्टे
02:24सिर्फ इसलि�
02:37शादी क्यों ने किया, मैं कोई बहुत बर ब्रुमचारी है, कोई महापुरुष्णी है, शादी मैं भी करने गया था लेकिन
02:43उसमें दिक्कती आए कि भाई इसके साथ भूत होता है, लड़का करता कि यह तो देड़ बोरी जलाता है, तो
02:49रिस्ता टूट गया, तो ऐसे कोई
03:14कोविड में जब अपने अपनों की ही लाश को हाथ नहीं लगा रहे थे, उस समय शांतनू ने कई लोगों
03:21का अंतिम संसकार किया, हालांकि कुछ लोगों ने उनके काम को सराहा भी
03:26हजारों के हिसाब से लोगों का अंतिम संसकार किया है, और पुलिस की भी इसमें बहुत मदद की है, और
03:33यह ना केबल एक समाजिक जिम्मेदारी है, बलकि एक धरम का भी एक कार्या है
03:40बड़ी अकाम कर रहे हैं और पिछले कई दश्कों से ऐसा काम कर रहे हैं और एक बहुत ही एक
03:45इनके अच्छी पहल है कि जिन लोगों को अपने अंतिम समय में उनको इसको एक सम्मान भी कहा जा सकता
03:51है, उनको जो सम्मान मिलना चाहिए, एक मुलिश्य होने के नाते, वो सम्
03:56अंतनु ने बता दिया कि रिष्टे सिर्फ खून से नहीं बनते, दिल में अगर इनसानिया जिन्दा है तो एक अजनबी
04:02भी हजारों लावारिसों का वारिस बन सकता है, उनका ये निश्काम तब 30 सालों से चल रहा है, उनका नाम
04:10अब पदमिश्री के लिए भी आगे बढ�
04:13हाया गया है, ETV भारत के लिए हमिरपुर से समित कुमार की रिपोर्ट

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