00:00क्रश्नाय वाशुदेवायो हरे परमात्मने प्रणतहक्लेशन आशायो गोबिंदाय नमो नमा प्यारी मित्रों जेश्यरम जे मातादी
00:11मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं 16 जुलाई 2026 से प्रारंब होने जा रही है जगनात महाप्रभू की रथयात्रा
00:22जिसका लोग बेसबरी से इंतिजार करते हैं यह पावन दिन का यह पावन दिन क्यों खास है क्यों महत्तपूर्ण है
00:31और क्यों लोग आज के दिन जो रथयात्रा प्रारंब होती है इस रथयात्रा के खीचने के लिए उतावले होते हैं
00:41लालाईत होते हैं इच्छा उनकी होती
00:44है कि मैं रथी को खीचूं अपने हाथों से क्या है इसका कारण इसी भी से पे आप से करेंगे
00:50चर्चा तो धार्मिक माननेताओं के नुशार जो व्यक्ति इस रथी आत्रा में शामिल हो करके और रथ को खीचता है
00:59उसे एक हजार यग्य करने के बराबर का पुन्फल प्राप्
01:06आसार मात के शुकल पक्ष की द्रतियातिथी को भगवान जगनात जी की पुरी से रथियात्रा निकाली जाती है और इस
01:17साल यह रथियात्रा शोला जुलाई से शुरू हो रही है और रथियात्रा में भगवान जगनात के अलावा उनके बड़े भाई
01:27बलराम बहन सुबद्
01:29रत निकाला जाता है और इस रत यात्रा को लेकर के माननेता है कि इस दिन भगवान जगनात की बहन
01:39शुबद्रा ने उन्से द्वारिका के दर्शन करने की इच्छा जाग्रत की थी तब भगवान जगनात ने अपनी बहन की इच्छा
01:49पूर्ती के लिए उन्हें रत पर बिठा
01:52करके पूरी पूरी का पूरी नगर का दर्शन कराया था और इसके बाद रथ यात्रा की सुरवात उशीशमय से मानी
02:02जाती है
02:03जगना जी की रथ यात्रा में ऐसा वी वर्णन आता है
02:08इसकंद पुरान के अनुशार नारद पुरान के अनुशार पद्म पुरान के अनुशार और ब्रह्म पुरान के अनुशार ऐसा बताया जाता
02:18है यह हिंदू धर्म में बहुत ही विसेस महत्पूर्ण यात्रा का समय होता है
02:26दार्विद माननेताओं के नुसार जो व्यक्ति रत्यात्रा में सामिल होते हैं, रत्य को खीचते हैं, उनको सो यग्य का फल
02:36प्राप्त होता है
02:38आठ सो साल पुराने इस मंदिर में भगवान कृष्ण को जगत के नात, जगनात के रूप में पूजा जाता है,
02:48और इसके साथ ही इनके बड़े भाई बलराम्न और बहन सुबद्रा जी भी बिराज मान होती हैं
02:56रथ यत्रा में तीनों देवताओं के रथ निकलते हैं, और रथ यत्रा के दवरान भगवान जगनात के साथ में बलराम
03:06जी बलभद्र जिन को बोलते हैं, और बहन सुबद्रा जी के भी रथ अलग अलग निकलते हैं
03:13इन रथों को बनाने का जो कार्री है यह अक्षे तरतिया से प्रारंब हो जाता है और रथ यात्रा में
03:22सबसे आंगे बलरामदी बीच में बहन सुबद्रा का रथ रहता है और सबसे पीछे भगवान जगननात का रथ होता है
03:31और सभी के रथ का जो रंग होता है यह रंग भी अ
03:37मूछायी भी अलग अलग बताई गई है, तो हम आपको बताएं कि कि स रंग से होती है तीनों रंग
03:45की पहचान कौन-कौन सा रंग होता है।
04:07वह काला या नीले रंग का होता है जिसमें लाल रंग भी सामिल होता है और भगवान जगनात के रत
04:16को नंदी घोश अथवा गरुनत ध्वज कहा जाता है और इनका रत लाल और पीले रंग का होता है
04:25रत हमेशा विसेष लकड़ी का बनाया जाता है और क्योंकि ये औशधी लकड़ी होने से पवित्र मानी जाती है हर
04:36साल बनने वाले रत के जो उचाई होती है वह एक समान उचाई के बराबर रतों को बनाया जाता है
04:45अब हम आपको बताएं कि जगनात भगवान का जो रत है ये 45 फुट और 6 इंच उचा होता है
04:54बलराम जी का जो रत है ये 45 फिट का होता है और देवी सुबद्रा का जो रत है 44
05:01.6 फिट का होता है
05:03ऐसे वरणन शास्त्रमत में मिलते हैं तो रत्यात्रा प्रारंब हो रही है जगनात जी महराज भ्रमन करेंगे और जगनात जी
05:12समस्त जीवों के उपर अपनी मंगल करपा करते हैं जगनात मतलब जग का मंगल करने वाले जग को हर तरह
05:21से आनंद प्रदान करने वाले आप श�
05:28ना मिलता हूँ नए वीडियो में, तब तक के लिए दीजिए इजाज़त, जै मातादी, जै मागंगे.
Comments