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पूरा वीडियो: श्राद्ध आदि प्रथाएँ: अर्थ और महत्व || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव आइ.आइ.एस.सी(IISc)बेंगलुरु(2022)

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वीडियो जानकारी: 10.09.2022, वेदांत महोत्सव, आइ.आइ.एस.सी बेंगलुरु

#acharyaprashant #श्राद्ध #shraadh #rituals #परंपरा

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Transcript
00:00प्यास अगर बुझानी है पितरों की तो जब वो जी रहे हैं तब बुझा दो और अगर वो नहीं जी
00:07रहे हैं तो उनकी प्यास बुझाने का एक ही तरीका है कि अपनी प्यास बुझाओ क्योंकि वो तुम्हारे रूप में
00:14अब जेवित हैं जो कुछ वो नहीं पापाए उसक
00:27कि पीछे से तुम गाय उड़े का दान कर रहे हूँ और तुमाम तरहें कर रहे होगे फ़लाने तालाब में
00:36फ़लाइं प्र पेड़ पर उसकी आत्मा लटकी हुई है यह तुम क्या कर रहो उस वक्तÖ कि घरिमा का थोड़ा
00:41तो ख्याल कर को जो चला गया है। उसका आपमान त�
01:00तो ये बात तो गतव्यक्ति की गरिमा के भी विरुद्ध है कि इस तरह की कहानियों को तो मैं आगे
01:08बढ़ा हो उजब जिन्दा थे तब तुमने उनसे ऐसे बोला होता कि आप जब मरोगे तो आपका भूट को आजा
01:14के लटक जाया किसमें तो उने क्यासा लगा होता
01:19ये भी कोई आवश्चक नहीं होता कि आप सब कथाओं परंपराओं से पल्लाई जाड़ लें लेकिन कोई भी परंपरा अगर
01:29अर्थहीन है तो मूलहीन है उसका पालन करने पहले पूछो कुछ अर्थ है इसमें नहीं अगर है और कुमे साफ
01:37दिख रहा है कि अर्थ है तो ठीक
01:39के पालन कर लो तो ये जो विदाई होती है ये अपने आप में जैसे जाने वाले की अंतिम इच्छा
01:49की अभिव्यक्ति होती है अंतिम और उच्छतम वो जा करके आपको बता रहा है कि जो कुछ भी तुम चाहोगे
01:55वो इसी तरह एक दिन विदा हो जाएगा कुछ ऐसा चाहल
01:59जो विदा ना हो सकता हो तुमने एक व्यत्य को चाहा या तो व्यत्य विदा होगा या तुम विदा होगे
02:05तो जाते जाते भी जैसे तुमको एक तोफा दे गया है क्या तोफा दे गया है जैसे तुमने मुझे चाहा
02:12लेकिन पाया कि मैं खो गया वैसे तुम जो कुछ भी च
02:27सीख दे रहा हूं क्या है वो सीख कुछ ऐसा चाह लो जिसको मौत भी तुमसे न चीन सके शाद्ध
02:36अगर तुमको यह सिखा पाता हो तो सार्थक है शाद्ध

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