00:00बच्चों को 7-8 साल की उमर में चेम जैसे कि ने ड्रिल किया गया
00:05लड़कियां इस तरह के कपड़े नहीं पहनती
00:09उनको तो इस चीज का समझ भी नहीं था बट चाहिए छोटे-छोटे कजन्स के बीच में बाल नहीं दिखना
00:15चाहिए
00:15अब ना वो लड़के को समझ में आ रहा ना वो लड़की को समझ में आ रहा और जिसे हमारे
00:20दीन को एक तरीके से बच्चपन में थूसा गया है
00:25यह बच्ची है छोटी मुस्लिम बच्ची उसके बाल दिख रहे हैं इस बात को लेकि उसे लजजित कर दिया उसके
00:30बीतर शेम शर्म डाल दी
00:32और यह सब किसके नाम पर हम चला ले आते हैं धर्म के नाम पर यह धर्म नहीं है
00:39मैं बिल्कुल नहीं कहा रहा हूँ कि कपड़े उतारना धर्म है
00:42मैं आपसे कहा रहा हूँ कि कपड़ों से धर्म का रिष्टा ही नहीं है
00:46ना पहनने से ना उतारने से
00:48बहुत सारे कपड़े पहन कर भी तुम धर्मिक नहीं हो जाओगे
00:52और सारे कपड़े उतार देने से भी तुम धार्मिक नहीं हो जाओगे
00:54बात बाहरी परिधान की नहीं है
00:58आंतरिक केंद्र की है
01:00पूरे शरीर को ढख लोगे
01:01तो तुम दीनी हो गए, मजबी हो गए
01:06जहां कहीं भी तुम धर्म का संबंद इन चीजों से जुड़ा हुआ देखना जान लेना
01:10ये समाज उपर से धार्मिक और भीतर से घोर अधार्मिक है
01:14इतनी बाते इज़त की, लाज की
01:18लज्जा इस्त्री का आभूशन है
01:20क्यों भाई?
01:22बस एक वही लज्जा रखनी होती है कि कभी जूट के आगे सर न जुका दूँ
01:26उसके अलावा हमें कहीं नहीं लज्जा वज्जा आती, बहुत हम बेशरम है
01:30हाँ, कभी जूटे का साथ दे दिया
01:34गलत जगह घुटने टेक दिये
01:36तो वो जरूर हमारे लज्जा की बात
01:38बाकी हमें
01:39तुम्हारी सामाजिक माननेताओं को लेके कोई लाज्शरम नहीं है
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