Skip to playerSkip to main content
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच कथित नए सुरक्षा समझौते ने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया जा रहा है, लेकिन क्या सच में ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बन गया है? इस रिपोर्ट में समझिए कि प्रस्तावित समझौते में अमेरिका को किस तरह की सैन्य और रणनीतिक पहुंच मिलने की बात कही जा रही है और ग्रीनलैंड की संप्रभुता का क्या होगा। रूस और चीन की मौजूदगी, दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार, पिटुफिक स्पेस बेस और अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत भी चर्चा में है। साथ ही जानिए, ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर इतने आक्रामक क्यों रहे और डेनमार्क-ग्रीनलैंड ने अपनी संप्रभुता को लेकर क्या रुख अपनाया है। क्या संसदों की मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होगा या इसके सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी होंगी? पूरी कहानी जानिए इस रिपोर्ट में।

The reported new security agreement between the United States, Denmark and Greenland over Greenland has sparked a major geopolitical debate. Social media is portraying it as a big victory for the US, but has Greenland really become part of America? This report explains the military and strategic access reportedly being sought by the US and what the deal could mean for Greenland’s sovereignty. Greenland’s strategic importance for Russia and China, its vast reserves of rare minerals, the Pituffik Space Base, and Trump’s Golden Dome missile defense system are also examined. The report also looks at why Trump has been so aggressive about Greenland and how Denmark and Greenland have responded to concerns over their sovereignty. Will the agreement come into effect after approval by the Danish and Greenlandic parliaments, or could new political challenges emerge? Watch the full report to understand the geopolitical battle unfolding over Greenland.

#TrumpGreenland #DonaldTrumpGreenland #GreenlandSecurityDeal #USDenmarkGreenlandAgreement #TrumpDenmarkAgreement #GreenlandMilitaryDeal #GreenlandSecurityAgreement

Category

🗞
News
Transcript
00:00आखेंतार ग्रीन लाइंड अमेरिका का हो ही जया। एक हबर सोशल मेडिया पर आग की तरह फैल रही है।
00:05महेलों तक चली सेने धबकियों और अंतराष्ठी तनाव के बाद अमेरिका, देन्मार्क और ग्रीन लाइंड के बीच एक बखुत बड़ा
00:13सुरक्ष्रा समझोता फाइनल हो गया है।
00:15ट्रॉप भले ही ग्रीन लाइंड को खरीदे या उस पर जबरण कबजा करने का दावा ठोक रहे थे। लेकिन इस
00:20नए समझोते के बाद ग्रीन लाइंड की जवीन और सब प्रभुता पूरी तरह से देन्मार्क के पास ही रहेगी।
00:26ब्रीनलाइंड ना विका है ना अमेरिका का हिस्सा बना। लेकिन फिर ट्रॉप इसे अपनी सबसे बड़ी जीत क्यूं बता रहे।
00:33डन्वाक की प्रुधान मंतरी मेटे फ्रेडरिक सन और ग्रीन लाइन के प्रुधान मंतरी जेंस फ्रेडरिक दिलसर देसाफ शब्दों में कह
00:40दिया है कि ग्रीन लाइन के लोगों का आत्म दिर्मे का अधिकार और उनकी देश की प्रादेशिक अखंडता पूरी तरह
00:46से महफ�
01:03के आसमान से लेकर उसकी जमीन की नीचे तब एक हजानी तक एक तरफा और इस थाई सेने ने इंटरंट
01:09मिल चुका है जी हाँ अमेरिका ने बिना एक भी रुपए खर्श किये वो सब हासल कर लिया है जिसके
01:14लिए वो महीनों से दबाव बना रहा था अमेरिके विदेश मंत्र
01:17चाले के अधिकारे और ट्रम्प के बयानों के मताबिक इस नहीं समझाते की टीम सबसे खतरनाप और बड़ी शर्ते तैकी
01:23गई है पहला निए आसे में सेने ताक अमेरिका को अब डिन्मार्क और ग्रीनलांड से बार बार इजाज़त मांगने के
01:29जरुरत नहीं होगी अमेरि
01:45रूस और चीन के लिए नो एंट्री इस दिल की सबसे कड़ी शर्ति है कि गयर नाटू देश विशेश का
01:50रूस और चीन ग्रीनलांड में पैर भी नहीं रख सकते हैं ना तो रूस और चीन ग्रीनलांड में कोई सेने
01:56अड़ा बना सकते हैं और नाहीं अमेरिका के लिखित ब
02:20अब आपके मैं में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर बस की मूटी चादर में लिप्ता ये सुन साल भूई
02:25अमेरिका के लिए इतना ज्यादा एहन क्यों ट्रॉप इसके लिए पूरे नाटो गद्बंदन को दाव पर लगाने के लिए क्यों
02:30तल्याग हो गए थी इसके पीछे
02:44समय से ही इसे उतरी अमेरिका की सुरक्षा की ढाल माना जाता है
02:471951 में अमेरिका और डेंबाक के बीच हुए सुरक्षा समझोते के बाद अमेरिका ने ग्रीन लांड के उतर पश्चिनी इससे
02:53में अपना मशूर पिटुफिक स्पेस बेस बनाया था
02:56आज वहां अमेरिका के सेक्डों सेनिक तैनाथ है जो मिसाइल अटाक की चेतावनी मिसाइल डिफेंस और स्पेस सर्विलांस का काम
03:03करते है
03:03ट्रॉम का dream project है golden dome defense system
03:06ट्रम्प अमेरिका को रूस और चीन की हाइपर सॉनिक और बालस्टिक मिसाइलों से बचाने के लिए एक अभेद सुरक्षा कवच
03:13बना रहे है
03:13और उस कवच की सबसे मजबूत कड़ी ग्रीलाइड ही है
03:17दूसरी सबसे बड़ी वज़ा है ग्रीलाइड की बर्फ के नीचे दबा अकूत खजाना
03:21ग्रीलाइड में दुलर्ब खनी जो यानिकी रेर आर्थ मिट्रेल्स का दिन्या का सबसे बड़ा अपरिक्त भंडार मौझूद है
03:28आपके हाथ में मौझूद स्मार्टफोन से लेकर फाइडर जेट्स, काइड़न मिसाइलियों और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बाटरी बनाने तक इन सबी
03:34अत्यादुनिक तक्मीकों के लिए इन ही दो लर्ब खरी जो के जरुबत होती है
03:38फिलाल इस ग्लोबल वाकेट पर चीन का एक छत्र राज ट्रॉप जाते थे कि अगर ग्रीन लाइन में चीन ने
03:44अपने पैसे के दम पर माइन्स या प्रोजेक्स खरी दिए तो अमेरिका की टेक और डिफेंस इंडस्ट्री चीन की गुलाम
03:50बन कर है जाएगी
03:51इसलिए समझोते में साफ लिखवा दिया गया है कि बिला वाशिंटन के एलेउसी के चीन ग्रीन लाइन की जम्नीन को
03:57छूबी नहीं सकता
03:58लेकिन जरा सोचे इस समझोते तक पहुचने का रास्ता कितना दल्दनाग था
04:03पशले कई महीन उसे ट्रम्प लगतार बयान दे रहे थे कि ग्रीन लाइन अमेरिका के सुरक्षा के लिए जरूरी है
04:07और वो इसे किसी भी कीमत पर हासल करके रहेंगी
04:11उलोई यहां तक कहने से पर ही सही किया कि अगर प्यार से बात नहीं की तो वो सेने बल
04:16यानि के मिलिटरी फोर्स का इस्तेमाल करके ग्रीन लाइन पर कबजा कर लेंगी
04:19ट्रम्प की इस धंकी ने पुरे यूरोप और टाटो गटभग दवे खलबली बचा दी थी
04:24ट्रम्प में बार बार कहा कि ग्रीन लाइन बिकने के लिए नहीं है लेकिन ट्रम्प का दवाव इतना बढ़ गया
04:30था कि यूरोपे देशों को जंग का दर सताने लगा था
04:34आखिरकार डेन्मार्क और ग्रीन लाइन ने कुवनितिक रास्तर से अमेरिका के सुरक्षा चंताओ को तो मान दिया लेकिन अपनी संप्रभूता
04:39का सौधा नहीं किया
04:41तो अब आगे क्या होने वाला है अगले हफ्ते न्यू यॉक में यूइन जनरल असेमली की बहुत बड़ी बैठक होने
04:47जा रहे है
04:47इसी बैठक के दौरान अमेरिका, डेन्मार्क और ज्रीन लाइन के सरकारे इस त्रीस तर्य सुरक्षा समझाते पर आधिकारिक रूप से
04:53हस्ताक्षर करेंगी
04:54लेकिन रुखे, कहानी में अभी भी एक बढ़ा पेच पाकी है
04:58साइन भले ही हो जाए, लेकिन इस देल को कानून की शकल देने के लिए डेन्मार्क की संसद और ग्रीन
05:03लाइन की संसद से मंजोरी मिलना अनिवार है
05:05पर असलिए वारूत की सुरंग यहीं बिच्छी हुई है
05:07कार्जोग पर तो ऐसा लग रहा है कि ट्रम्प ने बिना जंग लड़े पूरी बाजी मानी है
05:11एकि सवाल यह है कि क्या डेन्मार्क की संसद अपने देश की भीतर अमेरिका को बिना किसी रोक टोक के
05:17मिलिटरी बीस बनाने और मनमानी करनी के इजाज़त दिन गे
05:19कि ग्रीनलांड की जुनता इस एक तरफा कंट्रोल को सुईकार करेगी
05:24और सबसे बड़ा सवाल अगर देन्मार्क या ग्रीनलांड के संसर ने समझोते को खारच कर दिया
05:29तो क्या परपाड़ू हथियारों से लेस अमेरिका चुप चाप पीछे हट जाएगा
05:34या फिर डॉनलाड ट्रफ अपने उसी पुरानी खौफना घंकी पर लोटाएंगे
05:37कि ग्रीनलांड पर कबजा सीना के दम पर होगा
05:41आतिक कि इस बरफ में छिडी कोटनी तिक जब अभी खत नहीं होई है
05:44इस पर हमारे पेने गज़र बनी होई है
Comments

Recommended