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  • 17 minutes ago
बुढ़ापा,बेसहारा और बेबसी क्या होती है शायद सुकादेव नाहक से बेहतर कोई नहीं बता सकता है. 73 साल की उम्र में जब लोग आराम और सहारे की तलाश में होते हैं. तब ओडिशा के सुकादेव नाहक ने ट्राइसाइकिल से 130 किलोमीटर का सफर ढाई दिन में तय किया और पुरानी चोट का इलाज करने के लिए बरहमपुर शहर पहुंचे. नयागढ़ के ओडागांव ब्लॉक के बारासाही गांव के रहने वाले नाहक कई सालों से अकेले ही जीवन की सांझ काट रहे हैं. 10 साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई. बेटा मानसिक बीमार से जूझ रहा है.विलेज गार्ड की नौकरी से रिटायर हैं. पास में ज्यादा पैसे भी नहीं हैं. लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी और MKCG मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहुंचकर अपना इलाज करा रहे हैं.

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00:04बुढ़ापा बे सहरा और बेबसी क्या होती है शायद सुकादेव नाहक से बहतर कोई नहीं बता सकता तहतर साल की
00:11उम्र में लोग जब आराम और सहरे की तलाश में होते हैं तब ओडीसा के सुकादेव नाहक ने ट्राइसाइकल से
00:18130 किलोमेटर का सफर धाई दिन में तै किया �
00:22और पुरानी चोट के इलाज कराने के लिए बरहंपूर शहर पहुँचे चार साल पहले मैं अपनी घर के बाहर एक
00:30कुए के पास गिर गया था और मुझे चोट लगी थी जिससे मेरे बाए पैर के चोड पर असर पड़ा
00:37Community Health Center में इलाज हुआ लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं ह
00:42लगातार दर्द और चलने फिटने में तकलीफ होती रही नयागड के ओड़ा गाउं बलाक के बारासाही गाउं के रहने वाले
00:51नाहक कई सालों से अकेले ही जीवन की साज को काट रहे हैं
00:56दस साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई बेटा मानसिक बीमारी से जूज रहा है विलेजगार्ड की नोकरी से
01:03रिटायर है पास में ज्यादा पैसे भी नहीं है लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी और MKCG Medical College अस्पताल में
01:12पहुँच कर अपना इलाज करा रहे हैं
01:15वे ठीक होने की उम्मीद के साथ यहां आए हैं हम उनकी medical जरूतों का आकलन करेंगे और सभी जरूरी
01:22इलाज और देखवाल मोहिया कराएंगे
01:26शुरुआत में उनको emergency ward में रखा गया जिसके बाद physical medicine और rehabilitation department में shift कर दिया गया
01:33जहां उनका इलाज बे सहारा लोगों के ward में चल रहा है
01:36ETV भारत के लिए बरहमपूर से समीर कुमाराचार्य की रिपोर्ट
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