दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया. कोर्ट कल यानि 23 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी. सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है. उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या इस नोटिस में कोई दम है? हमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है. पुलिस को कानून की क्लास लेने की जरूरत है. दरअसल दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर को बोरा को नोटिस जारी कर उन्हें 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. नोटिस में नेहा बोरा को निर्देश दिया गया है कि वो अपने खिलाफ चल रही जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत एक जमानतदार के साथ दस हजार रुपये का निजी मुचलका भरे. नेहा बोरा को 16 अक्टूबर, 2026 को तब एहतियातन गिरफ्तार किया गया था जब वो काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में हिस्सा लेने जा रही थीं. दिल्ली पुलिस ने नेहा बोररा को 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया था.