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  • 41 minutes ago
नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles' का विमोचन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कोविंद के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए युवाओं से इस किताब को पढ़ने की खास अपील की.अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कई अनसुने और भावुक प्रसंग साझा किए. उन्होंने बताया कि कैसे राष्ट्रपति भवन में कोविंद प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें कार तक छोड़ने आते थे और कैसे राष्ट्रपति बनने के बाद अपने गांव परौंख लौटकर उन्होंने शिक्षकों के पैर छुए थे. कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी अपनी मां को याद कर भावुक हो गए और उन्होंने रामनाथ कोविंद के बचपन के उस दर्दनाक अध्याय का भी जिक्र किया. जब आग लगने से उनकी मां का निधन हो गया था. पीएम मोदी के इस भावुक संबोधन और पूर्व राष्ट्रपति के जीवन संघर्ष की पूरी कहानी जानने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें.

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Transcript
00:01नई दिल्ले में आयोजित कारेकरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मूदी ने पूर्वर राश्ट्रपती रामनात कोविंदी की ओटो बायग्रफी ट्रायम्फ ओफ दे
00:10इंडियन रिपबलिक
00:11माई लाइफ माई स्ट्रगल्स का विमोचन किया और उनके साथ अपने लंबे जड़ाव को याद किया
00:17उन्होंने कहा कि राश्ट्रपती के तौर पर कोविंदी का मार्ग दर्शन और स्नेह हमेशा उनके लिए अमूले रहा
00:23पीम ने कहा कि ये आत्मकथा आने वाली सभी पीडियों के लिए भारतिय लोकतंत्र की एक अनमोल विरासत साबित होगी
00:30मैंने उनके जीवन को जितना संजया है उनकी कारिक्षंताओं को जितना जाना है
00:38मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि स्री रामनात कोविन जी की अपने आप में भारतिय लोकतंत्र और भारतिय
00:58समाज के लिए एक धरों पर बनेगे
01:02प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से खास अपील करते हुए कहा कि वैस कताब को जरूर पढ़ें उनके मताबिक कोविन का
01:08जीवन बताता है कि व्यक्तिकत संगर्ष आखिरकार लोकतंत्र की ताकत बन सकते हैं
01:14अपनी पुस्तक को बहुत ही सटिक नाम दिया है
01:19कि ट्राइंफ अब इंडियन रिपब्बिक माई लाइप माई स्ट्रॉगल्स कहने का भाव यह कि जीवन और जीवन के संगर्ष उनके
01:38व्यक्तिकत है
01:41लेकिन उन संगर्षों के परणाम सुरुप मिली जीट भारत के गनतंत्र की है
01:49कारेकरम के दोरान पिये मोदी ने एक भावुख प्रसंग भी साचा किया
01:53प्रदान मत्री के तोर पर बराश्टर भी भौन में उनसे मिलने जाता था
02:01प्रोटोकॉल के हिसाब से
02:06जो बाते नहीं हो सकती है
02:10वो बाते वो करते थे
02:14वो प्रदान मत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के धरवाजे तक आती थे
02:20वहरामनात कोविंद ने भी इस मौकी को अपने जीवन का बेहत भावुख पल बताया
02:24उन्होंने कहा कि अपने जिंदगी के संघर्ष और अनुभव वे पहरे ही इस किताब में लिख चुके हैं
02:29अब पाठक उन्हें उनके अपने शब्दों में जान सकेंगे
02:33Bureau Report, ETV भारत
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