00:00मन मार करके किसी को पानी भी दोगे तो पानी भी नहीं लगेगा उसको
00:05भीतर इतना आक्रोश है इतनी घुटन है
00:09तो रिष्टों में क्या ताजगी और क्या सेहत होगी या होगी
00:14कुछ नहीं
00:16बस उपर उपर से कर्तव निभाने का काम चल रहा है
00:25इसलिए जिम्मेदारियां जब अंधी होती है तो वो नुकसान करती है
00:30एक दिशा में नहीं दोनों दिशाओं में
00:32जो जिम्मेदारी निभा रहा होता है उसको भी बरबाद करती है
00:36और जिसके प्रति जिम्मेदारी निभाई जा रही होती है वो भी बरबाद होता है
00:42कर्तव्य और प्रेम वास्तव में कोई दूर की वाते नहीं होते हैं
00:45उसाथ साथ चलते हैं
00:48लुकधर्म में ऐसा होता है कि दूसरा हसता रहे उसके लिए आपको रोना पड़ेगा
00:53धर्म में ऐसा नहीं होता
00:55धर्म में जब अपने और पराय का भेद ही मिटता है
01:00तो ऐसा कैसे होगा कि दूसरा हसरा है और आप रो रहे हो