00:00क्यों माबाप होने के नाते हमें इतनी हसरत हो कि बच्चे बच्चियों के ब्याह में और संबंध में हमें घुसना
00:06है, क्यों घुसना है?
00:08मैंने तो अपने लड़के के लिए लड़की देख रखी है
00:10क्या?
00:10देखने दो ना उनको, हाँ, उपस्थित रहिए, वो सलाह मांगने आएं, तो सलाह जरूर दीजिए, माबाप के लिए भी ये
00:20नाज की बात होनी चाहिए, कि इन मामलों पे हमारे बच्चे को हमारी जरूरत नहीं पड़ती, हमने उसको ऐसा ताकतवर
00:28और आजाद इंसान बनाय
00:30कि वो समर्थ है, काबिल है इन चीजों पे अपने फैसले खुद लेने के लिए, हाँ, अनुभाव अभी उतना नहीं
00:37है उसे, और अनुभाव का भी कुछ महत्तो होता है, तो जब उसे लगता है कि उसे हमारी सलाह चाहिए,
00:43तो वो आकर हमसे बात कर लेता है, ये माबाप के
00:49लिए बड़ी विरोध की बात बन जाती है, पापा हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं, क्या, चला जाए
00:55यहां से, वो इसमें अपमान मानने लगते हैं, आप किसी को 20 साल तक अपने कंधे पे बठाए रहोगे, और
01:0220 की उमर में कहोगे, जा आप अपनी टांगों से द�
01:04तो वो दोड़ना तो छोड़ो, वो चल भी पाएगा, तो बचपन से ही स्वतंतरता का बच्चों को अभ्यास कराईए, अभिभावक
01:14होने के नाते, उसके निरणयों की जिम्मेदारी आपकी नहीं है, उसके केंदर की आपकी जिम्मेदारी है
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