00:00एक कोई साधू फकीर किसी पेड़ के नीचे बैठा हुआ था तो कोई आता है उससे पूछता है कि अरे
00:06भाई बस्ती का रास्ता किधर को है भाई बस्ती का रास्ता किधर को है तो उधर को दिखा देता है
00:13और उधर होता है मसान वो आदमी वहाँ जाता है वहाँ देखता है ज
00:29बुस्ती कहाँ है, तुम ने कहाँ भेजिदिया, वही है बसती, वही पर हमने लोगों को बसते देखा है और जिधर
00:37तुम जहना चाते हैं ये जिस गाँव जाना चाते हो इधर है पर उस
00:41तो हमने बस उजड़ते Though, है वहां कभी कोई बस नहीं पाया वहं बसने की चेश्टाई कर आदे यह पर
00:48उजड़ते हैं बसते तो वहं
00:50जाकर के अरे जब बसना वहीं जाकर के है तो युवाओं से पूछ रहा हूँ तुम्हें बसने की अभी से
00:56इतनी आतुरता क्यों
00:57क수 को हैं बसाने का करमत्व प्रकृति antan पहले ही नियत कर रखा है उअब
01:03का सलो विदानत का संदेश चरईवेती सेट्लमेंट सेट्लमेंट नहीं है संदेश
01:09कि चलने से इतना डर गए और भीड से इतना प्रभावित हो गए कि जो जगह
01:16थोड़ी भी अनुखूल लगी वहीं पर जा करके बस डेरा जमा दिया और बस गए यह नहीं करना है आगे
01:25बढ़ो और फिर कह रहा हूं पूरब को पूरब को तो विशेशकर बहुत जरूरत है आगे बढ़ते रहने की क्योंकि
01:34हम बहुत ज्यादा अतीत में बसे हुए हैं हमे
01:41तो बहुत रास्ता तया करना है वो रास्ता भी तया करना है जो पिछली पीडियों को तया कर देना चाहिए
01:48था उसको भी तया करने की जिम्मेदारी आपके उपर आ गई है हमारे उपर नहीं कहूंगा क्योंकि मैं भी अब
01:56आपकी पीड़ी को नहीं हूं आप जंजी हो भई
02:10चाहे वो विचारधारा की बात होगी मैंने अपने लिए विचारधारा चुनली और कब चुनली जब मैं 15 वर्ष का था
02:16तभी चुनली अगर तुम पंदरा वर्ष के थे तुम्हें कुछ पता भी है विचारधारा तुम्हारे पास कहां से आ गई
02:37गहराई से जड़े ले चुका है
02:39तुम्हें पता भी है कि यह सब तुमने कब सीख लिया था
02:41तुम क्यों जम गए इस पर