00:00तो लेटा हुआ है फकीर, तो फकीरों जैसी है उसकी जोपड़ी, वहां उपर टूटा भी हुआ है मामला, छपपर गिरा
00:07हुआ है, या छट में छेद है, जो भी बात होगी, तो लेटा हुआ है, पूर्णिमा है, उपना मस्त अपना
00:12देख रहा है चांद को, बड़ा मजा आ �
00:13उसको, और बस टक-टकी बांदे चांद कोई देख रहा है, हिल नहीं रहा, चोर घुसाता है, चोर भी चोर
00:20जैसा, फकीर घर में चोर ही घुसा है, तो वहां उसको जो भी मिलता है, दो चार बरतन मिले, एक
00:26आद कपड़ा मिला, जो भी उतके घर रहा होगा, अपना उठा ल
00:43मतलब समझ रहे हो, बात कितनी सूक्षो है, जो असली है वो तो तू ले ही नहीं जा पा रहा
00:49पगले, ये वही प्रक्रते और आत्मा की बात है, जो असली है तो उसको कहां ले जा पा रहा है,
00:54इसका मतलब यह नहीं कि चांद असली है, मन चांद को जिस प्रेम से देख रहा ह
01:00उसमें कुछ बात आत्मा जैसी है, वो असली चीज है, और वो तो तु ले नहीं जा पारा चोरी करके,
01:06जो तु ले जा पारा है, बरतन भाड़ा कपड़े फटे हुए मेरी तूटी चपले, इनमें क्या रखा है, ले जा
01:10ये सब कुछ, काश मैं तुझे चांद भी दे पाता है
01:14ले जा जो जो ले आ रहा है