- 12 minutes ago
- #bricssummit2026
- #newdelhideclaration
- #pmmodi
- #donaldtrump
BRICS Summit 2026: क्या है New Delhi Declaration, जिससे घबराए Donald Trump?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों और साझा घोषणापत्र ने अमेरिका की आर्थिक प्राथमिकताओं और डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रणनीतियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है!
भारत की मेजबानी में संपन्न हुए BRICS शिखर सम्मेलन में विश्व की उभरती आर्थिक शक्तियों ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर मोहर लगाई है। इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 'न्यू दिल्ली घोषणापत्र' (New Delhi Declaration) रहा, जिसमें वैश्विक शासन सुधार, व्यापारिक पारदर्शिता, सतत विकास और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया गया।
घोषणापत्र के प्रमुख बिंदुओं में एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। इसके अतिरिक्त, डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है, जिसने अमेरिकी आर्थिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ब्रिक्स देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनियों के बीच, यह सम्मेलन यह दर्शाता है कि ग्लोबल साउथ के देश अपनी आर्थिक संप्रभुता के लिए एकजुट हो रहे हैं। जानिए इस रिपोर्ट में कि नई दिल्ली घोषणापत्र में कौन-कौन से बड़े फैसले हुए हैं और अमेरिका व पश्चिम के देशों के लिए इसके क्या मायने हैं।
About the Story:
The BRICS Summit concluded with the historic adoption of the New Delhi Declaration, outlining key decisions on trade, local currency adoption, and global governance reform. As BRICS nations strengthen economic integration, concerns have arisen in the US, with Donald Trump warning against moves that weaken the US Dollar dominance. This video breaks down the core outcomes of the summit and their geopolitical impact.
#BRICSSummit2026 #NewDelhiDeclaration #PMModi #DonaldTrump
~PR.514~HT.408~GR.538~VG.HM~
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों और साझा घोषणापत्र ने अमेरिका की आर्थिक प्राथमिकताओं और डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक रणनीतियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है!
भारत की मेजबानी में संपन्न हुए BRICS शिखर सम्मेलन में विश्व की उभरती आर्थिक शक्तियों ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर मोहर लगाई है। इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 'न्यू दिल्ली घोषणापत्र' (New Delhi Declaration) रहा, जिसमें वैश्विक शासन सुधार, व्यापारिक पारदर्शिता, सतत विकास और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया गया।
घोषणापत्र के प्रमुख बिंदुओं में एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। इसके अतिरिक्त, डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है, जिसने अमेरिकी आर्थिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ब्रिक्स देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनियों के बीच, यह सम्मेलन यह दर्शाता है कि ग्लोबल साउथ के देश अपनी आर्थिक संप्रभुता के लिए एकजुट हो रहे हैं। जानिए इस रिपोर्ट में कि नई दिल्ली घोषणापत्र में कौन-कौन से बड़े फैसले हुए हैं और अमेरिका व पश्चिम के देशों के लिए इसके क्या मायने हैं।
About the Story:
The BRICS Summit concluded with the historic adoption of the New Delhi Declaration, outlining key decisions on trade, local currency adoption, and global governance reform. As BRICS nations strengthen economic integration, concerns have arisen in the US, with Donald Trump warning against moves that weaken the US Dollar dominance. This video breaks down the core outcomes of the summit and their geopolitical impact.
#BRICSSummit2026 #NewDelhiDeclaration #PMModi #DonaldTrump
~PR.514~HT.408~GR.538~VG.HM~
Category
🗞
NewsTranscript
00:00यहाँ पर सबसे सरूरी मेसेज यह जा रहा है कि अगर अमेरिका यह समझता है कि वो सिर्फ इकलोता पावरफुल
00:07है पूरी दुनिया में तो अमेरिका को यह समझने की गलती नहीं करने चाहिए
00:12इरान वार के बीच भारत में ब्रिक्स का होना इरान के प्रेसिडेंट पेजशियन का भारत में पहुँचना युद के बीच
00:20में भी उनका यहाँ पर शिर्कत करना प्रधान मंत्री मोदी के साथ उनकी जो तमाम तस्वीरे हैं वो सामने आना
00:28दुनिया को एक मिसेज जरूर दे
00:42बारत मंडपम पठ्टि की हुई है विट समीट चल रहा है यह आप सबको मालूम है लेकिन अठारवे ब्रिक्स समिट
00:50में भारत में अब तक क्या-क्या हुआ है और कौन-कौन से नेता मौजूद है ऐसा क्या हुआ है
00:59कि अमेरिका भी घबर आया हुआ है तो सब को जानने के �
01:04लिए One India आज आप सब के सामने एक बार फिर मौजूद है सारी डीडेल्स के साथ और आज का
01:10लाइब बेहद ही महतोपुन और
01:13इंट्रेस्टिंग होने वाला है हम आपको बताएंगे कि कल क्या क्या हुआ आज क्या क्या होने वाला है इस ब्रिक
01:20समिट का मेसेज क्या रहने वाला है दुनिया इसको कैसे देखती है और भारत के लिए कितना इंपॉर्टेंट होने वाला
01:27है और यूएस इरान वार के बीच य
01:42से हमारे रिपोर्टर भी जुडने वाले हैं तो बस कुछी मिंटों में हम लाइव का जो पूरा सारन है आपके
01:49साथ शेडियूल के साथ सब कुछ श्यर करेंगे सबसे पहले मेरा नमस्कार स्विकार कीजिए मैं हो रिचा और आप देखना
01:56शुरू कर चुके हैं वन इंडिया ह
01:59ब्रिक्स के बारे में थोना सा डीटेल्स और दे दू आपको ब्रिक्स में पहले सिर्फ चार देश होते थे बी
02:06आर आई सी के था यह ब्रिक था बाद में इसमें साउथ ऐफरिका एड़ हुआ तो यह ब्रिक्स बना लेकिन
02:13अगर आप सबको लगता है कि ब्रिक्स में सिर्फ
02:26मेंबर्स हैं ब्रिक्स की यानि कि साउथ एशिया साउथ का
02:30ग्लोबल पावर और अमेरिका को क्या में से जा रहा है भारत से भारत
02:37के मंच से यह सब कुछ आज डिसकुशन करने वाले हैं हमारे साथ
02:41ग्राउन से मौझूद है श्रिवेंद्र गौड जी जो कि भारत मंडपम के पास ही है भारत
02:47मंडपम में है और श्रिवेंद्र जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है सुबह-सुबह आप वहां
02:52बहुत चुके हैं वैसे तो कारेकरम 10 बजे के आसपास से शुरू होने वाला है और मुझे लगता है कि
02:59सवा 9 बज रहे हैं लेकिन सबसे
03:01important question में आपसे करूंगी बीती रात जो डिनर हुआ था ब्रिक्स में उस डिनर में क्या खास था क्योंकि
03:10चाहे वो ब्रिक्स हो चाहे वो G20 हो कोई भी सम्मेलन होता है डिनर की चर्चा बहुत ज्यादा होती है
03:19डिनर डिप्लमेसी की बाते सबसे ज्यादा होती है तो कल के
03:23menu में क्या खास्था कल क्या पका दिनर की बात करें तो निश्ट बे unist मेरे पास ती वह ने
03:33देखा और कि सबनना था वह तो डिनर
03:36की बात करें तो पनीर लबाब्दार गुच्ची मारमेक मिलेट फॉलाओ और कई ऐसी चीज़े थी जले भी सभ से
03:44बड़ी बात है तो यह तो खाने की बात हम करें लेकिन सबसे महत्मून जो च्छन था वो एक कही
03:49ना कहीं बिक्स पे एक कहना जी इस तरह से हम लोगों के सबाल रहते हैं पतकारों के सबाल रहते
03:55हैं या फिर और दुनिया के सबाल है उसी को इंगित करती है घटना हुई वही �
04:00घटना की डिनर में एक जो मलेशिया के पीम है अनवर इब्राहिम उन्होंने पिसोर कुमार का एक जीत गाया फ़ाब
04:08होया तुम कोई हकीकत तो जहर सी बात है बिक्स को लेके जिस तरह की पिछले काफी सालों में अठारमा
04:15ये समेलन है लेकिन हरवार ही लगता है क्या इसमे
04:30विजी� bout के साथ साथ और संसय दोनों भी दिखाता है क्योंकि जिस तरीके से दुन्या में हलाकि दश्वीर बदल
04:36रहा है कि अमेरिका जिस तरह से तैरिफ लगाता है जिस तरह से जिस देश के साथ का
04:43अपनी मनमानी अपने आप युद्ध करेगा तो कुछ नहीं अगर कहीं और है किसी के बीच कुछ होता है तो
04:48बहाँ पर उसके तमाम तरह के वो टैरिफ लगाएगा या तराम तरह के सेंक्शन लगा देगा तो जहिर सी बात
04:56है अभी तो उसकी मनमानी चलती है पश्चबी दे�
05:05तो यह सब्सक्राइब करने के लिए और उन रडीतियों के उसमें देखा जाए तो निश्चित और पर इब्रहीम का यह
05:19गाना बहुत बड़ा एक तरीके से डिप्लोमेस्य भी है संदेश भी है और बिक्स के लिए लोगों को जगाने की
05:27कोशिज भी है रिचानी जी
05:31बिल्कुल डिनर डिप्लोमेसी की बात होती है आपने सबसे खुबसूरत बताया कि जो मलेशिया के पेम थे उनका वो किशोर
05:38कुमार का गाना भारत के साथ उनके लगाओ को उनके जुडाओ को दर्शाता है और भारत जो इस वक्त पूरी
05:46दुनिया में एक बहुत ही पावर�
06:12पूरी दुनिया में तो अमेरिका को यह समझने की गलती नहीं करनी चाहिए इरान वार के बीच भारत में ब्रिक्स
06:20का होना इरान के प्रेसिडेंट पेजशियन का भारत में पहुंचना युद के बीच में भी उनका यहां पर शिरकत करना
06:28प्रधान मंत्री मोधी के साथ उनकी जो तमाम तस्वीरे हैं वो सामने आना दुनिया को एक मेसेज जरूर दे रहा
06:36है साथ ही ट्रॉम्प भी यह समझ रहे हैं कि दुनिया समझ चुकी है कि ट्रॉम्प की जो चाले हैं
06:41वो हर वक्त नहीं चलने वाली हैं
06:43शिवेंट जी आप कल भी ब्रिक्स को बहुत करीब से देख रहे थे, कल के एवेंट में बहुत सारे कारिक्रम
06:51हुए जैसे की पेर लगाने का एक कारिक्रम हुआ था, तो इस कारिक्रम के माध्यम से दुनिया को क्या संदेश
06:57दिया गया?
06:59देखे, अगर पूरे कारिक्रम को हम देखें और जिस तरह से इसको खास होते भारत में चेयर किया और उसमें
07:05बहुत समस्दारी से काम किया, डिक्रोम ऐसी जबरदस थी, रणनी थी कि उसे कहना चाहिए है, वो भी जबरदस थी,
07:11कई चीज़े हैं, सबसे पहली तो मैं बात कर�
07:26दोनों के होते हुए, दोनों ने सरसाम्मकिस विकार कर रहा sommes, सबसे बड़ी बात उसको भी तो मैं समझता हूं,
07:35दरश्कों को समझ लेना चाहिए बड़ी बड़ी बात कि उस डिक्लेशन में क्या था, इसमने सबसे बड़ी बात थी, गलोवर्ड
07:41गवर्ननैंस में रिफार्
07:44उसकी हमें छहता इसमों दिखाई जलक इसमें दिखाई दी कि उन्हें का एक प्रामिट की तरह हैं जो लोग उपर
07:50वैटे हैं वो इसे गवर्न करते हैं वो इसमें आधेश चलाते हैं वो इसमें नीतियां बनाते हैं और कानून बनाते
07:57हैं नीचे लोगों को अगर वो सही है क�
08:28छेलना पड़ता है
08:30एक बहुत महिक्पूर बात है टेररिज्म के खिलाब कोपरिशन इस पर भी जो होना हमारे लिए भेतर है तीसरी चीज़े
08:37का डालोग और डिप्लोमसी से समाधान ये मैं इसको पर रहा हूँ जो इसमें लिखा हुआ है उसके बाद यूरी
08:43लेटरल जो सैंक्संस हैं और ट्रे�
08:59और लोकल करेंसी में अगर ये होता है तो डॉलर पे डिपेंडेंसी कम होगी रचाहिए बहुत महिक्पूर बात है और
09:08इकनोमिक कॉपरेशन जैसे मुद्दे सामय लेकिन इसकी सबसे बड़ी बात ये है जो हमने जो आपने कहा जिस तरह हम
09:15लोग बात हमें पता है कि अमेरि
09:26का केंपेंड नहीं बनने दिया उसमें इसमें वह तरीक अपनाया कि वह काम तो हो डॉलर पे डिपेंडेंसी कम और
09:34यही उनसी कंशी में जो है ताकत मिले
09:37तमाम चीजह हो रिफॉर्म की बात लेकि लेकिन और उनिलेटरल और की भी बात थी anlam
09:45भी देश का नाम लेने का उसमें नहीं रखा गया तो बहुत ही समझदारी से मुद्दे उठाए गए उनको इंगित
09:55किया गया उनको वारता में लाया गया उनको डिसकसन में लाया गया लेकिन भारत के वह क्योंकि भारत का जो
10:01इंट्रेस्ट है उसमें और भारत की जो अभी त
10:14सीधा और उस तरह का संदेशनी देना जाता कि भारत के चेयर करते हुए इसको ग्रिश को और अमेरिका को
10:20सीधी सीधी को चुनोती दी जा रही है तीधी किसी तरह की धंकी या चेताबनी दी जा रही है बलकि
10:26उसने इसको बहुत समझदारी से वो मोद्दे उठाएं जो साउथ
10:42मंच नहीं बन रहा है भारत और भारत की जो डिप्लोमेसी है यह ऐसी होती है और जरूरी भी है
10:48भारत के मार्केट के लिए वर्ल के मार्केट के लिए खास करके अमेरिका के जो टैरिफ्स के एलान होते है
10:53भारत पर इसको देखते हुए भारत की जो स्ट्राटेजी है वो सही
10:56लेकिन शिवेंद्र जी भारत में समय रूस चीन इरान यह जो तीन बड़े देश के जो राष्ट्रा ध्यक्षा हैं इस
11:07समय मौजूद हैं तो इससे कुछ तो मैसेज जा रहा होगा अमेरिका को
11:14मैसेज साफ है मैसेज कड़ा है लेकिन यही डिप्लोमेशी है कि हम सब्दों का चैन और किलियर ऐसा दा हो
11:23कि कोई कहे इसका आपने जो है सीदे सीदे बिरूद किया भारत में लेकिन भारत के सामने कुछ और रूस
11:28से अतनी दिक्कत नहीं थी रूस का जो चीजे हमारे बहुत �
11:31बढ़िया संबन है हमाई सी लेकिन अब यहां पर जिस ब्रिक्स में भारत है उसमें सबसे बड़ी जो चिंता होती
11:37है भारत को और आखर भी हो सकती है भविस्ट में लेकिन जो चीन है चीन की मौझूदगी चीन से
11:44जिस तरह के रिष्टे है उसमें कहीं ना कहीं एक संदे हम
11:48इसा बना रहता है हाला कि कल जिस तरह से शी जिंपिन ने जो बाते कहीं है उनकी जो बड़ी
11:53बड़ी बाते मैंने कुछ चार पॉइंट निकाले है रिचा उसमें से जो मुझे लगे यह बहुत जरूरी है तबसे पड़ी
11:59बात तो उन्होंने जो पॉइंट रखे हैं उनका �
12:01दोनों देशों की जो रणनीतिक रिलेरिस्टे हैं उनको जो है लॉंग टर्म नजरिये से देखना चाहिए आप चाहिए यह बात
12:07कई बार कहता है दूसरी बात ट्रेट डारेक्ट फ्लाइट और पीपल टूपीपल एक्सचेंज बढ़ाने चाहिए एक फ्लाइट जो है ग�
12:27बात कहिए जो भारत मिकादा है बाता है अब चायना इस पर कितना आगे लगा रहता है चायना भी हर
12:34कदम अमेरिका से जस्तरह के उसके से बाइब मुझे तो इसपय दबाव में या जो दूनिया की चीज़ जब भारत
12:41से नज़्य की भी चाहता है और अपना काम भीम तो उस
12:57प्रिक्स, UN, SC और G20 में भी ज़्यादा दोनों को भारत और चाइना दोनों की बात करता है जो जी
13:06जिंपिंग है वो कह रहे हैं दोनों देशों का कॉड़नेशन ज़्यादा होना चाहिए करना चाहिए लेकिन यहां पर मैं रिचा
13:13जो बात कहूंगा मोदी ने भी यहां पर एक
13:27शाहिद हम सब के मन की बात कही है जो उनके दिमात में भी थी हमारे दिमात में भी थी
13:31साहिद बही होई देश संकेट दिया है कि उन्हें का
13:49है कि यह जो मुन्याजी सर्थ की बॉर्डर पर पीस सबसे बड़ी बात है वो महत्पूर्ण है और भारत का
13:55जो पूरा सा कोजिशन कुल मिला कि बॉर्डर पर सांती भरोसा यह जो चीजें अगर है तो एकनॉमिक रिलेशन और
14:02कोपरेशन बेतर हो सकता है यानि कि अगर हम करें
14:19खतम नहीं हुआ है और यहीं बज़य है कि भारत कीन के साथ प्रिक्स में इस तरीके से आगे बढ़ेगा
14:26तो यह महत्पूर्ण मुद्दे रिचा होंगा और यह मोधी पीम बोधी ने उठाए है लेकिन और इसमें जो फिलाइट बगरा
14:34सुरू कुछ और संदे तो चाहना के
14:48आगे बढ़ा रहे हैं कैना हला कि का भी अच्छा आगे बढ़ जिया है लिकिन भारत भी जिस तरीके से
14:53साथ परसेंट से ज्यादा हमारी जीटीपी में जिरोत हुई है लगातार दुनिया आई-म-फ भी उसको कहता है कि
15:00यह बहुत ही अच्छा है हमारे लिए भी अच्छा ह
15:16उसमें बहुत महत्पूर बात थी जो मैं कल भी कह चुकों और अज़र हमारे दर्सक तो कि आज स्काइकरम को
15:21देखने और वो समझना चाते है कि लिस पूरा इसका लब बोलो आप क्या रहा तो उसमें बड़ी बात थी
15:25उन्होंने इरान के राश्वती से कहा कि जो स्टेट अ
15:46एक तरी के जिस तरह सुसर नाके बन भी कर रखी है वो भी देखना होगा तो लेकिंशलाल इरान से
15:51ये बात करना और ऐसे वक्त में करना जब उसमें इरान और ये दूसरी बिलकुल आप ने और भी कहना
15:58बूल गया वह बहुत महत्मूर था ना सिफ रूस और चान बलकि इरा
16:02जिसको वो चंद दिनों में खत्म करने की निस्त नाबूत करने के मेर का बात करता है अभी भी वहाँ
16:08पर लगाता रही उच चला है उस एरान को भारत में वेलकम क्या जाता है मोधी एरान के राश्पती का
16:15हाथ पकड़ कर चलते हैं साथ में पुतिन होते हैं यानि कि अगर �
16:20इस तरह हमने मन्च तो नहीं बनने दिया ब्रोधी लेकिन हमने ये कहा कि हम आपके दोस्त हैं लेकिन बाकी
16:27से भी हमारी जिम्मेदारियां है और हमारी नज़्दी की है यानि कि जो टैरिफ लगाने वाली बात अमेरिका लगातार कहता
16:34था रूस से पेल मत लो इरान से मत लो
16:38चहवार को भी उसने जिस तरीके से सैंक्सन की लिस्ट में लाया है तो वो सब सीजे करकर के हमने
16:43उनके इस तरह के संदेशों से मैसेज इस तरह की चीजों में दिये जाते हैं मैसेजिंग होती है कि अमेरिका
16:50हमें आपकी इन बातों से तकलीफ है और ये बाते हमारी नापसं
17:05जरूरी है मैं चाहूंगे कि आप इस पे और थोड़ा लाइट डालिए प्रकाशित कीजेगा जैसे कि हमें सब को पता
17:12है कि ट्रंप की जो आदत है वो बहुत इगोईश है और जैसे कि पहले हमने देखा है कि रूस
17:20से तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाया गया
17:22यानि कि कुछ भी हो तो अगर हम रूस के साथ नहीं है तो दुनिया का कोई देश रूस के
17:27साथ नहीं रहेगा ठीक वैसा ही अभी इरान वार के बाद भी देखने को मिला यानि कि इसराईल और अमेरिका
17:35जो इरान पर वार कर रहा है लड़ाईयां चाहिए सा कि आपने आल्र
17:40को खत्म कर देंगे लेकिन एरान के सुप्रेम लीडर के खत्म होने के बाद भी एरान आज भी युद्ध में
17:47उसी ततपरता के साथ टिका हुआ है और इस बीच एरान के जो प्रेसिडेंट है प्रजिश्कियान इनका भारत आना मोदी
17:56जी का आपने जो अलड़ी बताया कि हाथ
17:59तुमेहाथ, गले मिलना, साथ चलना, वो जेस्चर दिखाई देना, वो साथ देख रहा था कि भारत के जो मैतरी संबंध
18:07हैं, भारत जो है वो कहीं न कहीं इरान के साथ स्टैंड कर रहा है, क्या ऐसा मेसेज उस वीडियो
18:12से सामने आ रहा था, और आपको क्या लगता है श्र
18:55बहुत कुछ कह रहा था.
18:56किसी के साथ में चाहिए, इरान की बात हो चाहिए, दूसरे देख, तो इस तरीके भारत जैसा देख, दोसके साथ
19:01इसने काफी समय से बहुत अच्छा रिष्टे थे, टरम को भारत लाया जाता है, वेलकम किया जाता है उनका, अम्हें
19:09आमदाबाद में, नमस्ते, इंडियो �
19:11इस तरीके से वो लगता है, लगता है एक दोस्ती के नया आयाम चाहरे, लेकिन जब वो अपने दूसरे दोर
19:16में आते हैं, तो ऐसा लगता है इसे भारत ही उनका बहुत बड़ा दुस्वन है, या भारत में ऐसा कर
19:21दिया, जिस मोदी को वो अपने सबसे बड़ा बित्र कहते
19:24उसे वो बहुती जटिल सौदागर कह देते हैं, उसके सासा कातिल, जो भी मतलब, उनके जैसा नहीं कातिल कहने वाला
19:32कह देते हैं, बहुत ट्रेड के मामले में जिन्दी कह देते हैं, और क्यों जी दिच्चों कि उनकी बात नहीं
19:37मानते हैं, तो ये सारी छीजे लगता है कि
19:39उन्हें अपना हित इतना प्यारा और धीरे धीरे ये जो पूरा जो समिट हुआ है इसमें एक बात साप आती
19:46आप कुछ भी कहते रहिए मान लीजिए मैं आपके दस तरह के आप पे निंतर लगाने की बात करता हूं
19:51लेकिन आप वही करती हैं जो आपको करना इसका मतलब क्या ह
19:55कि मेरा जो मेरी जो जिद है या मेरा जो प्रभाव है वो आप पर उतना नहीं है जो आप
20:01मेरी बात मानो कहीं न कहीं आप ने मुझे बिना जबाब दिये जबाब दे दिया यानि कि आप जिन लोगों
20:08से आप आइसोलेट कर रहा है दिरे दिरे मुझे ऐसा लगता है कि अमेर
20:25हम यह भी नहीं कर सकते है रूस जो हर वक्त हमारा साथ देता है अब उसके साथ अपना क्रेट
20:30खतम कर दे क्योंकि बात यह कि जब पाकिस्तान से बात हुई है चाहे वह परमाणू परीचर से लेके परमाणू
20:38सक्ती बनने तक पी बात हो तब भी हमने देखा कहीं ना कहा है अम
20:55इसलिए इन इंडरा गांदी को भी धमकाने की और भारत को धमकाने की अपने जहाज भेजने की कोशिस्टी नहीं मानी
21:01वो और भारत की से
21:12असले इस तरह बहुत भरोसे मन नहीं है बहुत है इसलिए हमारा जोड़नीती है
21:25हम हमें हर किसी से दोस्ती और रुतरकों के अधार पे करना है
21:30और रनीती का अधार पे करना है
21:31हम आक्रामक कभी उतने नहीं रहे जब तक कोई हमारे उपर अक्मन नहीं करे
21:35तो कुल मिलाके यह है कुल जमाबात यह है
21:38कि अमेरिका को हमने ये दिखाया है कि हमारी अपनी जरूरतों के लिए हम आपके दवाव में नहीं आएंगे
21:44हम दूसरे रास्ते सलासेंगे और ये देखा भी गया है
21:47अमेरिका ने लाग टैरिफ लगाया दुनिया की बाते करी
21:50लेकिन वो यूरेपिन करती वो नाटो कंट्री जो अमेरिका टैरिफ लगाता है लेकिन भारत के साथ
21:56प्री जो है ट्रेड डील वो करते हैं तो एग्रिमेंट करते हैं तो मुक विपार जिस कहते हैं उसे समझोता
22:04करते हैं
22:04तो ये हमारी जो रणनीती बताती है कि हम अपने मुद्दों पे ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर
22:11और जिसने हमारा साथ दिया है उसका बैलक्रम हम जरूर करेंगे.
22:15तो वो चीज हमने दिखाई है लेकिन बहुती रणनीती बहुती सब्धा के साथ एक भी सब्ध हमने अमेरिका के खिलाब
22:23चिनोती पूर्ट या ऐसा नहीं बोला जिससे वो ये कह सके कि आप तो हमारे से दोस्ती का हाथ चुड़ा
22:29रहा है और इचाह।
22:45तभी भारत ने M.E.A. ने ये साफ संदेश दिया था कि हम तेल वहां से लेंगे जहां से
22:50हमारी उर्जा जरूरते पूरी होती है हमारे हितों की रक्षा होती है तो चलिए वाबस आते हैं अगर ब्रिक्स पर
22:58ब्रिक्स में एक टर्म बहुत तेजी से उभर रहा है ब्रिक्स स
23:15दॉलराइजेशन का मतलब ये बिल्कुल भी नहीं होता है कि डॉलर पर पूरी निर्भरता खत्म हो जाएगी लेकिन आपको पता
23:22है कि अभी जो वर्ल्ट ट्रेड होता है वो डॉलर में होता है यानि कि अगर सपोज हम रूस से
23:27तेल खरीदते हैं तो हम जो पे करते हैं वो �
23:33दॉलर जो है वो बाद में रूस के करेंसी में कंवर्ट होता है लेकिन इस ब्रिक समिट के बाद लोग
23:39ये उमीद कर रहे हैं कि डी डॉलराइजेशन होगी यानि कि अपने लोकल करेंसी में डिरेक पेमिंट को बढ़ावा दिया
23:45जाए और डॉलर पर निर्भरता कम की जाए
23:49तो शिवेंद्र जी जैसे कि मैंने भी डी डॉलराइजेशन का जिकर किया आपको क्या लगता है कि इस ब्रिक समिट
23:56के बाद डी डॉलराइजेशन पर फोकस किया जाएगा क्या डॉलर पर निर्भरता कम होगी और अगर ऐसा होता है तो
24:04ट्रॉम्प को मिर्ची जरूर लगे
24:17तो पहले तो आप थोड़ा डी डॉलराइजेशन पर हमें समझाईए कि अगर ऐसा होता है तो क्या भारत के लिए
24:23प्रॉफिटेबल है क्या बाकी का जो ब्रिक्स की कंट्रीज है उनके लिए फायदेमंद है और अगर ऐसा हो पाता है
24:29तो अमेरिका इसको किस तरीके से देख
24:44है ने कि अगर हम चैना से कोई चीश खरीबते हैं तो हम हम पबिटा है तो कहने करता है
24:57ने सकते हैं तो कहने या रूव रूस से खरीबते हैं तो इस Ther dengan कि से त्पार आम सह
25:04accents slides好
25:05कि एरान और यूएई जो डेश से सामिल है देश क expecting 11 तो वो इसके अब पर्मानेन्ट मिंबर बन
25:13चुके है उसके लाब़ा 10 और ग sırए ग्यारा पर्मानेंट मिम्इर बन चुकेए उसके बारे में सबसे पहले हम लोगों
25:33को पता है
25:33उसके साथ 28% ये global trade को करते हैं अब जाहिर सी बात है global trade तो बढ़ भी
25:40सकता है तो सवाल ये है कि 48% अगर GDP है और ये लोग सहमती बनाते हैं तो सवाल
25:47ये है जो मैंने पहले का अमेरिका निश्चित तोर पे अपनी तोरिये चड़ा सकता है उसके पास है लेकिन ऐसा
25:54भी नहीं है
25:55बस इन देशों के पीश जो conflict है जैसे सबसे बड़ी इसमें ब्रिक्स में जो चीज है देखिए कोई और
26:01देश से हमें दिक्कत नहीं है रूस है ब्राजील है ताउट अफ्रीका है इन सबसे हमारे साथ में एक ऐसा
26:09संबंध है कि भरोसे के साथ में हम आगे पढ़ सकते हैं द
26:24सुधी के साथ ऐसा लगना तमाम तरह के investment की बात करना उसके बाद तमाम ऐप ऐसे पाए जाना जो
26:31भारत की आम जनता की भी जासूसी कर रहे हो और बॉर्डर पे गलवान जैसी घटना होना तो यह चीज
26:37लगाता है कि चीन के राश्पती आते हैं मीटिंग होती है बैठके हो
26:54कि हमारी एक महला जब वहाँ जाती है तो उसके passport कैसा है तुम तो चाइनी जो भारती passport कैसे
27:00तुम्हारा और चल परदेश की तो इस तरह की चीजें जो भारत के लिए ना गवार हैं कभी नक्ता बदल
27:06देना कभी हम बदल देना और अरो अचल परदेश का यह सारी चीजें ज
27:23तो उस तरीके से तेओरिया चड़ा के हमकी नहीं दे पाएगा, नहीं समझा पाएगा, नहीं धमका पाएगा, लेकिन हाँ, अमेरिका
27:31को हम एग्णोर नहीं कर सकते, लेकिन उससे इवना फरक नहीं पड़ेगा,
27:35क्योंकि जिस तरीके से आपने कहा, कि डी डॉलर आइजिसन की जो बात आपने कही, जब इतनी जारे देश, इतनी
27:41बड़ी एकनौमी आपस में, लोकल करनसी में करेंगी, तो उसका फायदा भी मिलेगा, जितने वो टैरिफ लगाएगा, उसका कहीं ना
27:47कहीं छतिपूर्टी इस
28:05कापी हद तक बड़ी चुनोती मिलने वाली है, जी बिलकुल, चीन भी भरोसे मंद नहीं है, यह हम सब को
28:14पता है, जैसा कि आपने अल्रटी बताया, चाहे वो लसी का मुद्ध हो, चाहे वो अरुनाचल प्रदेश पर बार बार
28:19चीन के विवादित मैप सा जाते हैं, कभी-क
28:33चीन की जो है, वो जो प्रिजन्स है, वो बढ़ रही है, लगतार बढ़ते जा रहा है, चीना की बढ़ते
28:40जा रहा है।
29:03और अभी भी कई तरह की उद्दग विमांग का समझोता हुआ है तो हाला कि वो तो ट्रेड है कर
29:10सकते हैं लेकिन पाकिस्तान पर भी अगर वो ही चाहता तो उस तरह का दबाव खास तोर से आतंक बादी
29:14जो गढ़विदिये हैं आतंकियों को सेल्टर देने का चायना को उसको �
29:19दबाव डालना चाहिए और चायना उस पर कुछ नहीं बोलता तो ये एक बहुत महत बहुत चीज और उसके वाद
29:24हतियार देता है तो ये चीज हमारे लिए एक बहुत ही समस्या खाबित
29:38पॉलिसी रही है बारत की खिलाव जो हमेशा सब्सक्राइब
29:49मंध्री मोधी करते हैं जो भारत में है अभी ब्रेक्स चल रहा है तो क्या मित्रता बढ़ा कर इन इशूज
29:56पर काभू पाया जा सकता है या फिर सीधे-सीधे आख दिखा कर काभू पाया जा सकता है क्योंकि कुछ
30:03तो रास्ता अपनाना होगा अगर अपने नौर्थ येस्ट क
30:34सिक्योर करना है तो
30:35विवस्ता वो भी आगे बढ़ चकी है कई ऐसी चीज़े हैं जो चीन ऐसा नहीं है कई चीजों में चीन
30:41भारत से इमपोर्ट भी कर रहा है कई चीज़ें कई गुना आगे बढ़ी है और चीन अभी दूसरी चीज क्या
30:47है जो हमारे लिए बहुत अच्छी बात है कहते न किसी द
31:03जैसा देश जिसे कई दसकों से उस पर सैंक्शन लगे हुए थे उस पर व्यापार के सैंक्शन लगे हुए थे
31:10टेकलोजी के से बहुत समस्या थी उसके बाद गूदी वो अमेरिका जैसे देश को जो दुनिया में सबसे बड़ी सामरिक
31:16सकती है सबसे बड़ी सामरिक सकती है फ
31:32को जीत नहीं पाया है कई बड़े-बड़े नुकसान भी उठाए हैं तो लोगों को समझ में तो ये आ
31:37रहा है उसके बाब जूत भारत में से बीच आपरेशन सिंदूर में एक रणनीतिक स्ट्राइक करकरके और बहां पर पाकिस्तान
31:45को बहुत जबरदस चोड़ दी है और बह
32:00जो और देशों के खिलाब इतनी ताकत बर जो चाइना से बड़ी सामरिक सकतिया है उनको भी परसान कर रहा
32:06है उनकी आर्थिक हाला डामोडॉल कर रहा है चाइना नहीं चाहता है ये इस तरीके से कि अपनी विस्तारबादी उसकी
32:13नीती है वो जगए-जगए पर समय समय पर
32:30दे रहा है और भी तरीके से दे रहा है जिस तरीके से उसकी नंबर बन दुनिया को जिस तरह
32:34रूल करने की इच्छा है वहाँ पर इस समय युद्ध जो है भारत से उसको वड़ा पड़े लेकिन इसके बाद
32:41वो रननीतिक तोर पे दिमाकी तोड़के भारत तो तैनाओ देत
32:58कितना प्रत्रोत करना है कितनी समझदारी से कि आख तो दिखाएं लेकिन कोई कह ना पाएं कि हमने आख दिखाई
33:05हमने आपको समझाया यह हमारी जरूरत है यह हमारा हख है यह हमारा अधिकार है यह हमारी सोबर्नीटी पर अचोट
33:14है यह सारी चीजें हम समझा के चल रहे हैं �
33:17बहुत रणनीती से और हम काफी समय से चाहे भारत में कोई भी सरकार रही हो वो यह लगातार करती
33:23आ रही हो और इस समय मोधी उसको बहुत जवरदस तरीके से कर रहे हैं
33:26तो ये एक चीज है जिसकी बज़े से अभी हमें जो कदम हम उठा रहे हैं धीरे धीरे आकरमकता धीरे
33:33धीरे अर्थवश्था आगे बढ़ाना दुनिया अपने ट्रेड को सबसे बड़ी चीज है कि किसी भी देश की ताकत उसकी अर्थवश्था
33:41होती है अर्थवश्था से ही
33:42आप सामरिक सक्षी हासिल कर सकते हैं दूसरी बात जो तबाब पडोसी हैं उनसे भी हमारे रिष्टे जो जिस तरीके
33:49से बहुत बढ़िया नहीं रहे हैं और चायना ने जिस तरह उन्हें सेल्टर दिया है और जिस तरह उनकी दुस्साहस
33:54करने की ताकत दी है इस पर भी हमें
33:57धीरे धीरे ध्यान देना होगा अलग इस च्रिलंका में हमने काफी हट तक इसमें सफलता हासिल की है लेकिन अभी
34:02नेपाल और वांगला देश हमारे लिए एक समस्या का बिसा है जिनके हमारे रिष्टे अच्छे ते साइथ बहां पर सरकार
34:08बदलना और ये सब भी मारे खिला�
34:11अलग बिसा है अमेरिका का है चैना का वो सब कहते रहते या अंदलों में लेकिन फिलाल हमने पाकिस्तान को
34:16जिस तरह दबाया है और उस युद्ध में चैना के जो तमाम जो युद्ध तामिगरी थी वो जिस तरह से
34:23भारत के खिलाब पूरी तरीके से कामया फेल हुई तो �
34:26वो भारत को काफियर तक ताकत दिला गया है, तो अभी इतना बड़ा खत्रा नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं कह
34:32सकते कि हम सीधे आखे दिखा दें, या सीधे युद्ध को कर दें, हमें इसी रणनीती से आगे चलना होगा,
34:39जिस रणनीती से धीरे धीरे आक्रमक्ता बढ़ानी हो�
34:43कि आप अब युद्ध की स्थिती में वासट जैसे भारस्ते नहीं है, अगर करेंगे तो आप भी तबाह होंगे, सिर्फ
34:51हमें नुक्सान नहीं होगा, बिल्कुल अभी जो मिडिलिस्ट में लडाईयां चल रही है, खासकर कि एरान के साथ जो अमेरिका
34:57का युद है, ये दे
35:13तरीके से अमेरिका के जो विपन्स हैं, उनमें सेंद मार चुका है, अमेरिका के पास विपन की शौटेज हो जा
35:19रही है, और इरान की स्ट्रेजी देखिए, चोटी-चोटे वोर्स लड़ता है, सस्ते हाथियारों से लड़ाई कर रहा है, और
35:26फिर भी वो युद में उसी प
35:43दूसरा दिन है, और आज क्या-क्या होने वाला है, शेडूल हमने आपको कुछ ग्राफिक्स में दिखाया भी था, हम
35:49शिवेद्र जी से भी जानना चाहेंगे, कि आज की जो शेडूल है, उसका आपके पास क्या information है, कौन किस
35:56से मिलने वाला है, आज क्या-क्या होने वाला है
36:05एक बर हमारे दर्शकों को बताईए, इसके बाद हम अपने लाइब को और आगे बढ़ाएंगे
36:29बहुत जल्दी बाजी में कोई भी decision लेने की जरूरत नहीं होती है, और de-dollarization क्यों important है, यह
36:38भी हमने आपको बताया, फिलहाल आप हमारे screen पे graphics देख रहे हैं, schedule का, कि 10-15 में क्या
36:44होने वाला है, उसके बाद 11 बजे के बाद क्या है, एक बार आप schedule हमारे साथ देखते चाहि�
36:51और बीनवाल तब तक शिवेंद्र जी को जो अंदर से information आएंगी, वो भी माप तक पहुंचाएंगे, ग्राफिक्स के अनुसर
36:57आप देख पा रहे हैं कि 9-15 में BRICS के partner countries जो है, वो outreach invitees के साथ,
37:02राष्टा देख्श और सरकार प्रमुक जो है, सभी भारत मंदपम पहुंचे
37:18मेरे पास भी लिस्त आगई है, अगर आप पार इसके बाद दस पचास में है, resilience, innovation, cooperation and sustainability,
37:29shaping the future of inclusive global, यानि कि जो बुद्धा है इस बार BRICS का, वो लगबग साढ़े दस क्यास
37:37पास हो, दस पचास क्यास भाई, खा देख्शा स्वास्त, आप दस नहीं पटने की एक्षम था, औ
37:48ग्रूप नहीं है, ये आर्थि गति विदियो पर बात करता है, ये infrastructure पर बात करता है, ये nation building
37:54की बात करता है, और वही जो है, वो दस पचास में होने वाला है, और इस पर ही चर्चा
38:00होगी, फिलाल अब ग्राफिक्स आपने देख लिया है, ये हम आपके साथ आगे भी शेयर क
38:07पहुशा हुआ है, क्या इस से कुछ अलग है, या क्या क्या शेयर क्यूल एक बढ़ बताया, पूरा एकदम बता
38:13दिया, बिलकुल साफ है, और इसमें इसमें इसमें ये है कि बोधी की अभी जो बाकी देश है, देखिए, बाइलेटरल
38:20मीटिंग थी, जो चाइनीज प्रेसि
38:36आपने बता दिया, आपने लगवख सारे कायकरम लगवड़ी और पूरे ही आपने एकदम बता दिया है, तो नहीं है, लेकिन
38:43इसमें आज यही है, जो अब नजर रहेगी कि जो स्पीच होती है, बो क्या होती है, और दिखिए, जो
38:49अंतरास्तिये संबंध होते हैं, उसमें �
38:52एक तो सब्सक्र बड़ी बात यह होती ही, जब सरसम्मती से डेली डिकलेशन को फिकार कर लिया आता है, तब
38:57तो सब है यही बात, लेकिन जिस तरह, जिस तरह, जो मलेशिया के राश्पती है, इब्राहिम नो ने जो बात
39:03कही, वो उस नजरिये से भी इसको देखना है, जो क
39:21इसको कैसे से हमारी समस्या भारत की है, कि वो अमेरका को से भी उसे दोस्ती रखनी है, इसराइल से
39:27भी रखनी है, इराइन से भी रखनी है, यूएई से भी रखनी है, चाइना से भी रखनी है, रूस से
39:31भी रखनी है, तो हमारी रणनीती का यह आजादी के बास से, और सभी
39:36पार्ट की इतनी भी देश में सासन कर चुकी है उनका यही रहा है कि हम ना काहु से दोस्ती
39:41ना काहु से बैरस सबसे सबका साथ सबका विकास जैसी इस्तिति मानके चलते हैं और जो भी छोटे कंट्री हैं
39:48चाहें साथ मेर कभी जो मोदी ने जब से पीम है खास तोर से ध्यान �
39:52है कि जो अफ्रीकन कंट्री हैं इथोपिया तमाम ऐसे दूसरे कंट्री हैं तो उन कंट्री को भी जो है मजबूती
40:00देने का कांग क्योंकि बहां पर हमारा बहुत जबर्दस ब्यापार इससमें बढ़ रहा है हमारे बैपारियों का हमें काफी माइनिंग
40:06से लेके बहुत ची
40:21होंगे तो हमारे व्यापार उन से होने के च्यांस ज्यादा होंगे और निश्चित तोर पे जब तक हम अगर विदेशी
40:28मुद्रा हमारी मजबूत नहीं हम आके नहीं बढ़ सक्तर उसके लिए हमारा एक्सपोर्ट सबसे बड़ी चीज है तो बहां पर
40:34विदेशों में दूस
40:51हो जिसमें चाइना की एक दम अलग समस्या है वो सीधे चंौती देने के मूड में रहता है अमेरिका को
40:57और रूस
40:57जो सीधा अमेरिका को हमेशा चुनोती देता रहा है
41:01और उसको आखे दिखाने से पहले भले कितने ही सैंसल लगाए
41:05लेकिन अमेरिका का चुनोती जिस तरह से धंकी देने जैसी आवाज कभी रूस के परती नहीं आती है
41:11तो ये जो देशा इनका अलग तरीका होता है
41:13लेकिन ब्राजील का अलग होता है और आप योई का अलग रहेगा इरान से उद चली रहा है
41:19तो हर एक का अलग अलग है उनकी स्पीश हमाएं लिए आज ताम तक हबे देखना होगी तमस नहीं होगी
41:25जियो पॉलिटिकल नजरिये से और उनके जो चिंता होंगी कंसरन होंगे
41:30वो ब्रिक्स के पूरे आगे जो इसके उद्देश हैं उनने कैसे आगे बढ़ाते हैं ये बहत्पून है
41:35लेकिन सबसे बड़ी बात यह है लाज जो हमारे लिए सबसे बड़ी बात है
41:40ऐस्on Ne Sc12 की बात थी उसमें भारत जो चाइना ने जो सी जिंग्पिन का बेहान है
41:46हलाकि बार-बार मैं कहता हूँ लेकिन उनका बयान देना ही काफी है उन्होंने अब तक वो इस मौके पर
41:51या तो चुप रहते थे या बीटो करते थे लेकिन अब जो उन्होंने बाइलेटरल मीटिंग के बाद जो बयान दिया
41:56है उसमें कहा है कि भारत और चीन को एक सहोगी की
42:01तरह आगे बढ़ना चाहिए एक दूसरी की तरक्की को अपॉर्शनिटी की तरह देखना चाहिए और भारत और चीन को तभी
42:09जगए चाहे वो यूनस्टी की भी बात उन्होंने कही उसमें भी जो है ताकत मिलनी चाहिए तो अगर यह होता
42:17है और चीन जिस तरह भारत में ची
42:29अब अपनी जरूवत क्या उसे भारत की जरूवत महसुस होती है जिस दिन चीन अगर भारत के अच्छा परोसी मानता
42:36है और उसे जो तमाम विबात ख़तम करता है यह सच्चा ही यह है कि भारत और चीन जैसे दोस्त
42:42जो अभी एक सपना है वही बात मलेसिया बार बार मुझे
42:46मलेशिया के जो राजपती इब्राहिम की बात आजिक फवाब है या कोई हकीकत अगर बास्तम में जो पडोसी देश ऐसे
42:53हो जाते हैं जो एक दूसरे की तरक्की को में अपनी अपॉस्टिटी देखते हैं सयोग देखते हैं तो निश्चित तोर
43:02पे दुनिया में इंसे बड़
43:13नहीं करता है भारत कभी पहले हमला नहीं करता है भारत के ऊपर हमला होता है तो उसका जबाब देता
43:18है वो फस्ट रिस्पांस तभी करता है तो यह जो रण नीती है हम किसी पर आक्रमन करने की नीती
43:26कभी नहीं है किसी को लूटने की नीती नहीं है जो जिस तरह से को दौर �
43:33जो दौर था जिस तरह का ब्रेटेन का हमारा वही एक तरीकी समेर का आज करना चाहता है जिस तरह
43:37से बेने जूला में उसने किया तो फर्क नहीं है लेकिन टेकलोजी के दौर पे विश्चिक तौर पे चीन आज
43:43की तारीक में बहुत बड़ी सक्ती बन चुका है हमें उस तरह �
43:46बढ़ना है हमें इस समय भी आगे बढ़ने के लिए विश्चिक तौर पे कुछ समय की सांती चाहिए यह सांती
43:53इस तरह के संगठनों के यूद में उलजना किसी भी देश के लिए खतरना कि यह सब समझ चुके हैं
43:58जी शिरेंद्र जी एक बहुत महतोपुन शब्द आ रहे ह
44:04तो उसमें में बताये कि आज ही जो है डे टू पर न्यू डेली डेकलरेशन आइधिंक यह गोशना पत्र है
44:12जिसकी बात कल अलड़ी हो चुकी है और दर्शकों को बता दे कि एक रोड मैप है कि जिसमें 11
44:17जो देश है ब्रीक्स के यह एक ही नाव पर सवार है यह बड़ी बा
44:34तो न्यू डेली डेकलरेशन के बारे में आप दर्शकों को थोड़ा अगर कुछ बता पाएं कि क्या है मैं थोड़ा
44:40सा इसमें जो मैंने अभी ओनलाइन सर्च किया जो मैंने डॉक्यमेंस पड़े उसमें है कि ग्लोबल गवर्ण स्में सुधार करने
44:48की बात है यह जो न्य�
45:06लेकिन अब क्या है कि अमेरिका की टैरिफ पॉलिसे इस पर भी आपत्ती जताई जाएगी, यानि कि विरोध किया जाएगा
45:14अमेरिका को.
45:15इसके राबा है वेस्ट एशिया कॉन्फिलिक्ट पर भी बाचीत यानि की ब्रिक्स ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी
45:24चिंता जताते हुए
45:25मैक्सिमम रिस्ट्रेंड की अपील किये और विवादों को डायलोग, कंसिल्टेशन और डिप्लोमेसी के जरिये सुलजाने की बात कही गई है
45:37क्योंकि अभी विस्ट एशिया का जो तनाव है इसका एफेक्ट पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है
45:43विस्ट एशिया जिसको मेडिलिस्ट भी कहते हैं इरान वार की वज़े से भारत भी एफेक्टेड है
45:49अब मैं भारत की बात इसलिए कहते हूँ क्योंकि हम सब भारतवासी हैं और भारत के लोग और कुछ बाहर
45:55के लोग भी है जो एनाराइस हैं जो डाइस्पोरा है इंडिया डाइस्पोरा वो भी हमारे प्लाटफॉर्म को देखते हैं
46:02भारत के हितों की बात करना इसलिए भी जरूरी है और BRICS में इस मुद्धे पर अगर स्थाई कुछ रास्ता
46:10निकाला जाता है तो BRICS सम्मेलन की अपने आप में एक बहुत बड़ी achievement होगी इसके लावा trade और local
46:17currencies पर भी बात हो रही है
46:19BRICS देशों ने cross-border trade और investment को आसान बनाने तथा local currencies में कारोबार और payment mechanism को
46:28मजबूत करने पर जोर दिया है
46:30payment mechanism यहाँ पर एक बार फेड़ी डॉलराइजेशन की बात होगी यानि कि अपने local currencies में trade करेंगे
46:36अगर हम रूस को payment कर रहे हैं तो हम direct रूस के currency में हम पे करेंगे हम dollar
46:41में क्यों करेंगे फिर वो रूस के currency में convert करेंगे हम China को अगर pay कर रहे हैं
46:46तो हम direct China के currency में डारे बारत के point of view से सबसे important discussion रहा है वो
47:02है terrorism पर सहयोग
47:04यानि कि घोशना पत्र में आतंकवाद की खिला सहयोग और आतंकवाद की फिननसिंग क्रोस बॉर्डर नेटवर्क से निपटने पर भी
47:13जोड दिया गया है
47:14भारत के लिए खास तोर पर महतुपुण मुद्दा है जैसा कि मैंने आपको बताया और भारत का पड़ो से पाकस्तान
47:20सबसे ज्यादा भारत को परिशान करते हैं अभी पहलगाम हमले के बाद से जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जो
47:31भारत ये जो सिंधू वाटर ट्रीटी ह
47:34इंडेस वाटर ट्रीटी इसका मुद्दा चल रहा है भारत कहरा है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते
47:39यानि कि यह जो सदियों पुरानी ट्रीटी थी भारत ने इसको अभी फिलाल के लिए रोग दिया है कि हम
47:44पानी नहीं देंगे तुम हमारा खून बहार रहा हो और
48:04डेवलपिंग कंट्रीज की जरूरतों पर जोर दिया जा रहा है खास बात यह है कि ब्रिक्स ने माना है कि
48:09डेवलपिंग एकनोमिस के लिए फोसल फ्यूल अभी भी एनरजी मिक्स में महतुपूर्ण भूमी का निवाते हैं साथ ही क्लाइमिट कमिट्मेंट्स
48:17को जारी रख
48:33हैं जैसे कि हमारा पड़ोसी पाकस्तान ही है कहीं अगर उसको मुह बंद करके रहना पड़ेगा अब एक लाइन में
48:38अगर हम आपको समझाएं तो ब्रिक्स देशों का लोकल करिंसी कोपरेशन, टेररिज्म, विस्ट एशिया, क्लाइमिट और डेवलप्मेंट जैसे बड़
49:03आपके तो अगर्या परिशान नहीं करेगा इसके लावा कि टेरोरिजन पर भी बात हो रही है तो पाकिस्तान ससारी कहाएं
49:16वेस्ट एशिया कंफ्लिक्ट की तो भी उयस परेशान होगा है
49:26क्योंकि इरान के खिलाफ जो वार चल रहा है
49:30इरान वार में पूरी दुनिया पिस रही है
49:32भारत सबसे ज्यादा कहीं नहीं पिस रहा है
49:34तो इस पर भी अगर एक बात की जाती है
49:37तो अमेरिका इसको भी अपने खिलाफ समझ सकता है
49:39तो यह जो बहुत important points हैं
49:42जो ब्रिक से निकल कर आ रही है
49:44ब्रिक्स के 11 देश भारत में मौझूद है
49:47और 11 देश एक ही बोट में सवार है
49:51एक ही पेज पर है एक ही किनारे में है
49:53और दुनिया को यह एक बहुत बड़ा संदेश है भारत से
49:56कि ब्रिक्स देश अब सिर्फ infrastructure development पर बात नहीं करेंगे
50:03यह 360 development पर बात करेंगे
50:07वले ही ब्रिक्स नेटो की तरह सैन या गुट नहीं है
50:11लेकिन ब्रिक्स terrorism पर बात करेगा
50:15ब्रिक्स उन सभी मुद्धों पर बात कर रहा है
50:18जो इन 11 देशों के लिए beneficial है
50:26लिए नहीं है
50:29जालोग दोनीड आपनाफ नहीं है
Comments