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Transcript
00:00बहुत बहुत महनत लगती है एक यूरोप या अमेरिका बनने में
00:04बहुत महनत लगती है
00:05सिर्फ ये कहने से नहीं हो गया रही है तो लुटे रहे थे
00:08पहले जाके इन्होंने रेड इंडियन्स का लैंड लूट लिया
00:11उसके बाद जाकिनों ने कोलोनीज का पैसा लूट लिया तो यह ऐसे हो गए है
00:15हाँ जो आप बोल रहे हो बाट खीक है वो कहानी का एक हिस्सा है
00:18पर कहानी का ज्यादा बड़ा हिस्सा ये है कि उन्होंने बहुत-बहुत महनत करी है
00:23रिसर्च करी हैं इंस्टुशनस कड़े करे हैं और इंस्टिउशन सिर्फ हार्ड institutions नहीं
00:28सॉफट इंस्टिउशन्स भी उद अरण के लिए डेमोक्रिसी आज हम कहते हैं कैसे हैं
00:33लोगतंत्र लोकतंत्र दुनिया का जब्षपड़ा लोगतंत्र हम लोगतंत्र क्याud iki
00:40प्राचीन काल में हमारे पास सारा ग्यान था यह सब आये इनोंने हमारी किताबों से तो चुराया आईने क्या
00:45कौन गोल रहा है यह जिसको इतिहास में कुल इतना ही पता है कि प्राचीन काल में हम विश्व गुरू
00:50थे
00:51एकनॉमिक्स में क्या पता है प्राची इनकाल में हम सोने की जड़िया थे
00:54हिस्ट्री में क्या पता है प्राची इनकाल में हम विश्व गुरू थे
00:58लेकिन उसके बाद भी हम बदलना नहीं चाहते, सुधरना नहीं चाहते, हम सचमुच विशुगुरू नहीं बनना चाहते, हम बस दावे
01:05करना चाहते हैं बड़े-बड़े, खुद को मजबूत बनाओ, दूसरे तो दूसरे अपने इसाफ से काम करेंगे, प्रश्ण यह है
01:11कि ह
01:11हमारी टांगें इतनी सबल क्यों नहीं है कि हम अपने इसाफ से चल पाएं
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