00:29तो सीधे मुद्बे पर आते हैं
00:33इस पूरे घटना क्रम के सीक्वेंस को समझने के लिए हमारी रूप रेखा कुछ इस तरह रहेगी
00:38पहले विरोध का बढ़ना, फिर चुनाव आयोकी और मार्च, उसके बाद आकाशवाणी भवन का गती रोध, फिर सुप्रीम कोर्ट का
00:44नोटिस, मीडिया नारेटिव की जंग और आखिर में इन प्रदर्शनों का भविश्य
00:48तो शुरुवात करते हैं पहले हिस्से से, विरोध का बढ़ना यानी एक नया राजनेटिक टक्राव
00:54अब यहां मुख्य चुनाव आयोक्त ग्यानेश कुमार की स्थिती बहुत दिलचस्प हो जाती है
00:59हमारी स्रोत के विशलेशर पर गौर करें तो उन्हें पद से हटाना कोई बचों का खेल नहीं है
01:05तरक ये दिया गया है कि चुनाव आयोक्त सत्ताधारी दल के पूरे धांचे में एक बहुत ही सेंट्रल रोलने भाते
01:11हैं
01:12तो उन्हें हटाने के लिए किसी बहुत बड़े राजनीतिक व्यवधान या भारी आंतरिक दबाव की जरूरत पड़ेगे
01:18ये कोई आम प्रशासनिक बदलाव नहीं होने वाला
01:20इसके लिए विपक्ष को एक अभूत पूर्व दबाव बनाना ही होगा
01:25और दाव कितने उचे हो चुके हैं इसका अंदाजा इस सीधे बयान से लगाया जा सकता है
01:29जहां कहा गया कि देश को हाईजाक कर लिया गया है इन सभी के खिलाफ कारवाई की जाएगी
01:34स्रोत इस बयान को एक खुले अल्टमेटम की तरह देखता है
01:37ये साफ दर्शाता है कि विपक्ष खास तोर पर इंडिया ब्लॉक अब पूरी तरह से ओल इन यानि करो या
01:43मरो वाली सिती में आ चुका है
01:44और निशाना, निशाना सीधे सरकार के टॉप लेवल पर है जिसमें प्रधान मंत्री और ग्रिह मंत्री शामिल है
01:50आगे बढ़ते हैं दूसरे हिस्से की तरफ, चुनाव आयोग की ओर मार्च यानि निर्वाचन सदन की तरफ सड़क पर उत्रा
01:57संघर्ष
01:58एक बार इस टाइम लाइन पर नजर डालते हैं, सुबह साड़े दस बजे इंडिया ब्लॉग के सांसद संसद में इकठा
02:03होते हैं, ठीक ग्यारा बजे वे चुनाव आयोग की मुख्याले की तरफ अपना मार्च शुरू करते हैं, मांग बिल्कुल साफ
02:08थी, चुनाव प्रक
02:27कहानी तो अब शुरू होती है, तीसरा हिस्सा, आकाशवानी भवन का गतिरोध, जो एक बिल्कुल अप्रत्याशित मोड था, आम तोर
02:35पर होता क्या है, एक तैस स्क्रिप्ट होती है, कि पुलीस नेताओं को बसों में बिठाएगी और किसी अंजान जगा
02:39ले जाकर छोड़
02:57अगल में All India Radio के मुख्यालय में जरूर दाखिल हो गए, और पता है, ये ड्रामा कितनी देर चला?
03:03आठ से नौ घंटे, ये कोई छोटा मोटा आंकडा नहीं है, इतने लंबे वक तक ये गतिरोध आकाशवानी भवन के
03:09अंदर चलता रहा, वहाँ धीरे धीरे बाकी नेता भी
03:26अब आते हैं चौथे पहलू पर, जहां सडक की इस लड़ाई में कानूनी हलचल जुड़ती है, सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
03:33यहां स्रोट का विशलेशन एक बहुत जरूरी बात की तरह विशारा करता है, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फॉर्म
03:396 की फोरेंसिक में हुए अनधिकरित बदलावों के हावाले से नोटिस जारी किया, विशलेशकों का ये मानना है कि इस
03:45कदम के जरिए सुप्र
03:49अन्यमित्ताओं से अलग कर रहा है, ये नोटिस सीधे तोर पर विशिष्ट प्रशासनिक बदलावों पर जवाब देही मांगता है, और
03:56इस एक कानूनी दाव ने इस पूरी बहस का रुखी बदल कर रखतीया है, इसी संदर्ब में सुरोट से हमें
04:02एक बहुत ही बहतरीन कि
04:17पबलिक का सेंटमेंट कही ना कही न्याय पालिका के कदमों पर अपना असर छोड़ता ही है, संस्थाएं समाच से पूरी
04:23तरह अलग थलग होकर काम नहीं करती है, चलिए पांचवे हिस्से की तरफ मुर्ते हैं, मीडिया नारेटिव की जंग, यानी
04:30ग्राउंड जीरो पर च
04:47का इस्तमाल, इंडिपेंडन्ट आवाजों की क्रेडिबिलिटी गिराने और एक सेट नारेटिव बनाने के लिए किया जा रहा है, ये सीधी
04:53टकर है पारम पर एक मीडिया और नए जमाने के डिजिटल जर्नलिस की बीच, जो अब उस पुरानी स्थापित स्क्रिप्ट
04:59के ल
05:15लेकिन स्रोत इस कदम की कड़ी आलोशना करता है और इसे आज़ाद रिपोर्टिंग को दबाने और पत्रकारिता पर पहरा यानी
05:22गेट कीपिंग करने के एक तरीके की रूप में देखता है, और आखिर में छटे हिससे पर आते हैं इन
05:27प्रदर्शनों का भविश्य, आगे क
05:41तारी को एक बिलकुल अलग विरोध प्रदर्शन और इसका सीधा सा मतलब यह है कि विपक्ष अब भी अलग-अलग
05:47खेमों और अलग-अलग टाइमलाइन्स पर चल रहा है और यही वो रुकावट है जो सरकार पर एक मजबूत, एक
05:53जोट और निर्णायक दबाव बनाने मे
05:54सबसे बड़ी कठिनाई पैदा करती है तो अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है सडकों पर लगातार बढ़ता हुआ यह
06:01विरोध और दूसरी तरफ से उभरती हुई संस्थागत जांच इन दोनों का मेल आने वाले दिनों में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं
06:07का भव
06:08कैसे तै करेगा क्या यह सियासी दबाब वाकी किसी बड़े बदलाव की वजह बनेगा या फिर बिखरे हुए विपक्ष के
06:14चलते धीमा पड़ जाएगा इन सवालों के जवाब ही आने वाले वक्त की राजनीती की दिशा तै करेंगे एक बार
06:20इस पर जरूर विचार कीजे�
06:21जयत राजनीती की दिशालों के किसी डर्ते विच जयत है।