Skip to playerSkip to main content
यमन से निकला हूती संगठन आज पश्चिम एशिया की बड़ी सैन्य ताकतों के लिए चुनौती बन चुका है। ड्रोन, मिसाइल और समुद्री हमलों के जरिए हूती कैसे अपनी युद्ध रणनीति चलाते हैं? सऊदी अरब के साथ उनका संघर्ष कैसे शुरू हुआ और लाल सागर व बाब अल-मंदेब क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं? मक्का के करीब हूती ड्रोन को मार गिराए जाने की खबर के बाद बढ़े तनाव को भी समझिए। इस वीडियो में हूती संगठन का इतिहास, सैन्य क्षमता, ईरान से संबंध, सऊदी अरब से संघर्ष, लाल सागर में हमले और बदलती रणनीति को आसान भाषा में समझाया गया है। देखिए पूरी रिपोर्ट।

Who are the Houthis, and how have they transformed from a local Yemeni movement into a powerful armed group capable of using drones, missiles and maritime attacks? In this video, we explain the Houthi war strategy, their long-running conflict with Saudi Arabia, their presence around the Red Sea and Bab al-Mandeb Strait, and the allegations surrounding Iranian support. We also examine the reported interception of a Houthi drone near Mecca and the competing claims surrounding the incident. From Yemen’s mountains to one of the world’s most important shipping routes, understand why the Houthis have become a major factor in the wider Middle East conflict.

#Houthis #Houthi #Yemen #SaudiArabia #RedSea #BabAlMandeb #Iran #US #Missile #Drone

~HT.410~PR.540~ED.108~GR.538~VG.HM~

Category

🗞
News
Transcript
00:00एक तरफ आसमान में ड्रोन, दूसरी तरफ मिसालों की गूंज और बीच में यमन का ऐसा इलाका जहां से निकली
00:07एक छोटी सी ताकत पूरे पश्चिमेशिया की तस्वीर बदल सकती है
00:11नाम है हूटी, यमन के पहाडों से निकला ये संगठन आज सिर्फ यमन की लडाई तक सीमित नहीं है
00:18सौधी अरब, लाल सागर और बाब अलमंदेब जैसे बेहत एहम इलाकों में इसकी गजविदियों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी
00:26तरफ खीच लिया है
00:27और अब मक्का के करीब हूती ड्रोन को मार गिराये जाने की खबर ने इस तनाव को और बढ़ा दिया
00:34है
00:34सौधी नित्रत वाले गटबंधन के मताबिक ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई छेत्र में पहुचने से पहले नश्ट कर दिया गया
00:41हूतीयों ने हाला की मक्का या धार्मिक अस्थलों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार कर दिया है
00:48लेकिन सवाल है कि आखिर ये हूती है कौन और सबसे बड़ा सवाल ये कि इनके पास ऐसी कौन सी
00:54ताकत है
00:55जिसके कारण बड़े बड़े देशों को भी इन से निपटने के लिए अपनी रणिती बदलनी पड़ती है
01:01कहानी शुरू होती है यमन से हुती आंदोलन को अपचारिक रूप से अंसार अल्लाह कहा जाता है
01:07इसकी जड़े उत्री यमन के जायदी शिया समधाय से हैं
01:11लंबे समय तक ये एक अस्थानी राजनीतिक और धार्मिक आंदोलन रहा है
01:16लेकिन यमन की राजनीतिक आस्थिर्ता ने इसे धीरे धीरे एक बड़े सैन संगठन में बदल दिया
01:232014 में यमन की राजधानी सना पर हूतीयों ने कबजा कर लिया
01:27इसके बाद देश की सक्ता का संगर्ष खुली लड़ाई में बदल गया
01:31एक तरफ हूती थे और दूसरी तरफ अंतराश्टी अस्तर पर मानिता प्राप यमन की सरकार और उसके समर्थ
01:38इसके ठीक बाद 2015 में सौधी अरब ने दूसरे अरब देशों के साथ मिलकर हूतीयों के खिलाफ सैन अभियान शुरू
01:46कर दिया
01:47यहीं से यमन की लड़ाई ने नया रूप ले लिया
01:50सौधी गडबंधन के पास आदुनिक लड़ाकू विमान थे, बड़े सैन संसाधन थे और हवाई हमले करने की छमता भी थी
01:57लेकिन हूतीयों ने सीधे उसी तरीके से लड़ने के बजाए अपनी रणिती बदल दी
02:03हूती लड़ाकों ने सौधी अरप और संयुक्त अरप अमीरात के तेल ठीकानों और दूसरे एहम जगहों को निशाना बनाने के
02:10लिए
02:10मिसाईलों और ड्रोन का इस्तिमाल किया इरान पर हूतीयों को हथियार पशिक्षण और आर्थिक मदद देने के आरोब लगते रहे
02:18हैं
02:19हाला कि हूती खुद को इरान का प्रॉक्सी मानने से इंकार करते हैं और कहते हैं कि वे अपने हथियार
02:26खुद विक्सित करते हैं
02:27यानि हूतियों की ताकत सिर्फ उनके लड़ाकों की संख्या में नहीं है उनकी असली ताकत उनकी युद्ध शैली में है।
02:35कम लागत वाले ड्रोन से लेकर लंबी दूरी की मिसाइलों तक हूती ऐसे हथियारों का इस्तमाल करते हैं जिन्हें रोकने
02:42के लिए सामने वाले को कहीं जादा महेंगे एर डिफेंस सिस्टम लगाने पड़ते हैं।
02:47यही वज़ा है कि कई बार एक सस्ता ड्रोन भी सामने वाले देश को उसे रोकने के लिए महेंगी मिसाइल
02:54इस्तमाल करने पर मजबूर कर सकता है।
02:56और फिर आता है समुद्र।
02:58लाल सागर और बाव अलमंदे ये सिर्फ नक्षे पर मवजूद दो जगहों के नाम नहीं है।
03:03बाव अलमंदे दुनिया के सबसे एहम समुद्री रास्तों में से एक है।
03:07यूरोप और एशिया के बीच आने जाने वाले जहाजों के लिए ये रास्ता बेहद ही महत्पूर है।
03:132023 के अंत में गजा युद्ध के बीच हूतियों ने लाल सागर में अंतराश्टे जहाजों पर हमले शुरू किये।
03:20हूतियों ने इसे फिलिस्तीनियों के समर्थन में उठाया गया कदम बताया।
03:24इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन में हूति ठिकानों पर हमले किये और कई अंतराश्टे कमपनियों ने लाल सागर
03:32का रास्ता छोड़ कर अफ्रीका के दक्षडी छोड़ से लंबा रास्ता अपनाना शुरू कर दिया।
03:37और 2026 में कहानी फिर बदल जाती है।
04:02के और भी करीब पहुचते जा रहे हैं।
04:24गायल भी हुए हैं।
04:26इसके जवाब में सौधी अरब ने यमन में हूति ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिये हैं।
04:31और इसी तनाव के बीच मक्का का मामला भी सामने आया है।
04:35सौधी नित्रत्वाले गडबंधन का कहना है कि मक्का के दक्षण में एक हूति ड्रोन को रोका गया।
04:41गडबंधन ने इसे पवित्र शहर की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
04:46उसने इसे 2017 में मक्का की और बैलेस्टिक मिसाइल दागे जाने के आरोप के बाद दूसरी ऐसी कोशिश बताया है।
04:54दूसरी तरफ हूतियों ने मक्का या किसी धार्मिक स्थल को निशाना बनाने से इनकार कर दिया है।
04:59यही अंतर इस पूरे मामले को और भी पेचीदा बनाता है।
05:03हूति कहते हैं कि उनकी लड़ाई यमन पर होने वाले हमलों के खिलाफ है।
05:08सौधी अरब और उसके सहयोगी हूतियों को छेत्रिय सुरक्षा के लिए बड़ा खत्रा मानते हैं।
05:14इरान पर हूतियों के समर्थन का आरोप लगता है जबकि इरान सीधे नियंतरण की बात से इनकार करता रहा है।
05:21लेकिन चमीन पर एक बात और साफ दिखाई देती है।
05:24हूतियों ने पेकस्थानिय आंदोलन से ऐसी सेन ताकत का रूप ले लिया है जो मिसाइल, ड्रोन, समुद्री हमले और रणीतिक
05:33हमलों पर कबजे के जरिये अपने विरोधियों पर दबाव बना सकती है।
05:38यही कारण है कि हूतियों की कहानी अब सिर्फ यमन की कहानी नहीं रह गई है।
06:08कबजा करके खत्म की जा सके। यह पहाडों, तट्ये इलाकों, ड्रोन, मिसाइलों और समुद्र रास्तों के बीच में फैली हुई
06:16लडाई है।
06:17और जैसे जैसे हूति लाल सागर के तट और बाबल मंदेप के करीब बढ़ रहे हैं, सवाल सिर्फ यही नहीं
06:23रह गया है कि यमन में कौन जीतेगा।
06:26सवाल यह है कि अगर यह लडाई और फैली तो इसकी कीमत कौन उठाएगा। क्योंकि यहाँ दाओ सिर्फ एक देश
06:33की सीमा का नहीं है। दाओ उस समुद्री रास्ते का भी है जिससे दुनिया का कारोबार चलता है।
06:56झालता है कि झालता है।
07:00झालता है झालता है।
07:01झाल झाल
07:31झाल झाल
08:03झाल
Comments

Recommended