00:04बुढ़ापा बे सहरा और बेबसी क्या होती है शायद सुकादेव नाहक से बहतर कोई नहीं बता सकता तहतर साल की
00:11उम्र में लोग जब आराम और सहरे की तलाश में होते हैं तब ओडीसा के सुकादेव नाहक ने ट्राइसाइकल से
00:18130 किलोमेटर का सफर धाई दिन में तै किया �
00:22और पुरानी चोट के इलाज कराने के लिए बरहंपूर शहर पहुँचे चार साल पहले मैं अपनी घर के बाहर एक
00:30कुए के पास गिर गया था और मुझे चोट लगी थी जिससे मेरे बाए पैर के चोड पर असर पड़ा
00:37Community Health Center में इलाज हुआ लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं ह
00:42लगातार दर्द और चलने फिटने में तकलीफ होती रही नयागड के ओड़ा गाउं बलाक के बारासाही गाउं के रहने वाले
00:51नाहक कई सालों से अकेले ही जीवन की साज को काट रहे हैं
00:56दस साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई बेटा मानसिक बीमारी से जूज रहा है विलेजगार्ड की नोकरी से
01:03रिटायर है पास में ज्यादा पैसे भी नहीं है लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी और MKCG Medical College अस्पताल में
01:12पहुँच कर अपना इलाज करा रहे हैं
01:15वे ठीक होने की उम्मीद के साथ यहां आए हैं हम उनकी medical जरूतों का आकलन करेंगे और सभी जरूरी
01:22इलाज और देखवाल मोहिया कराएंगे
01:26शुरुआत में उनको emergency ward में रखा गया जिसके बाद physical medicine और rehabilitation department में shift कर दिया गया
01:33जहां उनका इलाज बे सहारा लोगों के ward में चल रहा है
01:36ETV भारत के लिए बरहमपूर से समीर कुमाराचार्य की रिपोर्ट
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