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Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ पुरी मंदिर में 16 जुलाई 2026 को रथ यात्रा का आयोजन होगा जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। अक्षय तृतीया से रथों का निर्माण शुरू हुआ था। लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा के रथ को खींचने के लिए इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में एकत्रित होते हैं। वहीं ऐसे में चलिए बताते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा में रथों को खींचने से क्या होता है |

Jagannath Rath Yatra 2026: The Rath Yatra is scheduled to be held at the Jagannath Puri Temple on July 16, 2026, and preparations are currently in full swing. The construction of the chariots began on Akshaya Tritiya. Lakhs of devotees gather for this religious and cultural event to pull the chariots of Lord Jagannath, Balabhadra, and Subhadra. In this context, let us explore the significance of pulling the chariots during the Jagannath Rath Yatra.

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00:00क्रश्नाय वाशुदेवायो हरे परमात्मने प्रणतहक्लेशन आशायो गोबिंदाय नमो नमा प्यारी मित्रों जेश्यरम जे मातादी
00:11मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं 16 जुलाई 2026 से प्रारंब होने जा रही है जगनात महाप्रभू की रथयात्रा
00:22जिसका लोग बेसबरी से इंतिजार करते हैं यह पावन दिन का यह पावन दिन क्यों खास है क्यों महत्तपूर्ण है
00:31और क्यों लोग आज के दिन जो रथयात्रा प्रारंब होती है इस रथयात्रा के खीचने के लिए उतावले होते हैं
00:41लालाईत होते हैं इच्छा उनकी होती
00:44है कि मैं रथी को खीचूं अपने हाथों से क्या है इसका कारण इसी भी से पे आप से करेंगे
00:50चर्चा तो धार्मिक माननेताओं के नुशार जो व्यक्ति इस रथी आत्रा में शामिल हो करके और रथ को खीचता है
00:59उसे एक हजार यग्य करने के बराबर का पुन्फल प्राप्
01:06आसार मात के शुकल पक्ष की द्रतियातिथी को भगवान जगनात जी की पुरी से रथियात्रा निकाली जाती है और इस
01:17साल यह रथियात्रा शोला जुलाई से शुरू हो रही है और रथियात्रा में भगवान जगनात के अलावा उनके बड़े भाई
01:27बलराम बहन सुबद्
01:29रत निकाला जाता है और इस रत यात्रा को लेकर के माननेता है कि इस दिन भगवान जगनात की बहन
01:39शुबद्रा ने उन्से द्वारिका के दर्शन करने की इच्छा जाग्रत की थी तब भगवान जगनात ने अपनी बहन की इच्छा
01:49पूर्ती के लिए उन्हें रत पर बिठा
01:52करके पूरी पूरी का पूरी नगर का दर्शन कराया था और इसके बाद रथ यात्रा की सुरवात उशीशमय से मानी
02:02जाती है
02:03जगना जी की रथ यात्रा में ऐसा वी वर्णन आता है
02:08इसकंद पुरान के अनुशार नारद पुरान के अनुशार पद्म पुरान के अनुशार और ब्रह्म पुरान के अनुशार ऐसा बताया जाता
02:18है यह हिंदू धर्म में बहुत ही विसेस महत्पूर्ण यात्रा का समय होता है
02:26दार्विद माननेताओं के नुसार जो व्यक्ति रत्यात्रा में सामिल होते हैं, रत्य को खीचते हैं, उनको सो यग्य का फल
02:36प्राप्त होता है
02:38आठ सो साल पुराने इस मंदिर में भगवान कृष्ण को जगत के नात, जगनात के रूप में पूजा जाता है,
02:48और इसके साथ ही इनके बड़े भाई बलराम्न और बहन सुबद्रा जी भी बिराज मान होती हैं
02:56रथ यत्रा में तीनों देवताओं के रथ निकलते हैं, और रथ यत्रा के दवरान भगवान जगनात के साथ में बलराम
03:06जी बलभद्र जिन को बोलते हैं, और बहन सुबद्रा जी के भी रथ अलग अलग निकलते हैं
03:13इन रथों को बनाने का जो कार्री है यह अक्षे तरतिया से प्रारंब हो जाता है और रथ यात्रा में
03:22सबसे आंगे बलरामदी बीच में बहन सुबद्रा का रथ रहता है और सबसे पीछे भगवान जगननात का रथ होता है
03:31और सभी के रथ का जो रंग होता है यह रंग भी अ
03:37मूछायी भी अलग अलग बताई गई है, तो हम आपको बताएं कि कि स रंग से होती है तीनों रंग
03:45की पहचान कौन-कौन सा रंग होता है।
04:07वह काला या नीले रंग का होता है जिसमें लाल रंग भी सामिल होता है और भगवान जगनात के रत
04:16को नंदी घोश अथवा गरुनत ध्वज कहा जाता है और इनका रत लाल और पीले रंग का होता है
04:25रत हमेशा विसेष लकड़ी का बनाया जाता है और क्योंकि ये औशधी लकड़ी होने से पवित्र मानी जाती है हर
04:36साल बनने वाले रत के जो उचाई होती है वह एक समान उचाई के बराबर रतों को बनाया जाता है
04:45अब हम आपको बताएं कि जगनात भगवान का जो रत है ये 45 फुट और 6 इंच उचा होता है
04:54बलराम जी का जो रत है ये 45 फिट का होता है और देवी सुबद्रा का जो रत है 44
05:01.6 फिट का होता है
05:03ऐसे वरणन शास्त्रमत में मिलते हैं तो रत्यात्रा प्रारंब हो रही है जगनात जी महराज भ्रमन करेंगे और जगनात जी
05:12समस्त जीवों के उपर अपनी मंगल करपा करते हैं जगनात मतलब जग का मंगल करने वाले जग को हर तरह
05:21से आनंद प्रदान करने वाले आप श�
05:28ना मिलता हूँ नए वीडियो में, तब तक के लिए दीजिए इजाज़त, जै मातादी, जै मागंगे.
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