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  • 25 minutes ago
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा देशभर में 11 हैंडलूम विलेज घोषित किए गए हैं. इनमें से एक पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश का शरन गांव भी है, जिसे साल 2020 में हैंडलूम विलेज की घोषित किया गया. आज यह गांव देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है. आइए इस विलेज की बदलती तस्वीर से आपको रूबरू कराते हैं. जहां गांव की महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर और सशक्त हैं. बल्कि हथकरघा के जरिए गांव की आर्थिकी को भी मजबूत कर रही हैं. ये महिलाएं हथकरघा मशीनों पर अपनी कलाओं को बुनती हैं, जिसकी भारत समेत कई देशों में भारी डिमांड है.

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01:30पहले गाओं की महिलाएं सिर्फ अपने यूज के लिए पट्टू, शौल, टोपी और मफलर बनाती थी।
01:35अब महिलाएं इसे बड़े इस्तर पर तैयार कर रही है, इन उत्पादों की डिमांड भारत सही 30 देशों में है,
01:42जिसके वज़े से गाओं की हर महिलाओं को काम मिला है, बलकि ये महिलाएं आर्थिक रूप से भी सशक्त हो
01:49रही है
01:55अब जो हमारा इंकम का सोर्स भी बन गया है, तो इसलिए सारी लेडिज जो है इसी काम को कर
02:02रही है
02:03शॉल बना रही है, स्टॉल बना रही है, और पत्तू भी बना रही है, तो जब से ये बना गाओं
02:23हैंलों भी लेज तो लोग एदा बीजरस के लिए भी चीज़े बनाने लगे
02:29जो हमारे सेल्फ हल गूरूप का नाम जमदगनी रिशी है, इसमें दस लेडिज हैं, दस लेडिज की तो इंकम बड़ी
02:38ही बड़ी इसमें, इसके अलावा गाओं की जो अधर लेडिज हैं हमारे साथ काम करते हैं, उनकी भी जैसे मन्थली
02:43हम 10 से 15,000 एजा क्रोश्य प्रड�
03:04साथ आ जाते हैं, मतलब इतने पैसे हम कमा लेते हैं
03:12यह आने वाले परेटक भी इसे खरीद कर अपने साथ ले जाते हैं
03:45तो शॉल, स्टॉल यह भी है से 500-600 तक शॉल हाजार बारासो ऐसे करके अंजी, डाई अजार तरह तो
03:56मैं पट्टू बुनती थी घर में, फिर बाद में जब यह शिक्तर सिखा हमने
04:03खड़ी में बुनना, तब मैं खड़ी में बुनती हूँ, शॉल, स्टॉल, मफलर
04:08फिर हमारको विल्डिंग में लिए हैं लोग इलेज की तरफ से, फिर हमने यहां पर दुकान निकाली और अपना जो
04:16भी हम बनाते हैं हम यहीं पर समान रखती हैं
04:35हिमाचल प्रदेश के गाउं को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम विलिज की एहम भूमिका है
04:39यह न सिर्फ हिमाचल की सांस्कृतिक और पारमपरिक परिधानों को वैश्विक मंच प्रदान करती हैं बलकि मात्र शक्ती को आर्थिक
04:47रूप से सशक्त बनाती हैं जिसकी वज़े से शरन गाउं विक्सित हो रहा है
04:51यहां पर स्वाइन साइता समू की महिलाएं जहां अपने पट्टू, शॉल, टोफी और कुरुशया के उतपाद तयार कर बेच रही
04:59हैं तो वही अन्य महिलाएं भी यहां पर अपने उतपादों को बेचने के लिए रख रही है जिससे अब महिलाओं
05:05की इंकम भी बड़ी है
05:06महिलाओं का कहना है कि पहले वो सिर्फ अपने घरों तक सीमित थी और अपने लिए ही यह उतपाद तयार
05:12करती थी लेकिन अब सैलानी इन्हें अच्छा पसंद कर रहे हैं और घर पर ही महिलाओं की 10,000 से
05:1815,000 तक अतरिकत आय हो रही है
05:21ऐसे में हैंडलूम बिलेज बनने के बाद शरण गाओं की तस्वीर बदलने लगी है और यहां पर यूवा पीडी भी
05:27अब हैंडलूम के कारियों को सीखने में लगी हुई है
05:31ETV भारत के लिए कुल्लू से बालकृशन शर्मा की रिपोर्ट
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