00:28इस एक्स्ट्रीनर में स्वागत है।
00:58आईए, शुरू करते हैं।
01:01इस एनेन की रिपोर्ट और इस कथित योजना के बारे में आखिर क्या कहा जा रहा है, इसे समझते हैं।
01:06अंतराश्ट्री मीडिया में जो रिपोर्ट्स आई हैं, उनके अनुसार एक योजना पर काफी चर्चा हो रही है।
01:11कहा जा रहा है कि अमेरिका अपनी ताकत दिखाने और एक नर्नायक राजनीती जीत हासिल करने के लिए एरान पर
01:17अपना सबसे बड़ा पारम पर एक बम यानि
01:19Mother of All Bombs गिरा सकता है। सुनने में ये किसी Hollywood फिल्म के सींज जैसा लगता है।
01:24रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसका मकसद घरेलू राजनीती में एक शांदार जीत का दावा करना हो सकता है।
01:30लेकिन जब हम मिलिटरी की असलियत पर नजर डालते हैं तो कहानी कुछ और ही नजर आती है।
01:35और यहीं पर एक बहुत ही दिल्चस्प और बड़ा टकराव देखने को मिलता है।
01:38एक तरफ हैं तमाशा, यानि दोनिया और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एक विशाल, होफनाक और शांदार दिखने वाला
01:45विस्पोड करना।
01:46और दूसरी तरफ है असली रणनीती, यानि किसी बेहत मस्बूत और सुरक्षित लक्षे के खिलाफ वास्तविक सैन्य और देश्यों को
01:53हासिल करना।
01:54आज हम इसी बड़े अंतर को गहराई से डिकोड करने वाले हैं।
01:58अब बढ़ते हैं हमारे दूसरे हिस्से की तरफ. आखिर ये मुआब बम है क्या? आएए इसके हाड़वेर और इसके पीछे
02:04की तकनीक का विशनेशन करते हैं।
02:06आप बोलचाल में लोग इसे बड़े प्यार से Mother of All Bombs कहते हैं।
02:10लेकिन इसका असली तकनीकी नाम है MOAB यानि Massive Ordnance Air Blast. ये कोई छोटा मोटा हत्यार नहीं है, ये
02:1830 फुट लंबा और 10,000 किलोग्राम का एक विशाल पारंपरिक बम है।
02:23सबसे खास बात ये है कि इसके नाम में जो A है उसका मतलब Air Blast है। इसका सीधा सा
02:28मतलब ये है कि ये बम जमीन के अंदर खुसकर नहीं भड़ता, बलकि सता के ठीक उपर हवा में भड़ता
02:33है। और जब ऐसा होता है तो लगबग एक किलोमीटर के दाइरे में एक भयानक श�
02:38इस भयंकर शॉक वेव की पीछे का राज है इसका केमेकल मिक्शचर। ये बम H6 जिसे ट्राइटरनल भी कहते हैं
02:45नाम के खास कमर्शल विसपोटक का इस्तमाल करता है। ये 80% TNT और 20% अलुमीनियम पाउडर का एक
02:51बेहत घातक कॉक्टेल है। अलुमीनियम पाउडर में ल
03:08अतलब ये हुआ कि इस हतियार को किसी बंकर या पहाड को छेदनी के लिए नहीं बनाये गया है। इसी
03:13केवल और केवल सतह पर अधिक्तम तबाही और शॉक वेव पैदा करनी के लिए ही डिजाइन किया गया है। लेकिन
03:18अगर हम इन आकणों को सही परीप्रेक्षम में रख
03:20कर देखें तो एक अलगी सक्चाई सामने आती है। मोआब की ताकत 11 टन TNT के बराबर है। ये बहुत
03:26जादा है इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन जब हम इसकी तोलना हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणू बं से करते
03:31हैं जिसकी ताकत 15,000 थी तो मोआब उसके सामने बिलक
03:48परमाणू बं को गिराय कैसे जाता है। इसका तरीका काफी अलग है। इसे किसी लडाकू विमान से नहीं बलकि एक
03:54बड़े कार्गू विमान के पिछले हिससे से एक पैलट पर रखकर बाहर दखेला जाता है। तो चलिए अब तीसरे भाग
04:13पर आते हैं। इरान का अभीद
04:15पहाड और इस लक्षे की जमेनी हकीकत.
04:18सारी तकनी की बातों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उड़ता है
04:21कि क्या सतह पर तबाही मचाने वाला ये एर ब्लास्ट बम
04:24इरान की गहराई में छिपी परमानु सुविधा का कुछ बिगार सकता है?
04:27जिस जगा को निशाना बनाने की बात हो रही है वो है पिकैक्स माउंटिन.
04:31ये जगा नतान से लगभग डेड़ से दो किलोमेटर दूर है.
04:34ये कोई आम इमारत नहीं है, बलकि ठोस और बेहत कठोर ग्रेनाइट चटानों को काट कर बनाये गया एक टनल
04:40कॉंपलेक्स है.
04:41और सबसे एहम बात, ये सुविधा सतह से 110 से 121 मीटर नीचे स्थित है, जहां बेहत संवेदन शील सेंट्रिफ्यूज
04:48रखे गए हैं.
04:49इसे जान बूचकर भारी बंबारी को बेयसर करने के लिए ही ऐसा बनाये गया है.
04:53अगर हम इतिहास के पन्ने पल्टें, तो एक बहुत ही सठी को धारण मिलता है.
04:56साल 2017 में अफगानिस्थान के इनंगारहार में इस्लामिक स्टीट की गुफाओं पर बिलकुल यही मुआब बं गिराया गया था.
05:03उस समय भी इसकी खूब चर्चा हुई थी, लेकिन 2020 आते आते यह संगठन फिर से खड़ा हो गया, और
05:08अक्टूबर 2026 तक की स्थिती देखें, तो यह संगठन बेहत सकरी है.
05:12जब यह बं गुफाओं में चिपे एक संगठन को पूरी तरह खत नहीं कर पाया, तो एक आधुनिक और 111
05:18मीटर गहरे सैने ग्रेट बंकर के खिलाफ यह कितना कारगर होगा, यह सोचने वाली बात है.
05:22और यही हमें हमारी चौते हिस्से की तरफ ले जाता है, मुवाब बनाम बंकर बस्टर. सैने दिश्टिकोंड से ये एक
05:29बहुत ही बड़ा मिसमयाच है, यानि बेमेल स्थिती है.
05:32इसे गहराई से समझने के लिए इन दो हत्यारों की तुलना करनी होगी. बंकर बस्टर बं, जैसा की नाम से
05:38ही जाहिर है, अपने भारी वजन का इस्तमाल करके जमीन के अंदर गहराई तक गुसता है, और फिर भटता है.
05:43ये बं 13,600 किलो का है, लेकिन इसमें विसफोटक के�
05:4727,600 किलो होता है. बाकी सारा वजन इसे जमीन में धसाने के लिए होता है. इसके बावजूद ये मिटी
05:53में सिर्फ 61 मीटर तक ही अंदर जा सकता है. अब जरा सोचिए, जब बंकर बस्टर भी 61 मीटर तक
05:59ही जा सकता है, तो इरान की 121 मीटर गहरी ठोस गिनाइट सुरंगों क
06:14इसकी डिलिवरी. मौब इतना विशाल है कि इसे B2 या B52 जैसे स्टेल्थ बंब वर्षकों में नहीं रखा जा सकता,
06:21जो रडार से बद सकते हैं. इसके लिए धीमे उड़ने वाले C-130 या C-17 कारगो विमानों की जरुद
06:27होती है. और समस्या ये है कि इरान ने अपनी स्था
06:43इसे पर पहुँच गए हैं. इस पूरे डेटा से क्या निश्कर्ष निकलता है? ये सिर्फिक राजनित एक स्टंट है या
06:49कोई असली सैन्य खत्रा? हमारी विशलेशन का डेटा एक ही बात की तरफ इशारा करता है. जैसा कि एक विशेशग्या
06:55का कहना है, ये विश्फूर्
07:02लेकिन ये 121 मीटर नीचे मौजूद किसी भी चीज को नश्ट नहीं कर पाएगा. ये टेलवेजन स्क्रीन पर तो बहुत
07:08भयानाक और असरदाद लगेगा, लेकिन सामरिक तौर पर इसकी सफलता ना के बराबर होगी. कुल मिलाकर निश्कर्ष ये निकलता है
07:15कि सतह पर होन
07:28चस्प सवाल पर लाकर छोड़ देता है. अगर दुनिया का सबसे बड़ा पारंपरी खत्यार भी आधुनिक सैन्य रक्षा प्रनालियों की
07:34केवल सता को ही खरोच सकता है, तो भविश्य में दुनिया की महाशक्तियां अपने सैन्य गतिरोदों को कैसे सुलजाएंगी? क्या
07:41भारी भरकम बमों का दौर आप खत्म हो रहा है? ये एक ऐसा सवाल है जो कल की सैन्य रणनीतियों
07:46को पूरी तरह से बदल कर रख सकता है. इस एक्स्प्लीनर में हमारे साथ जुड़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.