00:00मैं नलायक भी बहुत मेरा ये पक्षाप लोग बहुत रख लेते हो कि किताबें वगेरा बच्पन में बहुत पढ़ते थे
00:08क्लास का भी मॉनिटर था हमारे यहां हाउस होते थे चार येलो हाउस का कैप्टेन भी था और मेरी क्लास
00:14टीचर थी उनसे अभी दो-चार साल पहले दखने हो गया मिला भी बूली कि यह पहली बार मैंने देखा
00:19है जो मॉनिटर है और हाउस कैप्टन है वही पनिश्मेंट पा
00:39क्लास पूरी मैं समाल लोंगा टीचर की मजबूरी रहती थी वो मुझे अभीतर भेज देती थी फिर बात में कहती
00:45थी क्लास तो तुम समाल लोगे तुम्हें कौन समालेगा तो सब चलता रहता था शरारत नौटीनेस बड़ी जरूरी चीज है
00:55बच्चे में क्या बुढ़ो
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