00:00और जानते हो भगत सिंग के लिए ये कलेक्टर और गैरा बनना बहुत आसान था क्योंकि उस समय पढ़े लिखे
00:05लोग बहुत कम होते थे
00:06और भगत सिंग सिर्फ आपचारिक रूप से पढ़े लिखे नहीं थे कि उनको आज डिग्री थी
00:11वो वास्तों में पढ़े लिखे थे
00:12हम भगत सिंग की बात सुनते हैं तो उनका संबंध सिर्फ बम और बंदूग से लगाते हैं
00:18उनका पहला नाता किताबों से था
00:20अपनी उम्र के हिसाब से उन्होंने बहुत पढ़ रखा था
00:23पढ़ भी रखा था और लिखा भी
00:39इतने प्रतभाशाले आदमी को तो सब मिल जाता दुनिया से वो जो मांगता दुनिया दे देती उसको
00:45तब ICS होता था इंडियन से करने ते उत्तीर
00:49इतनी प्रतभा के छात्र तो देश में तब बहुत थे ही नहीं
00:54जो लोग उची शिक्षा कर लेते थे लगभग निश्चित हो जाता था कि उनको सरकारी नौकरी अंग्रेजों की मिल ही
01:00जाएगी
01:00तो भगत सिंग चाहते तो पढ़िया एकदम तुरंत मिल जाती हाँ था ही चीज को ठुकराया उन्होंने
01:05एक आम मध्यमबरगी जिन्दगी जीना तो उनके लिए भी बहुत आसान था क्योंकि प्रतिभा संपन्न थे इंसान कहता है ना
01:16और जो ना होती है वही जवानी की पहचान होती है