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  • 9 minutes ago
कैंसर की जीवन रक्षक दवाओं की मनमानी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने एक चौंकाने वाला आंकड़ा रखा गया. कोर्ट को बताया गया कि कैंसर की एक अहम दवा का रिटेल प्राइस (PTR) मात्र 2,700 रुपये है, लेकिन उसकी MRP 27,000 रुपये तय की गई है. कीमत में इस 10 गुना अंतर पर कड़ी टिप्पणी करते हुए बेंच ने पूछा कि दवाओं की MRP पर उचित सीमा क्यों नहीं होनी चाहिए?सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि महंगे इलाज का खर्च जुटाने के लिए मरीजों को अपने घर और गहने तक बेचने पड़ जाते हैं. इस पर केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने आश्वासन दिया है कि मौजूदा प्राइसिंग सिस्टम को कोर्ट के सामने रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसमें सुधार किया जाएगा.

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00:28cancer
00:29कि MRP पर उचित सीमा क्यों नहीं होनी चाहिए और दवाओं की कीमत तै करने की विवस्था को और प्रभावी
00:38क्यों ना बनाया जाए
00:39सुनवाई के दोरान कोट ने कहा कि कई मरीज इलाज का खर्च जुटाने के लिए घर और गहने तक बेच
00:46देते हैं
00:47बेंच ने दवाओं को किफायती बनाने और मरीजों पर आर्थिक बोज कम करने की जरूरत पर जोर दिया
00:54आयुश्मान भारत जैसी सरकारी स्वास्त योजनाओं के तहत दवाओं की कीमत और सरकार की ओर से होने वाले भुकतान के
01:01बीच अंतर को लेकर भी कोट में सवाल उठे
01:05केंदर की ओर से एडिशनल सॉलिस्ट जनरल के एम नटराजन ने कहा कि मौजूदा प्राइसिंग मकैनिजम कोट के सामने रखा
01:13जाएगा और जरूरत पढ़ने पर सुधार की जाच की जाएगी
01:17प्यूरो रिपोर्ट एटीवी भारत

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