यह सच्ची कहानी सुतोमु यामागुची की है, जो 1945 में जापान के उन बेहद गिने-चुने लोगों में शामिल थे जिन्होंने दो परमाणु बम धमाकों को सीधे अपनी आंखों से देखा और दोनों से सुरक्षित बच निकले। 6 अगस्त 1945 को यामागुची किसी काम के सिलसिले में हिरोशिमा में थे, तभी अमेरिकी सेना ने वहां परमाणु बम गिराया। वह धमाके के केंद्र से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर थे, जिससे वह बुरी तरह झुलस गए लेकिन उनकी जान बच गई।
इलाज कराने और अपने परिवार से मिलने के लिए वह तुरंत अपने गृहनगर नागासाकी लौट आए। ठीक तीन दिन बाद 9 अगस्त को, जब वह अपने दफ्तर में हिरोशिमा की भयानक घटना अपने बॉस को बता रहे थे, तभी नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिरा दिया गया।
यह अकल्पनीय था कि कोई इंसान तीन दिनों के अंदर दो बार परमाणु हमले के इतने करीब रहकर भी बच जाए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद यामागुची जीवित रहे और उन्होंने लंबी उम्र जी। 2009 में जापान सरकार ने उन्हें आधिकारिक तौर पर दोनों परमाणु हमलों का गवाह यानी दोहरी परमाणु बम उत्तरजीवी की मान्यता दी।
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