00:00जुन्नू को ड्रग्स की आदत लग गई सिरिंज वाली और मामला सस्ते मेरा इसके लिए वो आठ दस बैठा करते
00:09थे और सब एक ही सिरिंज से अपना करें लोगो ने बहुत समझाया कि ड्रग्स तो है ही जहर वही
00:17जो तुम्हें एक ही सिरिंज लगाते हो वही बिमारी पकड�
00:21जुन्नू को लग गया अचाइवी जिस दिन लगा उस दिन थोड़ी पता चला बोले कुछ नहीं है हमें कोई सजा
00:27मिली ही नहीं उनको पांच साल बाद पता चला जब उसका पूरा व्रिक्ष प्रकट हो गया वह एड्स बन गया
00:36सिम्टम्स आ गये पर सजा कम मिली थी पां�
00:50पत साल तक जुन्नू मौज में थे इसलिए हम स्थूल जीवन बिताना चाहते हैं ताकि जो सजा मिल ही रही
01:00हो पता न चले कि मिल रही है सजा तो उसी दिन मिल गई थी जिस दिन वाइरस शरीर के
01:04अंदर गया था मिल तो गई थी पर द्रिश्टी इतनी सुक्ष्म नहीं थी क
01:10भारी सजा मिल चुकी है जब स्थूल परिणाम शरीर से फूट-फूट के निकलने लगे पांच साल बाद तब जुन्नू
01:18को पता चला कि सजा मिली है पश्टी 5 साल बाद नहीं मिली थी सजा सजा तो अब ये भी
01:25हो सकता था कि जो वो कर रहे थे करते रहते को इंफेक्शन �
01:28न लगता वो भी सकता था उन्होंने देखा बहुतों को नहीं लगता इसी आशा से फिर तमाम अपराद
01:35बचे रहते हैं इसाशा अपराध की जननी है उम्मीद से लोग कहते हैं दुनिया कायम है अउमीद से दुनिया नहीं
01:45उमीद
01:45से अपराध कायम है
01:46हर अपराधी कोई उम्मीद होती है
01:49कि अपराध कर दूँगा
01:50दंड नहीं मिलेगा
01:52उम्मीद से अपराध कायम है