00:28एक समय की बात है।
00:32पुष दिनों के बाद महल में कुछ महमान आये।
00:36चूहों ने सोचा कि ये अच्छा मौका है।
00:41बदला लेने के लिए चूहों ने बभू की साड़ी चुराई और उसे जाकर अधिती के कम्रे में रख दी।
00:46जब सुबा सेव को और अन्य लोगों ने उस साड़ी को वहां पर देखा तो लोग राजा की बहु के
00:51चरत्र के बारे में बात करने लगे।
00:53ये बात जंगल में आँग की तरफ पूरे गाउं में फैल गई। जब ये बात राजा के कानों तक पहुँची
00:59तो उसने अपनी पुत्रवधू के चरत्र पर शक करते हुए उसे महल से ही निकाल दिया।
01:23दिपक जलाया करती थी। तस दोरान उनका ध्यान उस पेड के आसपास जगमगाती रोश्नी पर गया। राजा इसे देखकर चकित
01:31रह गया।
01:32महल में वापस आने के बाद उन्होंने अपने सैनिकों से उस रोश्नी के रहस्य का पता लगाने के लिए कहा।
01:38सैनिक राजा की बात मान कर उस पेड के पास चले गए। वहाँ पर उन्होंने देखा कि दीपक आपस में
01:44बात कर रहे थे।
01:45सभी दीपक अपनी अपनी कहानी बता रहे थे। तभी एक दीपक बोला मैं राजा के महल से हूँ।
01:50महल से निकाले जाने के बाद राजा की पत्रवधू रोज मेरी पूजा करती हैं और मुझे प्रज्वलित करती हैं।
01:56अन्य दीपकों ने उससे पूछा कि राजा की बहु को महल से क्यों निकाला गया। तो उसने पूरी कहानी बताई।
02:03ये सब सुनकर सैनिक भी हैरान रहे गये और महल वापस आकर उन्होंने राजा को वही कहानी सुनाई।
02:09ये सुनकर राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी पुत्रवधू को महल में वापस बुला लिया।
02:14इस तरह पीपल के पेड़ की नियमित पूजा करने का फल राजा की बहु को मिला और वो अपना जीवन
02:21आराम से बिताने लगी।
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