00:07ये वाकी हैरान करने वाली बात है कि कैसे एक छोटी से शहर में होने वाली हलचल अचानक पूरी दुनिया
00:12की बड़ी ताकतों को इलर्ट पर डाल सकती है।
00:56आज की इस चर्चा में हमारा फोकस चार मुख्य पहलूं पर रहेगा।
01:00अनसारुला दरसल हूती लड़ाकों को अपचारिक रूप से अनसारुला ही कहा जाता है।
01:04इनके और साओधी समर्थित बलोर के बीच का फर्क समझना बहुत जरूरी है।
01:08क्योंकि यही अनसारुला अभी ताइस के इस पहाड़ी लाके पर अपना कबजा होने का दावा कर रहा है।
01:13स्थिती कितनी तेजी से बदली है जरा इस टाइम लाइन से समझते हैं।
01:17सिर्फ पाँच दिन पहले अनसारुला का काफिला ताइस की तरफ बढ़ना शुरू हुआ था।
01:21और ठीक 24 घंटे बाद साओधी गटबंदा नेउने रोकने के लिए एक ही दिन में 106 हवाई हमले कर दिये।
01:27एक दिन में 106 एर स्ट्राइक्स।
01:30ये संख्या ही बताती है कि हालात कितने खराब होंगे।
01:33लेकिन इस भारी बंबारी के बाद भी आज की स्थिती ये है कि अनसारुला ने में सप्लाइ लाइन्स पर अपने
01:37कंट्रोल का दावा कर दिया है।
01:39अब सवाल ये उठता है कि आखिर 20 ही क्यों।
01:42इसके पीछे की जोगरफी समझना बहुत बिलचस्प है।
01:44एक तरफ 20 है जो बिलकुल दक्षन का गेट पे है।
01:47यहां की उची पहाडियां एक प्राकरतिक किले की तरह काम करती है।
01:51और सबसे बड़ी बात अदन जाने वाली मुख्य सप्लाय लाइने यहीं से कुजरती है।
01:55इसके बिलकुल विपरीत यमन का बाकी जादतर हिस्सा सिर्फ रेगिस्तान है।
01:59जिसका कोई खास रणनीतिक फायदा नहीं है।
02:01तो सीधी सी बात है जिसके पास 20 उसका पूरे दक्षन पर दबदबा ताय है।
02:06चलिए अब आते हैं अपने दूसरे पॉइंट पर साउधी सीमाओं के लिए खत्रा और खास कर जिजान और नजरान के
02:12सम्विदन शीलता है।
02:14यहाँ हाला थोड़े और जटिर हो जाते हैं। जिजान और नजरान के मामले को तीन तरीकों से देखा जा सकता
02:19है।
02:45दरसल सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि खत्रा सिर्फ बॉर्डर पार से नहीं है। अंदरूनी खत्रा उससे भी
02:50बड़ा है।
03:14मक्का समझोते का अचानक लागू होना। जिसके बाद आई पाकिस्तान की बेहत तेज सैन ने प्रतिकरिया।
03:21इस नंबर पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। 25,000।
03:24जैसे ये मक्का समझोते अक्टिवेट हुआ, पाकिस्तान ने तुरंत अपने 25,000 अतरिक सैनेकों को साओधी अरब भीजने का फैसला
03:31किया।
03:31फौज पहुचना शुरू भी हो चुकी है। इस आकड़े से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि साओधी अरब इस
03:37पूरे मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
03:39लेकिन यहां एक बहुती सपष्ट शर्ट रखी गई है। बायान में साफ कहा गया है कि पाकिस्तान की सेनाई यमर
03:45में प्रवेश नहीं करेंगी बलकि घुसपैट से बचाने के लिए पूरी तरह से साओधी सीमाओं के अंदर ही रहेंगी।
03:50मतलब पाकिस्तान का इंवॉल्मेंट पूरी तरह से डिफेंसिव है। उनकी फॉज बॉर्डर क्रॉस करके अंसारुला से लडने नहीं जाएगी। बलकि
03:58उनका काम सिर्फ साओधी अरब को किसी भी हमले से बचाना है। कूटनीदिक लिहास से ये एक बहुती बारीग बैल
04:19इस समझोते का सम्मान करना चाते हैं। चरण एक तो उन्होंने क्लियर कर लिया है यानि मदद भिजने का कारेकारी
04:25फैसला ले लिया। लेकिन असली रुकावट है चरण दो। तुर्की के सम्विधान के मुताबिक किसी भी दूसरे देश में फॉज
04:32भेजने के लिए उन्ह
04:33वहा की संसद यानि Grand National Assembly से अनिवार्य सम्विधानिक स्विक्रती लेनी ही होगी। और यहीं पर घरेलू राजनीती सामने
04:41आती है। विपक्ष ने कड़ी आपत्ती चताई है। उनका सीधा सा तर्क है कि सरकार बिना संसद ये सहमती के
04:47एक तरफा फैसला लेकर तुर्की को ए
04:49ऐसे विदेशी उद में नहीं दखेल सकती जो पिछले एक दशक से चल रहा है। ये बहुत बड़ी भहस शड़क
04:54ही है कि ये फैसला कारेकारी सरकार का होना चाहिए या संसत का। और इस पूरे मामले में सबसे बड़ा
05:00गेम चेंजर ये पॉइंट है। तुर्की सिर्फ एक
05:15सेनाव पर हमला होता है तो क्या तकनीकी रूप से नाटो का अनुछेद 5 ट्रिगर हो जाएगा। अनुछेद 5 कहता
05:21है कि एक सदस्य पर हमला सब पर हमला माना जाएगा। ये स्थिती बिलकुल साफ दिखाती है कि कैसे एक
05:27शेतरिय रक्षा समझा उता ग्लोबल नाटो गड
05:43शुपती एर्दोगन के हाथ बांदेगा और क्या सच में एक स्थानिय सीमा विवाद आखिरकार नाटो के अनुच्छेद 5 का अल्टिमेट
05:49टेस्ट बन जाएगा हाला तेजी से बदल रहे हैं और इसके नतीजे यखिनन पूरी दुनिया पर गहरा सर डालेंगे