द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जुआन पुजोल गार्सिया नाम के एक स्पेनिश व्यक्ति ने नाज़ियों को धोखा देने का फैसला किया। उन्होंने ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई5 के लिए काम करना चाहा लेकिन शुरुआत में मना कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने खुद को नाज़ी समर्थक बताकर जर्मन सेना का भरोसा जीता और उनके लिए नकली जासूसी नेटवर्क खड़ा कर दिया।
बाद में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें अपने साथ मिलाया और उनका कोडनेम एजेंट गारबो रखा गया। गारबो ने जर्मनी को सैंकड़ों फर्जी रिपोर्ट भेजीं जिनमें 27 काल्पनिक जासूसों की बनाई हुई झूठी कहानियां शामिल थीं।
उनकी सबसे बड़ी सफलता डी डे यानी नॉर्मंडी लैंडिंग के समय मिली। उन्होंने हिटलर को यकीन दिला दिया कि असली हमला पा दे काले पर होगा। जर्मन सेना वहां रुकी रही और मित्र देशों ने यूरोप पर कब्जा वापस पा लिया।
युद्ध के बाद जुआन पुजोल को ब्रिटेन का सबसे बड़ा सम्मान और जर्मनी का आयरन क्रॉस दोनों मिले। वह इतिहास के इकलौते ऐसे व्यक्ति बने जिन्हें दोनों विरोधी देशों से वीरता पदक मिला।
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अस्वीकरण: यह वीडियो केवल जानकारी और मनोरंजन के लिए बनाया गया है। यह कहानी सार्वजनिक ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है और तस्वीरें संदर्भ के लिए उपयोग की गई हैं।