00:00आखेंतार ग्रीन लाइंड अमेरिका का हो ही जया। एक हबर सोशल मेडिया पर आग की तरह फैल रही है।
00:05महेलों तक चली सेने धबकियों और अंतराष्ठी तनाव के बाद अमेरिका, देन्मार्क और ग्रीन लाइंड के बीच एक बखुत बड़ा
00:13सुरक्ष्रा समझोता फाइनल हो गया है।
00:15ट्रॉप भले ही ग्रीन लाइंड को खरीदे या उस पर जबरण कबजा करने का दावा ठोक रहे थे। लेकिन इस
00:20नए समझोते के बाद ग्रीन लाइंड की जवीन और सब प्रभुता पूरी तरह से देन्मार्क के पास ही रहेगी।
00:26ब्रीनलाइंड ना विका है ना अमेरिका का हिस्सा बना। लेकिन फिर ट्रॉप इसे अपनी सबसे बड़ी जीत क्यूं बता रहे।
00:33डन्वाक की प्रुधान मंतरी मेटे फ्रेडरिक सन और ग्रीन लाइन के प्रुधान मंतरी जेंस फ्रेडरिक दिलसर देसाफ शब्दों में कह
00:40दिया है कि ग्रीन लाइन के लोगों का आत्म दिर्मे का अधिकार और उनकी देश की प्रादेशिक अखंडता पूरी तरह
00:46से महफ�
01:03के आसमान से लेकर उसकी जमीन की नीचे तब एक हजानी तक एक तरफा और इस थाई सेने ने इंटरंट
01:09मिल चुका है जी हाँ अमेरिका ने बिना एक भी रुपए खर्श किये वो सब हासल कर लिया है जिसके
01:14लिए वो महीनों से दबाव बना रहा था अमेरिके विदेश मंत्र
01:17चाले के अधिकारे और ट्रम्प के बयानों के मताबिक इस नहीं समझाते की टीम सबसे खतरनाप और बड़ी शर्ते तैकी
01:23गई है पहला निए आसे में सेने ताक अमेरिका को अब डिन्मार्क और ग्रीनलांड से बार बार इजाज़त मांगने के
01:29जरुरत नहीं होगी अमेरि
01:45रूस और चीन के लिए नो एंट्री इस दिल की सबसे कड़ी शर्ति है कि गयर नाटू देश विशेश का
01:50रूस और चीन ग्रीनलांड में पैर भी नहीं रख सकते हैं ना तो रूस और चीन ग्रीनलांड में कोई सेने
01:56अड़ा बना सकते हैं और नाहीं अमेरिका के लिखित ब
02:20अब आपके मैं में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर बस की मूटी चादर में लिप्ता ये सुन साल भूई
02:25अमेरिका के लिए इतना ज्यादा एहन क्यों ट्रॉप इसके लिए पूरे नाटो गद्बंदन को दाव पर लगाने के लिए क्यों
02:30तल्याग हो गए थी इसके पीछे
02:44समय से ही इसे उतरी अमेरिका की सुरक्षा की ढाल माना जाता है
02:471951 में अमेरिका और डेंबाक के बीच हुए सुरक्षा समझोते के बाद अमेरिका ने ग्रीन लांड के उतर पश्चिनी इससे
02:53में अपना मशूर पिटुफिक स्पेस बेस बनाया था
02:56आज वहां अमेरिका के सेक्डों सेनिक तैनाथ है जो मिसाइल अटाक की चेतावनी मिसाइल डिफेंस और स्पेस सर्विलांस का काम
03:03करते है
03:03ट्रॉम का dream project है golden dome defense system
03:06ट्रम्प अमेरिका को रूस और चीन की हाइपर सॉनिक और बालस्टिक मिसाइलों से बचाने के लिए एक अभेद सुरक्षा कवच
03:13बना रहे है
03:13और उस कवच की सबसे मजबूत कड़ी ग्रीलाइड ही है
03:17दूसरी सबसे बड़ी वज़ा है ग्रीलाइड की बर्फ के नीचे दबा अकूत खजाना
03:21ग्रीलाइड में दुलर्ब खनी जो यानिकी रेर आर्थ मिट्रेल्स का दिन्या का सबसे बड़ा अपरिक्त भंडार मौझूद है
03:28आपके हाथ में मौझूद स्मार्टफोन से लेकर फाइडर जेट्स, काइड़न मिसाइलियों और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बाटरी बनाने तक इन सबी
03:34अत्यादुनिक तक्मीकों के लिए इन ही दो लर्ब खरी जो के जरुबत होती है
03:38फिलाल इस ग्लोबल वाकेट पर चीन का एक छत्र राज ट्रॉप जाते थे कि अगर ग्रीन लाइन में चीन ने
03:44अपने पैसे के दम पर माइन्स या प्रोजेक्स खरी दिए तो अमेरिका की टेक और डिफेंस इंडस्ट्री चीन की गुलाम
03:50बन कर है जाएगी
03:51इसलिए समझोते में साफ लिखवा दिया गया है कि बिला वाशिंटन के एलेउसी के चीन ग्रीन लाइन की जम्नीन को
03:57छूबी नहीं सकता
03:58लेकिन जरा सोचे इस समझोते तक पहुचने का रास्ता कितना दल्दनाग था
04:03पशले कई महीन उसे ट्रम्प लगतार बयान दे रहे थे कि ग्रीन लाइन अमेरिका के सुरक्षा के लिए जरूरी है
04:07और वो इसे किसी भी कीमत पर हासल करके रहेंगी
04:11उलोई यहां तक कहने से पर ही सही किया कि अगर प्यार से बात नहीं की तो वो सेने बल
04:16यानि के मिलिटरी फोर्स का इस्तेमाल करके ग्रीन लाइन पर कबजा कर लेंगी
04:19ट्रम्प की इस धंकी ने पुरे यूरोप और टाटो गटभग दवे खलबली बचा दी थी
04:24ट्रम्प में बार बार कहा कि ग्रीन लाइन बिकने के लिए नहीं है लेकिन ट्रम्प का दवाव इतना बढ़ गया
04:30था कि यूरोपे देशों को जंग का दर सताने लगा था
04:34आखिरकार डेन्मार्क और ग्रीन लाइन ने कुवनितिक रास्तर से अमेरिका के सुरक्षा चंताओ को तो मान दिया लेकिन अपनी संप्रभूता
04:39का सौधा नहीं किया
04:41तो अब आगे क्या होने वाला है अगले हफ्ते न्यू यॉक में यूइन जनरल असेमली की बहुत बड़ी बैठक होने
04:47जा रहे है
04:47इसी बैठक के दौरान अमेरिका, डेन्मार्क और ज्रीन लाइन के सरकारे इस त्रीस तर्य सुरक्षा समझाते पर आधिकारिक रूप से
04:53हस्ताक्षर करेंगी
04:54लेकिन रुखे, कहानी में अभी भी एक बढ़ा पेच पाकी है
04:58साइन भले ही हो जाए, लेकिन इस देल को कानून की शकल देने के लिए डेन्मार्क की संसद और ग्रीन
05:03लाइन की संसद से मंजोरी मिलना अनिवार है
05:05पर असलिए वारूत की सुरंग यहीं बिच्छी हुई है
05:07कार्जोग पर तो ऐसा लग रहा है कि ट्रम्प ने बिना जंग लड़े पूरी बाजी मानी है
05:11एकि सवाल यह है कि क्या डेन्मार्क की संसद अपने देश की भीतर अमेरिका को बिना किसी रोक टोक के
05:17मिलिटरी बीस बनाने और मनमानी करनी के इजाज़त दिन गे
05:19कि ग्रीनलांड की जुनता इस एक तरफा कंट्रोल को सुईकार करेगी
05:24और सबसे बड़ा सवाल अगर देन्मार्क या ग्रीनलांड के संसर ने समझोते को खारच कर दिया
05:29तो क्या परपाड़ू हथियारों से लेस अमेरिका चुप चाप पीछे हट जाएगा
05:34या फिर डॉनलाड ट्रफ अपने उसी पुरानी खौफना घंकी पर लोटाएंगे
05:37कि ग्रीनलांड पर कबजा सीना के दम पर होगा
05:41आतिक कि इस बरफ में छिडी कोटनी तिक जब अभी खत नहीं होई है
05:44इस पर हमारे पेने गज़र बनी होई है
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