00:28४४ूराजनीती
00:53।
01:01ुपिश्या, इस दोड़ा की नहीं है, इसकी पीछे एक बहुत ही खास कूटनीतिक घटना है, कूटनीतिक नॉन पेपर, चलिए समझते
01:09हैं कि इस धंकी का असल माध्यम क्या है, अब सवाल ये है कि ये देहशत आखिर पहली कैसे, इसे
01:15समझने के लिए हमें थोड़ा कूटनी
01:17एक शब्दावली को देखना होगा, ये नॉन पेपर आखिर बला क्या है, दरहसल ये एक अनॉपचारिक कागस होता है, इस
01:24पर किसी भी देश की कोई अधिकारिक मुहर या स्टैंप नहीं होता, लेकिन इसमें जो संदेश होता है न, वो
01:30बेहत गंभीर और बिलकुल स्पष
01:44इसमें दिया गया है, स्तुरोध बताते हैं कि इसमें साफ साफ लिखा है कि अगर नाटो, कैलिनिनग्राड एंक्लेव पर कबजा
01:49करने या उसे रूस से काटनी की कोई भी कोशिश करता है, तो रूस सीधे परमानों हत्यारों से इसका जवाब
01:54देगा, बस यही वो शर्थ है
01:55जो इस पूरे बढ़ते विवाद की जड़ है, कैलिनिनग्राड और सुवाल की गैप, वो भोगॉलिक चोप पॉइंट जो इस पूरे
02:02खेल का केंद्र है, कैलिनिनग्राड की भोगॉलिक स्थिती ही इसे इतना एहम बनाती है, यह बाल्टिक सागर के तटपर स्थित
02:09एक र�
02:12मुख्य भूमी रूस से पूरी तरह से अलग थलग है, इसके उत्तर में लिथुएनिया है और दक्षिन में पोलन, और
02:18ये इन दोनों के बीच सैन्विच की तरह फसा हुआ है, मुख्य भूमी से इसका यही अलगाव इसे रणनीतिक तोर
02:23पर बेहद समवेदिनशील और अस�
02:27यहां एक नंबर पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, पैसट किलोमीटर, ये सुवाल की गैप की चोड़ाई है, पोलन और
02:34लिथुएनिया की बीच का ये बहुत ही छोटा सब और है, जो नेटो को बाल्टिक देशों से जोडने वाला एक
02:39लौता जमीनी रास्ता है, और दिल
02:56कि किसी बड़ी संखर्ष के दौरान इस गैप पर कबजा किया जाए, क्योंकि उन्हें कैलनन ग्रैड में मौजूद मिसाइलों से
03:01बड़ा खत्रा महसूस होता है, वहीं दूसरी तरफ, रूस को हमेशा ये डर सताता है कि नाटो सुवाल की गैप
03:07का इस्तमाल करकी उनकी इस �
03:09लेगा, लिखित परमानू धमकी, आइए इस नॉन पेपर में दी गई स्पश चेतावनियों को थोड़ा और बारी की से समझते
03:16हैं, इस रूसी नॉन पेपर में दी गई चेतावनियों के शब्दों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, दस्तावेस के मुताबिक
03:23रूस का मा
03:37बात ये है कि युक्रेन के मामले में हमने जो देखा, उससे बिलकुल अलग एक भयानक चेतावनियों इस दस्तावेस में
03:42है, इसमें साफ तोर पर लिखा गया है कि अगर कोई भी संगाश शुरू होता है, तो पहले ही क्षण
03:47से सीधे राश्ट्रुपतियों, प्रधान मंत्
03:50होके निर्णय लेने वाले केंदरों पर हमला किया जाएगा, और नॉन पेपर में इस्तमाल किये गई इस सटीक वाक्यांच को
03:56देखिए, परमानु हथियार सहित पौन स्पेक्ट्रम, इन शब्दों का मतलब है कि परमानु खत्रे को कागस पर पूरी तरह से
04:03सपष्ट कर दि
04:18इस कूट नीतिक हताशा को समझने के लिए हमें युद के व्यापक मोर्चे को देखना होगा, स्रोत के अनुसार चार
04:24एहम रणनीतिक युक्रेनी शहर कुपियांस्क, कुस्तियांती नीवका, डोब्रोपिलिया और कीव इस वक्त रूसी नियंत्रन में आने के भारी जोखि
04:31में हैं, ये शहर एक तरह से रक्षा की अन्तिम पंक्ती की रूप में खड़े हैं, और यही वचा है
04:36कि यॉरप के भीतर घबराहट इतनी तेजी से बढ़ रही है
04:39अब बाल्टिक देशों की जन सांखी की को देखते हैं, जो एक और बहुत ही महत्वपून पहलू है
04:44स्रोत का दावाए कि एस्टोनिया, लात्विया और लिथुआनिया में एक बड़ी जातिय रूसी आबादी रहती है
04:50इसके साथी ये आरोब भी लगाये गया है कि इन जातिय समुहों को वहां की संबंधित सरकारों द्वारा लगातार दमन
04:57का सामना करना करना पड़ रहा है
04:58यहां स्रोत ने एक बहुती शांदार एथिहासिक साद्रिश्टा या एनालेजी दी है
05:03संभावित बाल्टिक विद्रो की तुलना 1971 के बंगलादेश मुक्ती संग्राम के दौरान बंगाली मुक्ती वाहिनी से की गई है
05:10सोचे अगर बाल्टिक शेत्र की जातिय रूसी आबादी हाथियार उठा लेती है और पीछे से मिलिश्या के रूप में तोड़फोर
05:16शुरू कर देती है
05:44संगर्ष में स्लीप वाकिंग यानी नींद में चलना युद की वो गती जिसे रोक पाना अब मुश्किल लग रहा है
05:52और अन्थ में उस भायाना गती पर विचार करना बहुत ज़रूरी है जो इस थरकी संगर्ष में बेकाबू हो सकती
05:58है
05:59मौजुदा भूराजनीतिक हालात की गंपीरता को देखते हुए स्रोत से लिया गया एक बहुत ही चुपता हुआ सवाल सामने आता
06:04है
06:04क्या वाकई में दोनों पक्ष इस तनाव पर ब्रेक लगाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर दुनिया बस नीद
06:10में चलते हुए एक परमानू प्रलै की और बढ़ती जारी है
06:13ये एक ऐसा सवाल है जो सच में हमें गहराई से सोचने पर मजबूर कर देता है