00:03जगनात रतियात्रा 16 जुलाई 2026 से 24 जुलाई तक रहेगी जगनात रतियात्रा सर्फिक उत्सव नहीं बल्किए संदेश देती है कि
00:12भगवान स्वेम अपने भक्तों की बीच आते हैं
00:15पूरी की रतियात्रा की परंपरा का सबसे महत्वपून उलेक सकंद पुरान के उतकल खंड में मिलता है
00:22इसमें भगवान जगनात की गुंडीचा मंदर जाने रतारोहन और दर्शन के पुन्य का वरणन किया गया है
00:28ये भी कहा गया है कि जो रशद्धालू भगवान के रत के दर्शन या रत को खीचने का सौभागी प्राप्त
00:34करता है उसे महान पुन्य मिलता है
00:36अगर आप भी जगनात पुरी रतियात्रा में शामिल होने जा रही है तो दस दिनों के उत्सव का पूरा स्केडिूल
00:43यहां जान ले
00:44रतियात्रा के दौरान क्या-क्या परंपरा निभाई जाएंगी ये भी जानना आपके लिए जरूरी है
00:50मुहूर्त शास्त्र के मताबिक शुक्ल पक्ष को देवकार्य और शुब अनुष्ठानों के लिए अधिक अनुकूल माना गया है
00:57मही दौतिया तिथी भी यात्रा मांगलिक कार और शुभारंब के लिए शुब तिथियों में गिनी जाती है
01:03इसी कारें भगवान जगनात की रतियात्रा आशान शुक्ल दुटिया को अईवज़त की जाती है
01:09वैदिक पंचांग मंदर की प्राचीन, नीतियों, आगमिक, परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जगनात रतियात्रा का स्किडियूल बनाय जाता है
01:18हर अनुस्ठान का समेक विशेश तिथी से जोड़ा जाता है
01:22ये सभी उत्सव, उडिया, पंचांग और श्री मंदर की नीतियों के आधार पर संपन्न होते हैं
01:28अब 15 जुलाई 2026 दिन बुद्वार को नव जौबन दर्शन होगा
01:33स्नान पूर्णिमा के बाद एकांतवास में रहने के पशात इस दिन भगवान जगनात पहली बार भक्तों को दर्शन देंगे
01:40इसे नव जौबन दर्शन कहा गया है
01:43रथियात्रा शुरू होने से पहले भगवान के नव यौवन स्वरूब के दर्शन का विशेश लाब मिलेगा
01:49आशान शुक्ल द्वितिया के शुब अवसर पर विश्व प्रसिद्ध पूरी रथियात्रा का शुभारंब 16 जुलाई दिन गुरुवार से होगा
01:57भगवान जगनात बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपने अपने भव्वे रथो पर सवार होकर श्री मंदर से गुंडीचा
02:06मंदर की और प्रस्थान करेंगी
02:08इस साल आशान शुक्ल ब्यतियाति थी 15 जुलाई सुभग 11 बचकर 50 मिनट से शुरू होकर 16 जुलाई सुभग 8
02:16बचकर 52 मिनट तक रहेगी
02:18मई 20 जुलाई 2026 दिन सुमवार को हेरा पंचमी होगी गुंडीचा मंदर पहुँचने के बाद भगवान जगनात कुछ दिनों तक
02:26वहीं विश्राम करते हैं
02:28इस दोरान हीरा पंचमी के अवसर पर मातालक्षमी श्री मंदर से गुंडीचा मंदर पहुँचेंगी या नुष्टान भगवान जगनात और मातालक्षमी
02:35के दिवी मिलन का प्रतीक है
02:37मई 23 जुलाई 2026 दिन गुरुवार को संध्या दर्शन होगा इस दिन गुंडीचा मंदर में संध्या समय भगवान जगनात बलभद्र
02:46और देवी सुभद्रा के विशेश दर्शन होंगे
02:49बड़ी संख्या में श्रधालू सदिव्य दर्शन के लिए पहुँचते हैं
02:53मई 24 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार को बहुदा यात्रा निकाली जाएगी
02:59गुंडीचा मंदर में प्रवास पूरा करने के बाद भगवान जगनात बलभद्र और सुभद्रा की वापसी यात्रा शुरू हो जाएगी
03:07तीनों रतों को खीषते विश्रधालू ने पुनाश्री जगनात मंदर लेकर आते हैं
03:11मई 25 जुलाई दिन शनिवार को सुना बेशा होगा
03:15बहुदा यात्रा के बाद तीनों देवताओ को उनके रतों पर ही स्वन आभूशनों से अलंकरत किया जाता है
03:20सभव विश्रेंगार को सुना बेशा कहते हैं
03:23ये रत यात्रा के सबसे आकरशक और लोगप्री अनुष्ठानों में से एक है
03:27मई 26 जुलाई को अधर पाना किया जाएगा
03:30इस दिन भगवान जगनाद बलभद्र और सुबद्रा को विशेश प्रकार का पारम पर एक मीठा पे अधर पाना अर्पित कराय
03:38जाता है
03:39ये प्रसाद रतों पर वराजमान दिव विशक्तियों और पार्शदों को समर्पित किया जाता है
03:44मही रतियात्रा का अंतिम और सबसे खास अनुष्ठान निलादरी बीजे होते हैं
03:49इस दिन भगवान जगनात भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा विधी विधान के साथ पुना श्री जगनात मंदर के गर्ब ग्रह
03:57में स्थित रत्न सिंगहासन पर वराजमान होते हैं
04:00इसी अनुष्ठान के साथ पूरी की विश्व प्रसिदरत यात्रा का विधिवत समापन हो जाता है
04:05फिल हाल इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
04:09साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें
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