00:00इस्तरीय ही है ज्यादा जो भगत नदर आती है जो ज्यादा जा
00:03कर बाबाओं की शरण बेटती है बजह क्या है क्योंकि उसको यह जता दिया गया है कि तुम ही तो
00:09हो विभिजार是不是 तुम ही तो हो पापी नी। तुमहारा शरीर SOUND पाप
00:13तो बाबाजी की शरण में जाओ नहीं तो पापिन बनी रहेगी नरक में मरेगी
00:18गौतम रिशी की पतनी है अहिल्या बहुत आकरशक हैं तो इंद्र की वासना जग जाती है
00:24इंद्र आ जाते हैं क्या बन करके गौतम रिशी बन करके आ जाते हैं
00:28अहिल्या पहचान नहीं पा रही है, उनकी इतनी गल्ती है कि पहचान नहीं पाई कि पती नहीं है, तो इंदर
00:36आते हैं और अहिल्या के साथ सम्मंध बनाकर चले आते हैं गौतम रिशी कहीं बहारे दरोदर अपना बैठे हैं, रिशी
00:42को पता चलता है कि ये तो पीछे से इंद
00:47और अहिल्या को बना देते हैं पथर, अवस किसी और की पुरुष की और धन्ड किसको मिल रहा है।
00:55और उसके बाद अहिल्या को तारा भी किसने जा करके अवतार हैं पर पुरुष हैं।
01:01श्री राम के समब जाए आके उन्होंने जब ऐसे इस परश किया तो फिर वो पुरुष ऑप्रेसर भी है और
01:06पुरुषी सेवियर भी है माने तारणहार भी पुरुषी है
01:09समझ भी आरी बात अब ये सब जो जो कहानिय दंत कताएं हैं जन्शुतियां हैं ये सब आज भी हमारे
01:19भीतर जबरदस तरीके से बैठी हुई है
01:24देखो इस बेशरम को ये भी कोई उमर है
01:28विदान तकेला है जो कहता है तुम क्या पहन रहे क्या नहीं पहन रहे
01:32किधर को बैठ रही किधर नहीं बैठ रही कहां संबंद बना रही कहां जा रही
01:36मुझे कोई लेना देना नहीं
01:37मुझे तुमसे बस एक बात पूछनी है
01:41अहंकार तुम्हारा कहीं
01:43फाल्तू विश्यों से आसकत तो नहीं है
01:46बस एक प्रश्णा विधानत के पास
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