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यह वीडियो 25 जनवरी 2026 को GBU ऑडिटोरियम में आयोजित "श्रीमद्भगवद्गीता" सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00बहुत मुश्किल है कि कोई ग्रहिणी रेस्टरॉण के खाने की तारीफ कर दे।
00:05कुल एक तु काम करती है, खाना लौकी, तुरई, आलू और पालक, इनके अलावा चालीस साल में तुमने क्या बनाना
00:14सीखा है?
00:17चालीस साल से तुम इनी को घुमा घुमा के वही वही बना रही हो, जो एक काम करती हो, तुम
00:21उसमें भी कोई विविधता या विशेशक्यता नहीं ला पाई हो
00:26वही रोटी बना देती हो, वही पराठा बना देती हो, वही पोहा बना देती हो, वही पांच कुल सब्जिया हैं,
00:31उनी को घुमाती ही रहती हो, खाना ही बनाती हो, तो कम से कम तुमने आठ दस तरह का खाना
00:36बनाना सीखा हो, ता भी तुमसे बोलते हैं, बना दो मेक्सिकन, त�
00:55आरहे रहे रहे, क्या यार दिला दिया, ओ आलू, आलू, आलू, दिस दिन बहुत कुछ होगा खास, पराठे डाल दू,
01:08आलू के पराठे दई के साथ, सोचो अभी ये वीडियो पुब्लिश को जी कितनी गालिया मेलेंगी, मुझे अभी से मज़ा
01:18आ रहा है, मज़ा ही नियार
01:20जुरजुरी दॉड़ रही है, वो ऐसे बैठी होई है, स्क्रीन के, और पानी पीपे के मुझे गाली दे रही है,
01:26ये विवस्था कैसी है, जो आपको भोजन बनाने से आगे का कोई काम करने ही नहीं दे रही, इसका मतलब
01:41ये नहीं है, कि मैं कह रहा हूँ कि खाना ही मत खा�
01:46जगह है, खाना बनाने के भी अपनी एक जगह है, लेकिन उससे कहीं उच्छी जगह है, जिंदगी में उना सब
01:55कामों की जो जिने लायक बनाती है, और अगर खाना बनाते बनाते आपके पास वो उच्छे काम करने का वक्ती
02:01नहीं मिला, भाण में जाए ऐसा खाना?
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