00:00Today we are going to talk about this country and how we will talk about this country and how we
00:21will talk about this country.
00:30Then we will see how much this looks like this is held, a great glory and awesome room for the
00:36한 hour,
00:36which is how much we can talk about it, and the other day of the day we will talk to
00:42we will talk about the future.
00:45तस्वर कीजिए एक ऐसा इर्टकाई सफर जो 745 मिलियन साल पुरानी आतिश फिशा चटानों से शुरू होता है
00:53फिर 1939 की शाही तामिरात और 2006 की माहुलियाती बहाली से गुजरता हुआ आज की जदीद और तेज रफ़तार आलमी
01:02कनेक्टिविटी तक जा पुँचता है
01:04ये एर्टकाव वाकिए आपको हिरान कर देगा
01:06तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं जोदपूर की उन कदीम आतिश फिशा जड़ों की
01:12क्या आप यकीन करेंगे कि यहां की चटाने जिने जोदपूर वेल्डिड टफ कहा जाता है
01:19745 से 680 मिलियन साल पुरानी है?
01:23जी हाँ, मिलियन ये सोचकरी इंसान दंग रह जाता है
01:27ये चटाने रियोलाइट, वेल्डिड टफ और ब्रिशिया जैसी आतिश फिशा की बाकियाद से बनी है
01:34और इन्हें बाकाइदा कौमी अर्जियाती यादगार का दरजा दिया गया है
01:38दरसल यही वो ठोस बुनियाद है जहां से जोधपुर की बका और लचक का सबक शुरू होता है
01:45अब आते हैं इस कहानी के दूसरे इंतहाई एहम मोड पर
01:49यानि सहराई माहोलियात की बहाली
01:52यहां एक बड़ी दिल्चस्प साइंसी इस्तला समझने वाली है
01:56लीथो फाइट्स
01:58इसका मतलब क्या है?
01:59यह वो जिद्धी और बाहिमत पौदे हैं जो मिट्टी की परवा किये बगएर
02:03सीधा चट्टानों और पत्थरों का सीना चीर कर उकते हैं
02:07मिसाल के तोर पर थोर जो बगएर पत्तों के उकता है
02:10यह पौदे इस खुशक और खुड़रे सहराई माहौल के असल हीरों है
02:14और यहां के लचकदार माहौलियाती निजाम की सबसे बेहतरीन मिसाल हैं
02:18लेकिन आपको मालूम है कुछ अरसा पहले तक ये पूरा इलाका वस्ती अमरीका से आई एक हमला आवर गैर मुल्की
02:26जाड़ी प्रोसौपस जूली फ्लोरा के कबजे में था
02:28बिल्कुल किसी अजनबी की तरह जिसने सब कुछ घेर लिया हो लेकिन फिर कमाल हुआ
02:33मकामी पत्थर तराशों और माहरीने माहुलियात ने मिलकर दिन रात महनत की और आज यहां 250 से जाएद मकामी पौदों
02:40की अकसाम परवान चड़ रही है
02:42ये इनसान की शोरी कोशिश से फितरत को दुबारा जिन्दा करने की जबरदस्त कहानी है
02:46और ये लजक सिर्फ पौदों या चट्टानों तक मैदूद नहीं थी
02:50चलिए बका के लिए बनाएगए एक शानदार महल की तरफ चलते हैं
02:53ये सुनकर आपके जहन में भी ये सवाल जरूर उभरेगा
02:57कि भला एक तबाह कुन तीन साला खुश्क साली एक पुरताई शाही महल की तामीर का सबब कैसे बन सकती
03:04है
03:04आम तोर पर कहा जाता है कि ये कहद एक बुज़र की बद्द्द्दा का नतीजा था
03:09लेकिन इस कुदरती आफ़त और इस शानदार फन तामीर के बीच जो असल तालुक है न
03:16वो दरसल इनसानी बगा की एक इंतहाई जहीन हिकमत अमली है
03:20जरा इस नंबर पर गोर कीजिए
03:22347
03:24ये कोई मामूली हिंदिसा नहीं है
03:26ये अमीद भवन पैलिस में मौजूद कमरों की कुल तेदाद है
03:30इसका देव हेकल साइज ही हमें ये बताता है
03:33कि ये रिलीफ प्रॉजेक्ट कितने बड़े पैमाने पर शुरू किया गया था
03:37दरसल ये महल किसी शाही गुरूर या नुमाईश के लिए नहीं बना था
03:41महराजा उमेद सिंग ने 1929 में इसे एक वसी फलाही मनसूबे के तौर पर शुरू किया था
03:48ताकि फाका कशी का शिकार दो से तीन हजार किसानों को किसी तरह रोजगार मिल सके
03:53इस जमाने में इस पर 11 मिलियन रुपे की खतीर रकम खर्च की गई
03:57इसकी हर इंट, हर दीवार, बन्यादी तौर पर लोगों की जान बचाने के लिए खड़ी की गई थी
04:03जो बिलाखिर 1933 में मुकमल हुई
04:06अब इस महल की तामीराती इन्फिरादियत को समझने के लिए
04:10हम अपने अगले हिस्से यानि सहरा में आर्ट डेको पर नजर डालते हैं
04:15इस महल की एंजिनरिंग ऐसी है कि आज भी देखकर अकल दंग रह चाए
04:20इसे सुनहरी पीले रंगे रेदले पत्थर से बनाया गया है
04:24और मज़े की बात ये है कि इन बड़े-बड़े पत्थरों को इसकदर नफासत से तराशा गया
04:29कि वो पजल के टुकडों की तरह आपस में बिलकुल इंटरलॉक हो गया
04:33इस पूरी चिनाई में कोई गारा, मार्टर या सिमेंड इस्तमाल ही नहीं हुआ
04:38जरा सोचिए, इन भारी पत्थरों को लाने के लिए एक खास रेलवे लाइन तक बिछाई गई थी
04:43इससे मशुहूर माहिरे तामीरात हेंरी वान लिंचेस्टर ने डिजाइन किया था
04:48ये मगरिबी, ब्योक्स, आर्ट्स और रिवायती हिंदुस्तानी तर्ज का एक ऐसा अनोखा और शांदार मिलाब है जिसे इंडो डेको कहा
04:57जाता है
04:57और इसका वो 103 फुट उचा गुमबद जिसकी अंदरोनी चछत आस्मानी मीले रंकी है वो तो बस देखते ही बनता
05:04है
05:05बाहर के सخت और खुरदरे सहरा का इस महल की अंदरोनी खुबसूर्ती के साथ जो तजाद है वो कमाल है
05:11आज जैसा के हम जानते हैं ये इमारत बेवक्त एक शाही रिहाइशका, एक इंतहाई लग्जरी होटेल और एक जबरदस्त म्यूजियम
05:19है
05:19अब हम माजी के इन शांदार अववाब से निकल कर सीधा हाल और मुस्तक्बिल में आते हैं
05:26जदीद जोधपुर की उडान
05:28सरकारी ऐलामिय के मुताबिक हाल ही में वजीर आजम की जानिब से जोधपुर हवाई अड़े पर एक बिलकुल नई टर्मिनल
05:37इमारत का इफ्तिताह किया गया है
05:39ये नया और जदीद इंफ्रस्ट्रक्चर इस शहर के मुसलसल इर्तिका और दुनिया से जुणने की रफ्तार का एक बहुत बड़ा
05:47और एहम संग्मील है
05:48ये नया टर्मिनल हकुमत के वसीतर विकसित उडान स्कीम के अदले मरहिले का एक एहम हिस्सा है
05:55इसका सीधा सा मकसद खिते में इलाकाई हवाबाजी के राप्तों को मजीद मजबूत करना है
06:01वो शहर जो कभी तनहा और कहत का शिकार था आज तेजी से एक आलमी मरकज में तबदील हो रहा
06:08है
06:08वक्त के साथ चलने और माशी तोर पर आगे बढ़ने का यही एक रास्ता है
06:13और अब इस जाइजे के आखिर में एक इंतहाई गोर तलब बात
06:16क्या ये वाकी मुम्किन है कि कदीम आतिश फशा चटानों और कुदरती माहौलियात का तहफुज
06:22शाही विर्से की हिफाज़त और ये तेज रफतार आलमी कनेक्टिविटी ये सब बगएर किसी टकराओ के एक साथ चल सके
06:30जोदपुर की पूरी कहानी हमें यही तो बताती है कि लचक और तबदीली साथ साथ चलते हैं
06:36आपके ख्याल में क्या जदीद तरक्की की इस दोड़ में हमारा माजी यूही अपने असल रंग में महफूज रह पाएगा
06:42इस सवाल पर जरूर सोचिएगा
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