00:03अगर वो संत थे तो पॉलिटिक्स में क्या कर रहे थे और अगर वो पॉलिटिशियन दरूर थे पर उन बेचारों
00:13के साथ पॉलिटिक्स बहुत की गई
00:15वो भी खास कर उनके मरने के बाद
00:18नहीं बात इसकी कि संत थे की नहीं थे
00:20कॉंग्रेस से उन्होंने बहुत पहले स्तीफा दे दिया था
00:221934 में उन्होंने छोड़ी थे
00:24आजादी है 13 साल पहले कॉंग्रेस छोड़ी
00:26उसके बाद कॉंग्रेस पर उनका अधिक से अधिक एक नैतिक प्रभाव था
00:30कॉंग्रेस के नेता और आ करके गांधी चीज से सलाह लेते थे
00:34कॉंग्रेस का ध्यक्ष कौन होगा ये भी गांधी के आशिरवाद से तय होता था
00:38तभी वो सुभाष चंद्र बोस और पट्टा भी सीता रमईया वाला
00:42किया करते हमे चीज सरिता
00:59आप ब्लकुल कह सकते हैं कि और करना चाहिए था हम सहमत है और करना चाहिए था
01:07तो आप करिए न और आज आपको किसने रोका है
01:10पर उन्होंने जितना करा उनको तो डिस्क्रिडिट मत करिये न
01:13एक इंसान जो कर गया है उसका जबरदस्ती असमान करो ये ठीक नहीं है
01:19मत कहिए संत थे लेकिन इतना तो मानो क्योंगी समासुधारक थे