00:00हाथ दे रहे थे, क्यों दे रहे थे हाथ, हाथ देने के लिए, तुम गलत जगों पर हाथ क्यों देते
00:06हो
00:08आचार्य जी, कोई वैक्ती या मजला दुख में हो, और दया के खातिर हाथ दु हाथ पकड़ने के लिए तो
00:13पचर पकड़ लिए
00:18शायरी मत करो
00:21थोड़ा सा अग्दम
00:23शायरी प्तान लगे में हाँ दे रहा था उसने मेरा दुपट्टा पकल डिया
00:28मत
00:34यह कमपैशन है
00:37और मैं गवारे बिचारे का गलत हो के सारा है तर बिचे सारा
00:43भवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राजकुमर और कुछ नहीं है
00:50सानुबूती चाहिए
00:52हाथ दे रहे थे क्यों दे रहे थे हाथ हाथ देने के लिए हाथ यो देरने के लिए
01:00तुम गलत जगों पर हाथ क्यों देते हो बांद के रखो ऐसे हाथ को
01:10माफी, करुणा, संवेदना, सहानुभूती ये बड़ी बड़ी बातें
01:14अक्कुल मिला के मामला कितना है भाई को हाथ देना था वो
01:20अब देवदास वनना है
01:23करुणा का अर्थ है दुखी को दिखा देना कि उसका दुख जूठा है
01:29हर दुख में कहानी होती है ऐसा हुआ फिर ऐसा हुआ फिर ऐसा हुआ वो कहानी कभी भी सच्ची होती
01:35है
01:36अभी जिधर को हाथ बढ़ा रहे थे अगर उधर से सवाल करूँ कि क्या था
01:39तो हो सकता है पता चले कि हाथ तो था पर हाथ में खंजर था
01:43तुम उसको करवना की जगह दया या सहानुभूति दोगे,
01:47तो तुम उसको यही तो बता रहा हुगिए तो तीरा दुख सच्चा है!
01:50और दुख अगर सच्चा है तो दुख क्यों छूटे?
01:52दुख तो एक ही दशा में छूटेगा
01:54कि तुम दिखा दो उसको की तेरा दुख ही जूटा है
01:58लग रही है तुम
02:00मामला वेखते गाई
02:01भाई गुज़रा है
02:04दिल पर जखम खागा