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वीडियो जानकारी:

प्रसंग:


संगीत: मिलिंद दाते
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Category

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Learning
Transcript
00:00आप बात करते हो उन क्रांतिकारीं की जिन्नोंने हिंसा का मारग जुना, उनकी संख्या कितनी थी, और उन क्रांतिकारीं की
00:07भी मुख्विरी करके उनको लगतार पकड़वाता कौन था
00:10भारती ही पकड़ आते थे ना
00:12भगत सिंग को फासी दी और फासी देके
00:14उनकी लाश के सौ टुकड़े करे
00:16किसने के एक भारतीय ने करे थे
00:18अंग्रेजों की हुकूमत
00:20चल कैसे रही थी
00:21अंग्रेजों के दम पर कौन चला रहा था
00:24तब फिर प्रितानवी हुकूमत भारत में, भारतिय ही चला रहे थे न, वो भारतिये जो इतने भूखे नंगे थे कि
00:30पेट की खातेर कुछ भी करने को तैयार थे, क्या भारतियों के उस वक्त यह हालत थी, कि आप कहें
00:36कि एक जनांदोलन होगा वो भी हिंसक हो सकता था, क्या,
00:40खाने को रोटी नहीं, पढ़े लिखे नहीं हैं, सो तरह के अंधविश्वासों में लिपते हैं, जातपात और गंदगी के नर्क
00:48में डूबे हुए हैं, उनसे कैसे अंधोलन करवा ले थे, भाई, क्या बाते कर रहे हुए, आज आपको लगता है
00:56कि क्यो नहीं कर दिया, क्य
01:09ठीक लगा, वो रास्ता उन्होंने चुना, धीरे धीरे करके उनसे कहा कि सविने अवग्या अंधोलन, लड़ मत जाना, पर उनकी
01:20बात मान मत लेना, अवग्या करना, सशस्त्र अवग्या नहीं है, मात्र अवग्या, इतना ही बहुत है, इस स्यादर नहीं कर
01:30सकते थे, आप �
01:31आज बिलकुल भहस कर सकते हैं इस बात पर कि कोई दूसरा रास्ता भी हो सकता था, कर लिजिए भहस,
01:37लिकिन उस व्यक्ति ने जो रास्ता चुना, अपनी दृष्टी से, अपने विवेक से, उसमें उस इनसान पर आप व्यक्तिकत लांचन
01:44लगाएं, ये कता ही ठीक नहीं ह
01:45सकते हैं

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