00:00अचारी जी मेरा सवाल लिविन रिलेशन्शिप को लेकर है
00:03हमारे जनरेशन में ये तो बहुत नॉर्मिल सी चीज है
00:07कि अगर एक दूजरे को दोनों पसंद कर रहे हैं तो साथ में है
00:11अगर ये मैं समाज की दृष्ची में देखूं तो ये बहुत गंदी चीज है
00:15बात ये नहीं है कि विवाह है या लिविन है
00:19बात ये है कि समझ है कि नहीं है और प्रेम है कि नहीं है
00:24सवाल ये होता है
00:26लिविन करने से आप कोई करांतिकारी नहीं हो जाते
00:29लिविन में कोई ऐसे सुर्खाप के पर नहीं लगे कि आप बोलो कि हम तो विद्रोही हैं
00:33कौन सा विद्रोही क्या कर लिया इसमें ऐसा है
00:35जिंदगी में हर तरीके से तुम बिल्कुल किरे वो इंसान हो
00:40लिविन करने से तुम महान हो जाओगे
00:43उसे धर्म, चिकित्सा, विज्ञान, दर्शन, किसी क्षेतर में कुछ पूछ लो उसे कुछ नहीं पता
00:48चलो ये तो बाहरी बाते हो गई
00:50भीतर उसके डर भरा हुआ है, अंधविश्वास भरा हुआ है
00:54भीतर उसके सौत रह के वहम है, तीरशिया है
00:57ले दे करके कुल मिला करके एकदम ही साधारण और औसत इंसान है
01:02मैं विवाहा का समर्थक बनकर नहीं बोल रहा
01:04ये इलजाम मतलगा देना, छी
01:07मैं नहीं कहा रहा हूँ कि कूदगूद के जाओ और ब्यार अचाना शुरू कर दो
01:11तुम ब्या करो की नहीं करो, मुझे धेले का फर्क नहीं पड़ता
01:15मेरा रिष्टा गीता से है, मैं ग्यान की बात कर रहा हूँ
01:20जिन्दगी में उसको आने तो पहले
01:22हाँ, आपकी जिन्दगी में कोई आता हो ग्यान ले करके
01:26आप कहें मुझे इसकी संगती चाहिए
01:28और वो संगती एक रिष्टा बन जाए
01:31चलने दो, शायद रिष्टे को जीवन में प्रवेश भी इसी द्वार से करना चाहिए
01:36पर फिर वहाँ पर केंद्रिय इस्त्रिय पुरुष नहीं होगा
01:40वहाँ पर केंद्रिय ज्यान होगा
01:41वहाँ आपका पहला रिष्टा आद्मी औरत से नहीं होगा
01:45उचाही और आजादी से होगा
01:47तुम मेरी जिंदगी में इसी लिए हो
01:49क्योंकि तुम मेरे लिए आजादी लेकर आए हो
01:53अब हमारा साथ हो गया, संगत बन गई
01:55अब यह अच्छी बात है, बढ़िया है
01:57और तभी तक रहोगे भी जिंदगी में जब तक
01:59मेरे लिए मुक्ति के वाहक रहोगे
02:02जिस दिन तुम मेरे लिए बंधन बनने लगे चल फो
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